Chapter 18: chapter 18

Billionaire's Dark DesireWords: 32753

  कार में....    त्रिहांश की बेहद ठंडे नजर मेहसूस करते हुए राज्ञा डर कर इधर उधर अपने नजरे फिरा रही थी | उसे इस वक्त बेहद uncompertable feel हो रहा था | लेकिन वह चाह कर भी उस आदमी को कुछ भी कहने की हिम्मत नही कर सकती थी |      वही त्रिहांश उसे ही cold look देते हुए देख रहा था | तभी वह उसके ऊपर और झुकते हुए बेहद धीमी मगर ठंडे लहजे में बोला ,""_ तुम्हे तो घर जा कर बताता हु | "  राज्ञा अपने नजरे ऊपर कर उसे मासूमियत से देखने लगी | उसने किया भी तो क्या था ? वही त्रिहांश उससे अलग हो कर कार स्टार्ट किया |      करीब पंद्रह मिनट के आस पास उसका कार आ कर अग्निहोत्री मेंशन के सामने रुक गई | इशान,इशा और उर्मी जल्दी से कार से बाहर आ कर बिना रुके वहा से अंदर भाग गए |     राज्ञा का भी यही हाल था | वह जल्दी से सीट बेल्ट खोल कर बाहर आ कर उनके पीछे चली गई | त्रिहांश उन सबको देख रहा था | वह फिर अपना सर ना में हिलाते हुए फोन ले कर बाहर आया |      वह फिर अंदर जाने को हुआ तो उसकी नजर दो ब्लैक cars पर गई जो अग्निहोत्रीयों का नही था | त्रिहांश फिर ना समझी में घर के तरफ देखते हुए अंदर चला गया |   वही हाल में इस वक्त कुछ लोग बैठे हुए थे | जिन्हे वेदिका ड्रिंक्स दे रही थी | वही इशान,इशा राज्ञा और उर्मी सब एक साथ ना समझी में सोफे पर बैठे हुए उन नए लोगो को देखते हुए अपने जगह में खड़े थे | हाल में इस वक्त एक मिडिल एज की कपल और एक लड़का जिसका उम्र लगभग 28 साल लग रहा था और उसके बगल में ही एक लड़की जिसकी उम्र बस 24 साल का था | वह चारो सामने वाले सोफे पर बैठे हुए थे |     उनके सामने अजय,विनोद और आरव बैठ कर उनसे बड़े ही शान से बात कर रहे थे | तभी वहा त्रिहांश आया | त्रिहांश की नजर भी उन पर ही गई थी | बस एक नजर देखते ही त्रिहांश को माज़ार समझ आ गया था | वह बिना कुछ कहे वहा से अपने रूम के तरफ जाने लगा तो विनोद ने उसे रोका |      " रुको त्रिहांश......!!! " विनोद की आवाज सुन कर त्रिहांश रुक गया |    वही विनोद त्रिहांश के पास आते हुए उस आदमी से बोला,""_ मलहोत्रा साहब यह मेरा छोटा पोता है ,त्रिहांश अग्निहोत्री |"   इस नाम को कोन नही जानता था | जिताना पॉवर इस नाम में था उससे लोगो का रूह रूह तक कांप जाता | त्रिहांश का नाम बिजनेस से ज्यादा उसका खौफ से वाकिफ था |         वह आदमी जिसका नाम धीरज मलहोत्रा था | वह एक नजर अपनी बेटी पलक को देखा फिर उठ कर त्रिहांश के पास जा कर उसके तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोला ,""_ Hello....!!! "   त्रिहांश ने उससे हाथ मिलाया और वहा से जाने को मुड़ा तो धीरज मलहोत्रा बोला,""_ मिस्टर त्रिहांश मेरी बेटी पलक और बेटा रूहान, इनसे भी मिलिए | "      धीरज का इतना कहना ही था की पलक और रूहान उठ कर त्रिहांश के पास आ कर उससे हाथ मिलाया | राज्ञा चुपचाप दूर खड़े हो कर त्रिहांश को देख रही थी जो पलक से हाथ मिला रहा था | त्रिहांश को इस तरह किसी और को छूता देख राज्ञा को पता नही क्यों अच्छा मेहसूस नही हो रहा था |    वही त्रिहांश ज्यादा देर वहा ना रुकते हुए वहा से अपने रूम के तरफ चला गया | वही पलक एक टक त्रिहांश को जाता हुआ देख रही थी | वह उसके लिए ही तो आई थी |    वही विनोद उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोला ,""_ बहुत जल्द उससे बात कर लूंगा बच्चा,तुम ही अब अग्निहोत्री परिवार की बहु बनाने वाली हो | "       विनोद इतना बोलते हुए टेढ़ी नजरों से एक नजर राज्ञा को देखा | राज्ञा सब कुछ देख रही थी उसने दादाजी की बात सुन भी लिया था | वही इशान इशा और उर्मी का चेहरे का रंग उड़ गया था | वह तीनों ना समझी में राज्ञा को देखने लगे |     राज्ञा को समझ आ गया था की वह तीनो उसे क्यों देख रहे है तो वह धीरे से बोली,""_ मैंने तुम तीनो को पहले भी कहा था की मेरे और त्रिहांश के बीच ऐसा कुछ नही है ,लेकिन तुम तीनो ने सीरियस ही नहीं लिया | "   राज्ञा इतना बोल कर अपने रूम के तरफ चली गई | वही इशान ,इशा और उर्मी को बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था | वह राज्ञा को अपनी भाभी मान चुके थे | वह तीनो भी अपने रूम के तरफ जाने को हुए तो विनोद उन्हे बुला कर पलक और रूहान से मिलाने लगा | वह बेमन से उन दोनो से मिले फिर अपने अपने रूम के तरफ चल पड़े |   रूम में.....   राज्ञा धीरे से अपने कमरे में आई | उसका मन भारी भारी सा लग रहा था |वह सीधे ड्रेसिंग टेबल के पास जा कर शीशे  में खुद का जिस्म देखने लगी | उसके जिस्म पर किसी ने हाथ लगाया था तो वह सिर्फ त्रिहांश था | उसके जिस्म के हर एक कोने को उसने ऐसे छुआ था जैसे वह अपना चाप छोड़ रहा हो या उसे अपने महक में रूबरू करा रहा हो ? उस जिस्म को उसने अब ऐसा तलब लगा दिया था की अब वह जिस्म सिर्फ उसका स्पर्श ही महसूस करना चाहता था | उस जिस्म को अब उस बेरहम इंसान की लत लग गई थी | जिस्म.... हा उस लड़की का जिस्म अब उसका कहा रह गया था..?भले ही वह ऐसा कुछ नही किया था जो एक कपल करते है ,लेकिन ऐसा भी कुछ नही बचा था की जो कुछ करना अभी बाकी रह गया हो |    जिस्म का खेल खेला भी गया था और अधूरा छोड़ा भी दिया था | यह उस बेरहम इंसान का चाल था जिसमें राज्ञा के दिल के सिवा उसका पूरा जिस्म इस्तेमाल हो चुका था या यू कहे की अब दिल पर भी असर करना बाकी रह गया था...यह Desire त्रिहांश अग्निहोत्री का था | उसके जिस्म पर अपना हक जताते हुए वह बिगड़ा हुआ Billionaire अपना Desire को अंजाम दे रहा था |    राज्ञा इस वक्त अपने आपको उस शीशे में देख रही थी | उसका एक हाथ उसके पूरे जिस्म पर फिर रहा था क्यों की वह उस पल को याद कर रही थी जब जब त्रिहांश उसे छुआ था | त्रिहांश के हर एक touch को याद करते हुए वह अपने जहन में उसकी स्पर्श को उतार रही थी |       उसके आंखे हल्के नम थे | वह धीरे से बुदबुदा कर बोली,""_ इस जिस्म को आपने मैला कर दिया है त्रिहांश,और अब आखरी सांस तक इस जिस्म पर सिर्फ आपका हक रहेगा,किसी की गंदी नजर तक इस पर डालने नही दूंगी ,यह जिस्म आपका है और हमेशा आपका ही रहेगा...!!! "   क्या नाम था इस प्यार का ....? नही यह प्यार नही यह उस Mr. Billionaire का desire था | जिस तरह वह अपने डिजायर पूरा कर रहा था उसी तरह वह राज्ञा के जिस्म के साथ साथ उसके दिल पर भी उसके दिए हुए दाग लगने लगे थे |     राज्ञा अपने आप को टच करते हुए शीशे में अपने आपको ही खोए हुए अंदाज में देख रही थी | तभी उसे अपने गर्दन में किसी की धीमी और गरम सांसे मेहसूस हुई तो वह जल्दी से होश में आ कर देखी | वह त्रिहांश था |    त्रिहांश धीरे से उसके कमर को अपने दोनो हाथो से लपेटा फिर उसके कंधे पर अपना टुडी रखते हुए बेहद धीमी मगर ठंडे लहजे में राज्ञा से पूछा,""_ यह तुम क्या कर रही थी  ? "            राज्ञा अपने नजरे नीचे झुका चुकी थी | उसे समझ नही आ रहा था की त्रिहांश उसकी इस तरह की हरकत देख कर क्या समझा होगा ?      त्रिहांश एक टक मिरर में उस लड़की का चेहरा देख रहा था जो हद से ज्यादा मुरझा गया था | त्रिहांश की आंखे सिकुड़ गए | वह उसे अपने तरफ घुमा कर उसकी टुडी पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठाते हुए बोला,""_ Look at me Lovey...mmmm.hmmm  राज्ञा मेरी तरफ देखो | "    त्रिहांश की बात सुन राज्ञा ने ना अपने नजरे उठा कर उसे देखा और नाही उससे अलग हुई | तभी त्रिहांश थोड़ा गुस्से से उसके टुडी को कसके पकड़ कर दबाते हुए बोला,""_ मैंने कहा मेरी तरफ देखो राज्ञा | "      राज्ञा करहाते हुए उसे देखी | तभी उसकी आंखो से एक कतरा आंसू चलक | त्रिहांश उसे ही ना समझी में देख रहा था | वह थोड़ी देर पहले तो बिलकुल ठीक थी फिर अचानक से रोने क्यों लग गई |        त्रिहांश धीरे से लेकिन बेहद गुस्से से उससे पूछा,""_ रो क्यों रही हो ? "  राज्ञा रोते हुए ना में अपना सर हिलाई फिर उससे लिपट गई | त्रिहांश को समझ नही आ रहा था की यह लड़की ऐसे रोने क्यों लगी है ? वह उसके बालों पर हाथ फेरते हुए थोड़ा धीमी आवाज में पूछा,""_ क्या हुआ है तुम्हे ? तुम रो क्यों रही हो ? किसी ने कुछ कहा क्या ? "     त्रिहांश की लास्ट लाइन सुन कर राज्ञा जल्दी से अपना सर ना में हिलाते हुए अपने आंसू पोछते हुए बोली,""_ कि.. कीसी ने कुछ नही कहा | "    राज्ञा नही चाहती थी की त्रिहांश गुस्से से उसके वजह से घरवालों से कुछ भी कहे.... वैसे भी उसे किसी ने कुछ कहा ही नहीं था तो वह नही चाहती थी की त्रिहांश बेकार में किसी पर भी गुस्सा निकाले |         त्रिहांश उसके गाल को बेहद नरमी से पकड़ते हुए धीमी स्वर में पूछा ,""_ फिर तुम क्यों रो रही हो ? "   राज्ञा नम आंखों से त्रिहांश को ही देख रही थी | वह धीरे से उसके शर्ट की बटन पर हल्के हल्के से टैप करते हुए मासूमियत से बोली,""_ कुछ नही बस ऐसे ही रोना आ गया | "     त्रिहांश चुपचाप उस लड़की को देख रहा था जो रोते हुए कभी उसके शर्ट के बटन के साथ खेल रही थी तो कभी उसके सीने पर | राज्ञा को इस वक्त बिलकुल अंदाज नही था की वह ऐसा कर त्रिहांश को किस हद तक उकसा रही है ?     वही त्रिहांश की आंखे धीरे धीरे मदहोशी से छोटे होते जा रहे थे | वह उसके कमर को कसके पकड़ कर अपने आप से चिपकाया फिर उसके गाल पर अपने नाक रब करने लगा | तभी राज्ञा की पकड़ उसके शर्ट में कस गया | वह अपने पलके उठा कर त्रिहांश को देखी | जो उसके पूरे चेहरे पर किस कर रहा था |       वही राज्ञा अपने आंखे बंद करते हुए उसके गले में अपने दोनो बाहें डाल कर उसे फील करने लगी | त्रिहांश उसे अपने बेहद करीब कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाया और उसे बिना रुके किस करते हुए उसके कमर को सहलाने लगा |        राज्ञा पीछे के तरफ झुकते हुए आहे भर रही थी | तभी रूम का door knock हुआ | यह देख वह झट से अपने आंखे खोली | वही त्रिहांश रुकने के मूड में नहीं लग रहा  था | वह राज्ञा को सोफे पर लिटा कर उसके ऊपर झुकने लगा |     राज्ञा की नजर door पर थी जहा इस वक्त दिया की आवाज गूंज रही थी | त्रिहांश राज्ञा की ड्रेस को उसके कंधे से सरका कर वहा kiss करते हुए बोला,""_ जब तक मेरा तुम्हे छोड़ने का मन नही करेगा तब तक मै नही छोड़ रहा राज्ञा ...| "     राज्ञा लाचारी में त्रिहांश को देखने लगी | वह फिर उसके चेहरे को अपने हाथो में थामते हुए बोली,""_ प्लीज त्रिहांश,बाहर मेहमान आए है ? "     " तो...? " त्रिहांश उसका हाथ झटका कर पूछा तो राज्ञा लाचारी में उसे ही देखने लगी | वही त्रिहांश उसके कमर को सहलाते हुए उसके ड्रेस को लगभग पूरा नीचे सरका कर किस करने लगा तो राज्ञा के मुंह से आह निकल गई |   "  राज्ञा...बेटा डिनर रेडी है जल्दी से आ जाओ ..|  रूम के बाहर खड़ी दिया ने राज्ञा को आवाज लगाया |      राज्ञा सिहरते हुए त्रिहांश को देखी | जो door के तरफ घूर रहा था | उसे इस वक्त राज्ञा से अलग नही होना था |    त्रिहांश छोड़िए ना ? " राज्ञा उसे रिक्वेस्ट करते हुए पूछी तो त्रिहांश उससे अलग हो गया | वही उसके अलग होते ही राज्ञा भी उठ कर अपने कपड़े ठीक करने लगी लेकिन उसका हुक नही लग रहा था | त्रिहांश उसे देख रहा था लेकिन उसने उसकी कोई मदद नहीं की |      उसे अपने काम में कभी भी रुकावट पसंद नही था | लेकिन इस वक्त उसे आधा राज्ञा ने इरिटेट किया था तो आधा दिया ने |    राज्ञा बोली,""_ त्रिहांश इसे लगाइए ना ? "       त्रिहांश ने एक नजर हुक को देखा फिर उठ कर बालकनी में चला गया | राज्ञा को बहुत गुस्सा आ रहा था | वह बड़बड़ाते हुए बोली,""_ खोलते वक्त तो बड़े मजे से खोलते है लेकिन अब ...? "    राज्ञा जल्दी से क्लोसेट रूम में गई | फिर कपड़े चेंज कर बाहर आई | त्रिहांश अभी भी बालकनी में ही खड़ा था | राज्ञा door open कर बाहर चली गई |         त्रिहांश इस वक्त रेलिंग को टिक कर एक टक दूर तक अपने नजरे गड़ाते हुए खड़ा था | वह अपने जेब में से सिगरेट निकाल कर उसका कश लेने लगा |          दूसरी तरफ......     माया इस वक्त एक रूम में आ कर घूम घूम कर उस रूम के दीवारे पर लगाए हुए तस्वीर को देख रही थी | उस रूम में एक लड़की की तस्वीर थी जो उसकी बचपन से ले कर आज तक के सारे तस्वीर....!!!     माया की आंखे नम थे | वह एक तस्वीर के पास जा कर उसे छूते हुए बोली,""_ तुम....तुम कैसे उसके पास पहुंच गई ? उसकी वजह से ही तो मैने तुम्हे खुद से दूर रखा था ,तुम क्यों पहुंची उसके पास ..? क्यों....? "       माया की आंखों से आंसू बहते हुए उसके गाल से हो कर नीचे गिर गए | तभी उसे अहीरा की आवाज सुनाई दी ..   " मम्मा.....मम्मा कहा हो आप ? "  माया ने जल्दी से door close किया और बाहर चली गई |      " मम्मा....मम्मा...!!! " हाल में रखे हुए सोफे पर खड़ी हो कर आहिरा जोर जोर से माया को आवाज लगा रही थी |     वही माया जल्दी से उसके पास आते हुए बोली,""_ क्या हुआ अहीरा ? तुम इस तरह चिल्ला क्यों रही हो ? "     आहीरा मुड़ कर माया को देखी | जो सीढ़ियों से उतर कर नीचे आ रही थी | वही अहिरा उसके पास जाते हुए बोली,""_ मम्मा मुझे बहुत जोरो की भूख लगी है ,चलिए आप मेरे लिए पास्ता बनाइए | "  अहीरा इतना बोल कर उसे किचन में ले गई |    अग्निहोत्री मेंशन....     डाइनिंग टेबल पर इस वक्त सारे घरवाले और मल्होत्रा फैमिली,धीरज, उसकी बीवी और पलक और रूहान सब बैठे कर खाना खा रहे थे |     तभी वहा राज्ञा गई तो अजय के चेहरे के हाव भाव बदला | वही वेदिका बोली,""_ बच्चा तुमने आने में कितना देर कर दिया ? आओ यहां बैठो | "     वेदिका ने उसे अपने बगल वाली सीट पर बैठने को बोली तो राज्ञा बिना कुछ कहे वही बैठ गई | उसके दूसरे साइड में ही रूहान बैठा था जो कब से उसे देखे जा रहा था | राज्ञा का दूध जैसा बदन उसके पहने हुए ब्लैक नाइट सूट में बेहद खूबसूरत लग रहा था |       राज्ञा को अपने ऊपर रोहन की नजर मेहसूस हुई उसने एक नजर उसे देखा फिर इग्नोर कर खाना खाने लगी |    तभी धीरज बोला,""_ विनोद साहब,यह लड़की कोन है ? आपने इनका परिचय नही दिया ? "      धीरज की बात पर सबकी नजर राज्ञा पर गई | वही राज्ञा भी खाना छोड़ कर सबको देखने लगी | तभी वेदिका बोली,""_ यह राज्ञा है , त्रिहांश की दोस्त कुछ दिन यहां रहने आई है | "    वेदिका की बात पर सबने एक दूसरे को देखा | फिर खाना खाने लगे |    थोड़ी देर बाद सब खाना खा कर वहा से उठ कर जाने लगे | रोहन और पलक थोड़े दिन अग्निहोत्री मेंशन में ही रुकने वाले थे | रोहन बहुत धीरे से खा रहा था लेकिन जैसे ही राज्ञा खाना खत्म कर उठने लगी वह भी जल्दी से हाथ धो कर उठ गया |        राज्ञा अपने रूम के तरफ जा रही थी | तभी रोहन उसे रोकते हुए बोला,""_ Hi राज्ञा..? "   राज्ञा मुड़ कर रोहन को देखने लगी | वही रोहन उसके पास आ कर अपना हाथ बढ़ाते हुए बोला,"" _ रूहान....!! "   राज्ञा ने एक नजर उसे देखा फिर बिना सोचे समझे अपना हाथ आगे बढ़ा कर रूहान का हाथ पकड़ते हुए बोली,""_ राज्ञा....!! "     राज्ञा इतना बोल कर अपना हाथ छुड़वाने लगी तो रूहान बिना उसके हाथ छोड़े ही बोला ,""_ Nice name...!! "    रूहान को समझ नही आ रहा था की वह राज्ञा से क्या बात करे ? क्यों की राज्ञा की खूबसूरती देख कर वह थोड़ा एक्साइटेड भी था और नर्वस भी | वही राज्ञा अपने हाथ छुड़वाते हुए बोली,""_ मेरा हाथ छोड़िए...!! "  " ओह सॉरी....!!!! " रूहान इतना बोलते हुए राज्ञा का हाथ छोड़ा | वही राज्ञा को उसकी नजरे और हरकते अजीब लग रहे थे | तो वह ज्यादा वहा ना रुकते हुए वहा से चली गई |     वही रूहान उसे ही जाता हुआ देख रहा था | वह फिर अपने बालो में हाथ फिराते हुए बोला ,""_ ओह गॉड !! इसने तो पहली नजर में ही मुझे पागल बना दिया ? "    रूहान वहा से रूम में चला गया | वही कोई था जो कब से अपनी गुस्सैल नज़रों से यह सब देखते जा रहा था | वह कोई और नहीं त्रिहांश था |    त्रिहांश राज्ञा के रूम से बाहर निकल कर अपने रूम के तरफ जा ही रहा था की तभी उसकी नजर रूहान और राज्ञा पर गई थी जो एक दूसरे से हाथ मिला कर बात कर रहे थे | उसका जबड़ा सख्त हुआ था | वह घूर कर राज्ञा को देखा था जो रूम के अंदर जा रही थी |       वह उसके पास जाते हुए उसे आवाज लगाया ,""_रुको ...? "   राज्ञा मुड़ कर ना समझी में उसे देखने लगी | तभी त्रिहांश बेहद धीमी मगर गुस्से से एक एक बात भी चबाते हुए बोला,""_ मेरे लिए ब्लैक काफ़ी ले कर रूम में आओ , अगर पांच मिनट से भी ज्यादा टाइम लिया न तो तुम्हारा कैर नही | "   त्रिहांश ने वहा से जाने को मुड़ा |   To be continued.......,     Â