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Chapter 16

chapter 16

क्यूट कपल

"माहीन, क्या हम बाहर चले" दानियाल ने उसे फोन किया और कहा।"नहीं, घर पर सब बड़े हैं और वैसे भी आज फिज़ा की फ्रेंड्स आ रहीं हैं तो मैं उनके साथ एंजॉय करूंगी" माहीनने कहा और फोन रख दिया।"यार, नासिर तेरा आइडिया बेकार हो गया" दानियाल ने मुंह बना कर कहा।"फिज़ा की बच्ची ने उन्हें पहले ही बता दिया होगा" नासिर ने फिज़ा को कोसा।       शाम हो चली थी। फिज़ा और माहीन के साथ घर की सभी औरतें उनका इंतजार कर रही थी। दानियाल तो वहां से बहाना बना के निकालना चाहता था लेकिन माहीन की ज़िद पर कुकिंग के लिए रुकना पड़ा। नासिर भी उसके साथ किचन में था।कार की हॉर्न बजी। सब उनका वेलकम करने बाहर को दौड़े। दानियाल ने नासिर को उदास और शिकस्त खाई हुई नज़रों से देखा और वापिस कुकिंग में मशरूफ होगया। डेजी, पिंकी और सनम तीनों ने फिज़ा को महेज़ हाय कहने के बाद दानियाल को पूछा।इतने में टीना और हिना भी आ गई। हिना को देख कर माहीन के चेहरे का रंग उड़ गया।"ओह, ये तो वही है जिसने मेरा बोल्ड सैंपल लिया था। ये यहां क्या कर रही है" उसने खुद से ही सवाल किया। दानियाल की फैमिली के लिए ये बिकुल नया नहीं था। उन्हें पता था की फिज़ा की तमाम फ्रेंड्स दानियाल में कितनी इंटरेस्टेड हैं।दादी ने उन्हें बताया की वो उनके लिए स्नैक्स बना रहा है।सब के घर में दाखिल होते ही किचन गेस्ट रूम बन गया था। घर के बड़े चाय का कह कर टैरिस पर चले गए। वो तीनों दानियाल के ईर्द गिर्द जा चिपकी। टीना अपनी बड़ी बहेन हिना के लिहाज़ में उनसे दूर ही खड़ी रही।हिना के दीदार के बाद नासिर का अलग ही खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने मन ही मन दानियाल को शुक्रिया कहा।  उन्हें दानियाल के आस पास देख कर माहीन अंदर ही अंदर जल भुन रही थी। उसे दानियाल के पास जाने का मौका ही न मिला की वो कुछ पूछती। नासिर की मौजूदगी, हिना को अनकंफर्टेबल कर रही थी। उनसे अपने बाज़ू में खड़ी माहीन से पानी का कह कर हॉल में सोफे पर आ बैठी।      पानी लेने किचन में दाखिल हुई माहीन ने दानियाल और इसके साथ चिपकी हुई डेजी को तीखी नज़रों से देखा और हिना के लिए ट्रे सजाने लगी। बाकियों ने तो किचन में ही खाना शुरू कर दिया था। "इसी लिए भाई आपको बाहर ले जाना चाहते थे" नासिर ने ट्रे में फ्रूट सलाद रखते हुए कहा।"ये वाकई फिज़ा की दोस्त हैं या दानियाल की ex" माहीन ने चीड़ कर धीमी से कहा।"ह.. हा फिज़ा की सारी फ्रेंड्स को दानियाल भाई पे क्रश हैं" नासिर हसा।"क्रश my foot" माहीन दांत पिसती बाहर आ गई।"कैसी हैं आप" हिना ने पानी का ग्लास उठाते हुए पूछा।"ठीक हूं" माहीन ने सवालिया निगाहों से उसे देखा।"खाओ न" माहीन ने रंग बिरंगी कुकीज़ और पेस्ट्री से सजी ट्रे की तरफ इशारा किया।"ये मेरा फैवरेट है" हिना ने फ्रूट सलाद का बाउल उठते हुए कहा।"ओह,ये तो नासिर ने रखा है" माहीन ने मुस्कुराते हुए कहा।"डेनियल क्या तुम मेरा सात डिनर करोगे" डेजी ने टूटी फूटी हिंदी में दानियाल को डिनर के लिए इन्वाइट किए ।उसके इन्विटेशन पर दानियाल ने फिज़ा को घूरा।"ओह डेजी, हम सब साथ डिनर करेंगे" फिज़ा ने कहा।"भाई, भाभी को लगता है ये सब आपकी ex हैं" नासिर ने दानियाल के कान में सरगोसी की ।"What" दानियाल के ऊंचे लहज़े ने सबका ध्यान उसकी तरफ कर दिया।बाहर से हेवी शॉपिंग बैग लिए आते दावर को दानियाल ने देखा और  गलत वक्त पर दावर की एंट्री उसे भारी पड़ गई। दानियाल ने उसे ही बलि का बकरा बना दिया। "Oh, हैंडसम दावर" दानियाल ने ज़ोर से कहा था। दानियाल उनसे पीछा छुड़ाना चाहता था। उसे माहीन की तीखी नज़रों से खौफ आ रहा था।"जी,भाई" दानियाल के अजीब रवैए से हैरान दावर रैक पर थैला रखते हुए बोला।"आज तुम मुझे कुकिंग में हेल्प करना" दानियाल ने कहा और अपना फोन निकल साइड में होगया।चारो लड़कियां दावर को आंखें फाड़ कर देख रही थी। दावर भी उन्हें देख चौका। फिज़ा ने दानियाल को घूरा और उन्हें दावर से मिलवाया। वो दावर को देख कर छोटे बच्चों जैसे उछल रही थीं।ये सारे तमाशे देखती हाल में बैठी माहीन ने दानियाल का टेक्स्ट देखा। जो दानियाल ने उन लड़कियों का मरकज दावर को बनाने के बाद माहीन को किया था।"नासिर, तुम हिना को कंपनी दो मैं चाय ले जाती हूं"  माहीन ने नासिर को रोका और खुद टैरिस पर बड़ों की फरमाइश पे चाय लेकर चली गई। दानियाल ने उसे हिना और नासिर की मुलाकात के लिए टेक्स्ट किया था।"कैसी हो" नासिर ने हिना को हसरत भरी निगाहों से देख कर पूछा।"ठीक हूं" हिना ने सिर्फ इतना ही कहा। वो कहना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन जुबां साथ नहीं दे रही थी।उसे नासिर से शिकवा था। कॉलेज के बाद उसे कभी कॉन्टैक्ट न करने का। हालांकि उससे कॉन्टैक्ट करने के कई रास्ते थे। उसे शिकवा था मिलने का वादा कर के न आने का।"स्टडी कैसी चल रही है" नासिर ने उसे उसके ख्यालों से झिंझोड़ा।"अच्छी" हिना ने कहा और उसे देखती रही।"अ.. कुछ कहना है" नासिर उसकी झील सी गहरी आंखों का लगातार वार न सह सका और बोल पड़ा।"क्या हम कहीं अकेले बात कर सकते हैं" हिना ने कहा।"नासिर ब्रो, इधर आ जाओ"बेशक नासिर का जवाब हां होता लेकिन दावर ने उसे आवाज़ लगा दी।    गार्डन में रात की महफ़िल ज़ोरों पर थी। नासिर और दावर ने बाहर ही डाइनिंग टेबल सेट कर दिया था। जोदानियाल और दावर के पकाए हुए खुशबूदार और लज़ीज़ खानों से भरा था। सब ने मज़े से खाना खाया। रीमा और रिदा खाने के बाद अपनी तरफ चली गई थी। शीबा और दादी ज़रा देर बाहर टहलती रही फिर अंदर चली गई।इतने खाने के बावजूद दावर उन लड़कियों के लिए बीफ रोस्ट कर रहा था। रोस्टेड बीफ से उठता धुंआ तेज़ हवाओं के साथ दूर दूर तक फैल रहा था। डेजी, पिंकी, टीना और सनम दावर को घेरे खड़ी थी। जैसे जैसे गोस्ट रोस्ट होता को खाती जाती और उसकी तारीफे करती। उनके साथ खड़ी मुस्कुराती फिज़ा अंदर से जल भुन रही थी। और कर भी क्या सकती थी आखिर सारे नमूने उसके बचपन के फ्रेंड्स थे।"थैंक्स टू दावर, अगर वो न होता तो मुझे वहां बैठना पड़ता" दानियाल ने अपने बाज़ू में बैठी माहीन से कहा। "हां, उसके बाद आप की खैर न होती भाई" नासिर ने माहीन की तरफ इशारा कर दानियाल से कहा। खाने के बाद माहीन और हिना झूले पे बैठी थी और नीचे ज़मीन पे मलमली घांस पर दानियाल और नासिर बैठे थे।ज़रा देर गुफ्तगू करने के बाद दानियाल अपने कमरे में चला गया। उसके पीछे माहीन उसका फोन देने आ गई जो वो बाहर भूल आया था। उनके जाने के बाद नासिर ने हिना से कहा" तुम मुझे बात करना चाहती थी। वॉक पर चलें।" वो उठे और बाहर को चल दिए।    दरवाज़े पर दस्तक हुई। दानियाल ने दरवाज़ा खोला। सामने माहीन थी। वो उसे शर्टलेस देख कर घबरा गई।"तुम अपना फोन बाहर छोड़ आए थे" उसने घबराहट और शर्म के मिले जुले लहज़े में कहा।दानियाल ने फोन के बजाय उसका हाथ पकड़ा हल्का सा झटका देकर उसे कमरे के अंदर कर लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया।  "फोन लाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया" दानियाल उसके और करीब आकर धीरे से उसके कान में कहा। दरवाज़े से लगी माहीन को उसकी नज़दीकी अनकंफर्टेबल कर रही थी। उसकी धड़कनें तेज़ हो रही थी। उसने खुद को संभाला और दानियाल के मज़बूत बाजूओं के घेरे से निकल कर उसके कमरे का जायेज़ा लेने लगी।वो कमरा दिन के मुकाबले रात को और भी ज़्यादा हसीन लग रहा था। कमरे की सभी लाइट्स ऑफ थी सिवाए उस लैंप के जो दानियाल के बेड की दाहिनी साइड पे लगा था जो उसने बुक पढ़ने के लिए ऑन रखी थी। खुली खिड़की से आती ठंडी हवा और हल्की सी बाहर की रोशनी उस कमरे को और रोमांटिक लुक दे रही थी। गार्डन में चल रही पार्टी के शोर सराबे भी हल्के हल्के  सुनाई दे रहे थे। दानियाल दरवाज़े पे अपना कंधा टिकाए हाथ सीने पर बंधे उसे कमरे को निहारे देख रहा था।    बेड पे खुली किताब के हवाओं में फड़फड़ाते पन्नों ने माहीन का ध्यान अपनी तरफ खींचा। "ओह तुम पढ़ रहे थे" माहीन बेड पर बैठी किताब उलट पलट कर देखते हुए बोली। "हां" दानियाल उसके बाज़ू में बैठते हुए बोला"ओह ये तो बिजनेस से रिलेटेड है, मुझे लगा रोमांटिक नॉवेल होगी" माहीन ने कंधे उचकाए और बेदिली से किताब बंद कर साइड टेबल पर रख दिया।"मैं रोमांस नॉवेल नहीं पढ़ता" वो उसकी तरफ झुका हुआ बोला।"वो क्यों" माहीन उससे दूरी बनाने के लिए पीछे की तरफ झुकती गई और उसके मुलायम बिस्तर में धंस गई।"क्यों की मैं पहले ही बहुत रोमांटिक हूं" दानियाल ने कहा और अपने हाथ उसके अगल बगल टिकाए ज़रा देर उसको देखता रहा फिर अपना सर कंधे पे टिका कर उसे बाज़ू में करवट लेट गया और बोला" अगर में रोमांस नॉवेल पढ़ने लग जाऊं तो तुम रोमांटिक दानियाल प्रो को कैसे झेलोगी।""ओह, ऐसा है क्या" माहीन अपनी नर्वसनेस छुपाती हुई बोली और जाने के लिए उठने लगी।"मत जाओ" दानियाल ने लेटे लेटे ही उसे अपने बाज़ू में कस कर बोला। वो वापिस लेट गई और दानियाल ने उसके कंधे पे अपने सर रख लिया। इस वक्त तक दानियाल की परफ्यूम और शैंपू की खुशबू तरो ताज़ा थी। "मुझे जाने दो कोई आ गया तो" माहीन ने कहा।डोंट वरी, कोई नहीं आएगा। बस थोड़ी देर ऐसे ही रहो फिर चली जाना।" दानियाल ने सुकून की सांस ली और बोला"वैसे भी उनकी पार्टी सारी रात चलेगी और कल दिनभर वो सोएंगे।" माहीन को ज़रा राहत तो मिली फिर भी दानियाल का शर्टलेस होना उसे नर्वस कर रह था।"माहीन" दानियाल बोला।"ह...म..." माहीन ने उसके बालों में  अपनी उंगलियां फेरते हुए कहा।"थैंक्यू, मेरी ज़िंदगी में आने के लिए, मुझे पसंद करने के लिए और मुझ से मोहब्बत करने के लिए।"दानियाल ने उसे देखते हुए कहा।"आज सडेनली ये सब....." माहीन ने कहा।"आई थिंक मैं तुम्हें मिस कर रहा हूं" दानियाल ने उसके चेहरे के करीब अपना चहेरा कर के बोला।"अच्छा, लेकिन मैं तो तुम्हारे पास हूं" माहीन ने मुस्कुराते हुए कहा। उसने दानियाल को कभी इतना जज़्बाती नहीं देखा था जितना अभी वो उसकी बाहों में था।वो वाकई उसे मिस कर रहा था। उसने अपने मॉम और डैड के अलावा किसी को इतना मिस नहीं किया था। अमेरिका से वापिस आने के बाद वो अक्सर उन्हें बहुत ज़्यादा मिस किया करता था लेकिन उसे अपने जज़्बात जाहिर करने की आदत नहीं थी।आज पहली बार उसने माहीन को कहा था की वो उसे मिस कर रह है हालांकि वो उसके सामने थी।         बातों बातों में वो कब एक दूसरे की बाहों में नींद की वादियों में सैर करने लगे उन्हें पता ही न चला था।(आगे अगले पार्ट में)

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