Chapter 15: chapter 15

Billionaire's Dark DesireWords: 31132

   अग्निहोत्री मेंशन......,        अजय,विनोद ,वेदिका,दिया और आरव हैरानी से बस त्रिहांश को देखे जा रहे थे जो इस वक्त किसी राक्षस की तरह हंस रहा था | उसका हंसना इस वक्त पूरे हाल में भयानक तरीके से गूंजने लगा था |       अजय की दांत भींच गए थे | वह चिल्लाते हुए बोला,""_ तुम उस लड़की के लिए मेरे दोस्त और अदा के साथ कुछ नही कर सकते त्रिहांश...अभी के अभी उस लड़की को बाहर फेंक दूंगा....!!! "     अजय का इतना कहना ही था की त्रिहांश जोर से सामने रखे हुए टेबल पर जोर से मारा तो वह ग्लास की टेबल चूर चूर हो कर पूरे हाल में फैल गए |       "  त्रिहांश......!!!! "     वेदिका हड़बड़ाते हुए त्रिहांश का नाम चिल्लाते हुए उसके करीब आने को हुई तो त्रिहांश अपना सर ना में हिलाते हुए उसे गुस्से से देखने लगा तो वेदिका अपने जगह में ही रुक गई |     वह फिर त्रिहांश को देखने लगी जो खून से लथपथ हुआ था | वह बोली,""_ त्रिहांश तुम्हारे हाथ से खून बह रहा है बच्चा तुम....!!! "     वेदिका डर से आगे बोल ही नहीं पाई क्यों की त्रिहांश गुस्से से अजय के बेहद करीब गया था | अजय भी गुस्से से ही घूर रहा था | तभी त्रिहांश बेहद सख्त और ठंडे लहजे में बोला,""_ मिस्टर अजय अग्निहोत्री, मैं वापस लौटा ही उसके लिए अगर उस पर हाथ लगाना क्या नजर डालने के भी हिम्मत की तो कैर नही चाहे कोई भी हो ....सुना आपने ? "    त्रिहांश लास्ट लाइन बोलते हुए जोर से कॉफी टेबल पर लाता मारा |       उसकी कर्काश आवाज से अब हाल में एक दम से सन्नाटा फसर गया था | सब हैरानी से त्रिहांश को देख रहे थे | तभी वेदिका बोली,""_ क्या बोल रहे हो त्रिहांश ? तुम उस लड़की के लिए ........!!! "    " हा वेदू... उस लड़की के लिए तो वापस आया हु अगर उसके साथ किसी भी तरह का खिलवाट हुआ तो किसी को भी नही छोडूंगा...किसी को भी नही .....| " वेदिका की बात को बीच में ही रोक कर त्रिहांश गुस्से से एक एक बात भी चबाते हुए अजय को देख कर बोला | उसका प्वाइंट सीधा उस पर ही था क्यो की उसी के वजह से राज्ञा के साथ इतना बुरा हुआ था |      त्रिहांश इतना कह कर वहा से सीधे राज्ञा के पास गया | वही सारे घरवाले अपने जगह में जम गए थे | वही अजय को कुछ समझ नही आ रहा था | उसका बेटा इस तरह एक लड़की के लिए पागल हो जाएगा उसे तो पता ही नही चला था |         वह अपना फोन ले कर किसी को कॉल करते हुए बाहर चला गया | वही विनोद का दिमाग का सूई इस वक्त त्रिहांश की कही हुई बातो में अटकी हुई थी | वह जल्दी से अपने रूम में गया | फिर किसी को कॉल करने लगा | उधर से एक बूढ़ा आदमी जो विनोद का एज का ही था | वह बोला,""_ क्या हुआ विनोद,बड़े दिन बाद याद कर रहे हो ? "         विनोद उस आदमी की बात सुन कर बोला ,""_ राज्ञा खुराना ,इस लड़की का डिटेल चाहिए मुझे ...!! "   उधर से वह आदमी थोड़ी देर चुप हुआ फिर वह बोला ,""_ ठीक है ..!!! "       दूसरी तरफ...,         ठाकुर निवास....,       अर्यांश एक टक उस रूम के तरफ देख रहा था जहा उदासी से उसकी मां माया देख रही थी | जब से एक लड़की की तस्वीर वाली पार्सल आया था तब से आर्यांश को माया ठीक नही लग रही थी |        अर्यांश फिर माया को देखने लगा | माया की चेहरे पर अजीब सी भाव नजर आ रहे थे | वही आईरा अर्यांश से अलग हो कर बोली,""_ भाई मुझे बाहर ले चलो न,मुझे icecream खाना है | "         " आते ही शुरू हो गई ? " आर्यांश उसके माथे पर टैप करते हुए बोला तो अईरा छोटू सा चेहरा बना कर जिद्द करते हुए बोली,""_ भाई..प्लीज ? "  "  ठीक है ,ठीक है बहना जाओ जा कर रेडी हो जाओ | " आर्यांश उसकी बहन की जिद्द देख खुद ही हारते हुए बोला तो आईरा खुशी से उसके गाल पर किस किया फिर रूम के तरफ भाग गई |    वही आर्यंश माया की तरफ देखा जो लैपटॉप में कुछ काम कर रही थी |    अग्निहोत्री मेंशन......,       त्रिहांश गुस्से से आ कर सोफे पर बैठा हुआ था | वही राज्ञा के साथ साथ इशान इशा और उर्मी बैठे हुए थे | वह सब खुशी खुशी एक दूसरे से बाते करते हुए हंसी मजाक कर रहे थे लेकिन त्रिहांश के आते ही वह चारो अपने जगह में ही जम गए थे | उनमें से कोई भी ना हिल रहा था और नाही बात कर रहा था | सबकी नजरें त्रिहांश पर टिकी थी |       थोड़ी देर सन्नाटे भरे माहौल में कलल डालते हुए वेदिका रूम में आई तो सबकी नजर वेदिका की हाथो पर टिक गई जहा उसने फर्स्ट एड बॉक्स पकड़ा था | उन्हे समझ नही आया था की वेदिका फर्स्ट एड बॉक्स क्यों लाई ,क्यों की उन्हें त्रिहांश का जख्मी हुई हाथ दिखाई नही दिया था |         उर्मी अपने जगह से उठ कर उसके पास जाते हुए बोली,""_ मम्मा क्या हुआ ? आप यह फर्स्ट .....!!! "  उर्मी की बात उसकी मुंह में ही रह गए क्यों की वेदिका त्रिहांश के बगल में बैठ कर उसका हाथ देखने लगी थी | त्रिहांश का हाथ खून से सना हुआ था | यह देख उर्मी,और अब इशान और इशा भी उसके पास आ गए थे सब हैरानी से कभी त्रिहांश को देखते तो कभी त्रिहांश के हाथ को |     वही राज्ञा को कुछ समझ नही आ रहा था की वहा हो क्या रहा है ? वह भी उठ कर त्रिहांश के पास जाती तभी उसे त्रिहांश की गुस्सैल आवाज सुनाई दी |       " बेड से उतरने की हिम्मत भी मत करना...| "    राज्ञा रुक कर लाचारी में त्रिहांश को देखने लगी | त्रिहांश उसे देख नही रहा था | लेकिन उसका चेहरा गुस्से से भरा था |      वही त्रिहांश की बात सुन कर वेदिका,इशान ,इशा और उर्मी हैरानी से राज्ञा की तरफ देख रहे थे | वही वेदिका त्रिहांश के चोट साफ करते हुए बोला,""_ इतना गुस्सा क्यों करते हो त्रिहांश ? "    त्रिहांश ने एक नजर राज्ञा को देखा जो पिल्ला जैसा चेहरा बना कर उसे ही देख रही थी | वह फिर उससे नजरे हटाते हुए वेदिका से बोला ,""_ मैं ऐसा ही हू वेदु.| "    वेदिका ने अपना सर ना में हिलाया फिर उसके हाथ को पट्टी कर त्रिहांश से बोली,""_ मै तुम्हारे लिए कुछ बना कर लाती हूं, भूख लगी होगी ना .. ? "   बोलते हुए वेदिका त्रिहांश के बालो पर हाथ फेरी फिर वहा से चली गई | वही इशान इशा और उर्मी को जानना था की त्रिहांश को चोट कैसे लगी है ?  और उन्हें जवाब त्रिहांश से तो मिलने से नही रहा तो वह तीनो भी वेदिका के पीछे भागे |    राज्ञा को भी जानना था लेकिन त्रिहांश उसे कोई जवाब देना जरूरी नही समझता था तो उसने कुछ भी पूछा नही | वही त्रिहांश अपने हाथ को घूर रहा था | वह फिर उठ कर राज्ञा के पास जा कर उसके दवाई निकालने लगा |   राज्ञा एक टक त्रिहांश के हाथ को देख रही थी | वह थोड़ा झिझकते हुए पूछी,""_ आपके हाथ को क्या हुआ ? कैसे लगी है यह चोट ? "     त्रिहांश उसके दवाई ले कर उसके बगल में बैठ गया | राज्ञा उससे जवाब का इंतजार कर रही थी | लेकिन वह जवाब देने के मूड में नहीं था | त्रिहांश सीधे उसके मुंह में दवाई रखते हुए बोला,""_ दवाई खालों | "     राज्ञा दवाई खा कर पानी पीते हुए उसे देखने लगी | त्रिहांश के चेहरे पर कोई भाव नहीं था | वह बस राज्ञा को देख रहा था |     वही राज्ञा उससे फिर बोली,""_ मुझे...!!! "  वह बस एक ही word बोल पाई थी की त्रिहांश उससे लिपट गया | राज्ञा चुपचाप अपने जगह में बैठी रही | वही त्रिहांश अपने होंठो से उसके गर्दन चूमते हुए बोला ,""_ तुम्हे क्या...? "   राज्ञा हल्के से सिसकने लगी थी | वह थोड़ा अटकते हुए पूछी ,""_ वह मुझे राशु से बात करना है | " " Hmmmm..!!! " त्रिहांश ने इतना कहा और राज्ञा से ऐसे ही लिपट रहा | वही राज्ञा ने उसे कुछ नही पूछा | थोड़ी देर बाद त्रिहांश अपना सर ऊपर कर राज्ञा को देखा | राज्ञा के चेहरे पर कोई भाव नहीं था | वह ना खुश लग रही थी ना दुखी | उसे तो समझ नही आ रहा था की उसकी जिंदगी में हो क्या रहा है | बस त्रिहांश जो चाह रहा था वही उसके साथ हो रहा था |      वह धीरे से राज्ञा के गाल पर हाथ रख कर सहलाते हुए बोला ,""_ तुम ठीक हो ना ? तुम्हे कही ज्यादा दर्द नही हो रहा है ना ? "      राज्ञा ने अपना सर ना में हिलाते हुए अपने नजरे नीचे कर ली तो त्रिहांश उसके माथे पर किस करा फिर उसे ले कर उसके रूम में जाते हुए बोला ,""_ चलो तुम अब रूम में शिफ्ट हो जाओ | "   राज्ञा बस उसे देखती ही रही | वही त्रिहांश आराम से उसे बेड पर लेटा कर क्लोसेट रूम में गया | फिर आ कर राज्ञा को फोन देते हुए बोला ,""_ अब यह तुम्हारा है | "      राज्ञा का मुंह लटक गया| वह बोली,""_ मुझे कुछ नही लेना आपसे | "      त्रिहांश का पकड़ फोन में कस गया | वह थोड़ी देर बिना भाव के राज्ञा को देखा फिर उसके बेहद करीब झुकने लगा | राज्ञा उसे ही देख रही थी लेकिन वह जल्दी से उससे नजरे हटा ली | तभी त्रिहांश धीमी आवाज में उसके कान में फुसफुसा कर बोला,""_ मेरे दिए kiss तो तुम रख लेती तो लेकिन....!!! "     त्रिहांश ने इतना ही कहा था की राज्ञा जल्दी से उसे खुद से दूर करते हुए बोली,""_ आ आप मुझ पर इल्जाम लगा रहे है मुझे तो आपकी kiss भी नही रखना होता लेकिन आप ही जबरदस्ती मुझे किस करते हुए मेरे करीब आते है मैं आपके करीब नही आती ...!! "      त्रिहांश का जवाब सुन कर राज्ञा को बहुत तेज गुस्सा आ रहा था | वह कब उससे किस मांगती थी ? यह वही इंसान है जो उसके बेहद करीब आ कर उसे kiss करता तो कभी उसे चूमते हुए उसे तंग करते रहता है | और अब ऐसा कह रहा है की वह खुद उससे रोज kiss मांगती हो ?     राज्ञा का मुंह इस वक्त किसी गुब्बारे की तरह फुला हुआ था | वही त्रिहांश कब से उसे ही देख रहा था लेकिन अचानक से उसकी हंसी छूट गई | वह हंसने लगा |   वही उसे हंसता देख राज्ञा घूर कर उसे देखने लगी | फिर मुंह बनाते हुए बोली,""_ आ आप मुझ पर हंस रहे है ? "   त्रिहांश हंसते हुए उसके बगल में बैठा | फिर उसके हाथ में फोन थमाते हुए बोला,""_ यह फोन रख लो जब मैं तुम्हे जाने दूंगा न तब तुम यह सब लौटा देना ठीक है ? "        राज्ञा थोड़ी देर उसे देखी फिर वह बोली,""_ मेरा कल interiew है प्लीज जाने दीजिए ना ? जिस दिन आप छोड़ेंगे तो में कहा जाऊ ? कम से कम मेरे पास जॉब तो...!!!"      त्रिहांश का औरा एक दम से सख्त हो गया | वह अपने दांत पीसते हुए बोला,""_ राठौड़ इंडस्ट्री में तुम कदम भी नही रखोगी समझी और रही बात जॉब की जब तक तुम पूरी तरह ठीक नही होती तब तक मैं तुम्हे bed से भी हिलने नही देने वाला तो फिलहाल जॉब का ख्याल निकाल ही दो | "     त्रिहांश गुस्से से इतना बोल कर वहा से चला गया | वही राज्ञा का मुंह बन गया था | वह बड़बड़ाते हुए बोली,""_ पता नही यह आदमी खुद को क्या समझता है ? मुझ पर ऐसा हुकुम चलाता है जैसे मै इसकी कोई चीज हू ? चैन से सांस भी नही लेने दे रहा है शैतान कही का hhhhhh ? "      त्रिहांश को कोसते हुए राज्ञा राशि को कॉल कर बात करने लगी |     ऐसे ही दिन बीतते गए और त्रिहांश का राज्ञा पर अपना हक जताना कम होने के बजाए बढ़ते गया | राज्ञा पूरी तरह ठीक भी हो गई थी लेकिन त्रिहांश ने उसे जॉब जाने के लिए परमिशन ही नही दिया था | जिस बात से वह लड़की उससे खफा भी थी लेकिन क्या फायदा ? वह कहते है ना ? नाराज वहा हुआ करते है जहा मनाने वाला हो | त्रिहांश से वह इस तरह का उम्मीद नही रख सकती थी |       पंद्रह दिन बाद..   "  अब में ठीक हु फिर आप यह दवाई क्यों खिला रहे है ? " सामने खड़े त्रिहांश को शिकायत करते हुए राज्ञा बोली | त्रिहांश इस वक्त उसके लिए दवाई निकाल रहा था | उसने हमेशा के तरह उसकी सवाल का जवाब ना देते हुए उसे दवाई खिलाया | और बाहर चला गया |   राज्ञा का मुंह बन गया | वह थोड़ी देर उसे कोसते हुए वही टहलती रही |  फिर किचन में चली गई,ताकि वह दिया और वेदिका को मदद कर सके |     किचन में .....     वेदिका और दिया लंच रेडी कर रहे थे | राज्ञा उनके पास गई तो वेदिका बोली,""_ तुम यहा क्यों आई बेटा ? हम कर लेते ? "   " में बोर हो रही थी आंटी | " राज्ञा इतना बोलते हुए उनके काम में हेल्प करने लगी |     तभी वहा उर्मी और इशा, राज्ञा के पास आते हुए बोले,""_ राज्ञा भाभी...? "   उन दोनो ने इतना ही कहा था की राज्ञा उन्हे गुस्से से आंखे दिखाई तो वह दोनो वेदिका और दिया को देखने लगे | वह दोनो हैरानी से इशा और उर्मी को ही देख रहे थे | क्यों की राज्ञा को उन दोनो ने भाभी कहा था | उसे भाभी कहना ना घरवलो को पसंद था और नाही त्रिहांश को | तो राज्ञा भी नही चाहती थी की इशा, इशान और उर्मी उसे भाभी ना कहे ,लेकिन वह तीनो सुने तब ना ? त्रिहांश के तरह ही जिद्दी थे लेकिन गुस्सैल नही |       उर्मी और इशा को समझ आ गया था की राज्ञा उन्हे गुस्से से क्यों घूर रही है ? वह उर्मी वेदिका बोली,""_ राज्ञा को सीरियल देखना बहुत पसंद है मम्मा और उसमे इन्हे भाभी वाली कैरेक्टर बहुत पसंद तो हम दोनो इन्हे चिढ़ाने भाभी कहा , देखो यह चिढ़ भी गई | "   उर्मी इतना बोल कर हंसने लगी और उसके साथ देते हुए इशा भी हंसने लगी | वही वेदिका और दिया को यह बात अजीब लगी क्यों की वह राज्ञा tv देखते हुए नही देखा था |     वही राज्ञा अपने आंखे छोटी कर उन दोनो को घूर रही थी | लेकिन उर्मी और इशा को इससे कोई फर्क नही पड़ा | वह राज्ञा का हाथ पकड़ कर बाहर ले जाते हुए बोले ,""_ चलो अब ,हम बाहर जाने की प्लानिंग कर रहे है | "     बोलते हुए उर्मी,और इशा राज्ञा को हाल में ले जाने को हुए की तभी राज्ञा अजय से टकरा गई | जिससे उनके हाथ से कुछ फाइल्स नीचे गिर गए | जो वह ले कर कही जा रहे थे |    राज्ञा जल्दी से झुक कर नीचे पड़े हुए फाइल्स उठाते हुए बोली,""_ sorry अंकल वह हमने देखा नही था....| "    बोलते हुए राज्ञा सारे फाइल्स उठाने लगी | वही इशा और उर्मी डरते हुए अजय को देख रहे थे | जो गुस्से से राज्ञा को देख रहा था | उन दोनो को पता था की अजय को राज्ञा से कितना प्रोब्लम है | लेकिन राज्ञा भी इस बात से अंजान नही थी लेकिन उसे इससे कोई फरक नही पड़ता था |      राज्ञा फाइल्स उठा कर अजय को देने लगी तो अजय लगभग उसके हाथ से फाइल्स चिन कर कुछ कहता उससे पहले ही उर्मी बोल पड़ी,""_ डैड,फाइल्स हम दोनो की वजह से नीचे गिरे है, इसमें इनकी कोई गलती नही है | "     " तो अब तुम दोनो भी त्रिहांश की तरह....| "  बोलते बोलते अजय रुक गया | क्यों की त्रिहांश वही सीढ़ियों से उतर कर नीचे आ रहा था | उसने सब कुछ देख भी लिया था |    अजय फिर बिना कुछ कहे वहा से चला गया | वही उर्मी और इशा की नजर भी त्रिहांश पर गई थी | वह दोनो उसके पास जा कर बोले ,""_ भाई हम movie देखने जा रहे है और राज्ञा भी हमारे साथ आएगी | "      त्रिहांश राज्ञा को ही देख रहा था | वह फिर उर्मी से बोला,""_ ठीक है ..| "    उर्मी और इशा चहकते हुए राज्ञा के पास आ कर बोले ,""_ हम बाहर तुम्हारा wait कर रहे है जल्दी से चेंज कर आ जाना | "   राज्ञा ने बस हा में सर हिलाया फिर त्रिहांश को एक नजर देख कर रूम में चली गई | राज्ञा की चेहरे पर भले ही कोई भाव नहीं था लेकिन उसके दिल में कही न कही तकलीफ सा मेहसूस होने लगा था | लेकिन उसके पास कोन था जिसे वह यह सब बताए ? वह बस एक तरह गुट गुट के जी रही थी |               वही त्रिहांश राज्ञा को जाता हुआ देख रहा था | वह फिर  उसके रूम में चला गया | राज्ञा इस वक्त क्लोसेट रूम में अपने लिए कपड़े ढूंढ रही थी | उसे समझ नही आ रहा था की वह कोनसा पहने ? क्यों की त्रिहांश उसके लिए वहा पूरा मॉल की कपड़े खरीद कर रख दिया था |   वह सोचते हुए एक पिंक अनारकली सूट पर हाथ रखती उससे पहले ही उसके कमर पर किसी की हाथ रेंगने लगी | राज्ञा की आंखे अचानक से भींच गए | वह सिहरते हुए त्रिहांश का नाम ली।       " त्रिहांश ...ummmm...| "    To be continued....Â