Chapter 25: chapter 25

Billionaire's Dark DesireWords: 30423

  अब आगे ....    रात का वक्त था और त्रिहांश के रूम मे इस वक्त सिर्फ राज्ञा की मीठी मीठी सी आहे निकल रही थी | वहा राज्ञा की पायलो की भी शोर था क्यों की त्रिहांश की हरकत से राज्ञा लगादार अपने दोनो पैरो को आपस में ही रब कर रही थी |    अचानक से राज्ञा की आंखे कसके बंद हो गए | क्यों की त्रिहांश राज्ञा के गर्दन में अपने जीव चलाते हुए उसे कभी किस करता तो कभी गिला....एहसास नया ना हो कर भी उन दोनो को नया सा ही लग रहा था |    राज्ञा की हाथ धीरे से त्रिहांश के बालो में फिरने लगे ,उसने खुद को त्रिहांश की ही मान रखा था तो वह आज बिना ना नुकुर किए ही पूरी तरह खुद को उसकी हवाले करने वाली थी |       दोनो का दिल तो नही मिला था लेकिन आज उनका जिस्म जरूर एक होने वाला था |      त्रिहांश के सख्त होंठ राज्ञा की गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठो पर टूट पड़ी थी | वह बेहद शिद्दत से उसके होंठो को खाने लगा | वही राज्ञा ने अपने आंखे बंद कर उसके गर्दन में अपने दोनो बाहें डाल दिया था |       त्रिहांश के किस का वह कोई रिस्पॉन्स नही दे रही थी लेकिन वह उसकी हर एक चुवन को मेहसूस जरूर कर रही थी | थोड़ी ही देर में राज्ञा की सांसे फूलने लगे ,वह अपने आंखे खोल कर छटपटाने लगी तो त्रिहांश ने उसके होंठो को छोड़ फिर से उसके गर्दन में अपना चेहरा घुसा दिया |      राज्ञा अभी भी अपने उखड़ी हुई सांसों को नॉर्मल करने की कोशिश कर रही थी ,लेकिन त्रिहांश बिना रुके उसके गर्दन को चूमे जा रहा था ,जिससे उसकी धडकने और तेज हो गए |       त्रिहांश फिर धीरे धीरे नीचे सरकने लगा ,तो वही राज्ञा की हाथ उसके सीने में आ गए | त्रिहांश पूरी तरह मदहोश हो चुका था वह धीरे से उसके सीने पर किस करने लगा तो राज्ञा की मुंह से अब सिसकियां हल्के चिके की तरह निकलने लगी |      त्रिहांश इस वक्त राज्ञा के ऊपर पूरी तरह लेट चुका था | उसका एक हाथ राज्ञा की एक हाथ में फसा तो दूसरा राज्ञा की बदन में बेहद सेंशुअली सरकने लगा |    त्रिहांश धीरे धीरे से राज्ञा की सारे कपड़े उसके बदन से अलग कर उसके पूरे जिस्म को देखने लगा ,अखरी उसकी दीवानगी उसका यह जिस्म ही तो था | जिस्म....जिस्म का डिजायर...आज शिद्दत से वह अपने डिजायर को पूरा कर रहा था |      चांद की उस रोशनी में राज्ञा की बदन किसी सोने की तरह चमक रहा था | त्रिहांश पूरी तरह नशे में चूर हो कर उसकी बदन के हर एक हिस्से को मदहोशी से देख रहा था | वही राज्ञा पूरी तरह ब्लैंक हो गई थी | वह शर्म से इतना ब्लैंक हो गई थी ऐसा लग रहा था की वह सांस ही नही ले रही हो |        राज्ञा को इस तरह कुछ भी रिएक्ट ना करते हुए बेजान सी पड़ा देख त्रिहांश की होंठ हल्के से मुड़ गए ,उसने राज्ञा की होंठो को अपने दांतों के बीच दबा लिया l     राज्ञा को जब दर्द मेहसूस होने लगा तो वो होश में आ कर उसके सीने में मारते हुए उससे अलग होने की कोशिश करने लगी ,क्यों की त्रिहांश बेरहमी से उसके होंठो को काट रहा थाl     राज्ञा की छटपटाने से भी त्रिहांश उसके होंठो को छोड़ने के लिए तयार नही था l वह कभी उसके होंठो को किस करता तो कभी बाइट करता वो ऐसे ही अपनी हरकत करते हुए राज्ञा को ले कर पलट गया l जिससे राज्ञा उसके नीचे आ गई l यह सब करते हुए त्रिहांश के होंठ राज्ञा की होंठो को एक पल के लिए भी नही छोड़ा था l      करीब पंद्रह मिनट बाद राज्ञा की सांसे फूलने लगे तो वो त्रिहांश की बाहों में छटपटाने लगी | वही उसे इस तरह स्ट्रगल करता देख अखरी में त्रिहांश राज्ञा की होंठो को छोड़ कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छिपा लिया |     राज्ञा की दोनो हाथ बेडशीट में कस गाए थे | उसके सीना भी इस वक्त ऊपर ऊपर नीचे हो रहा था | क्यों की त्रिहांश की लंबे किस से राज्ञा की सांसे ऊपर नीचे हो चुके थे | त्रिहांश अपना चेहरा ऊपर कर एक नजर राज्ञा को देखा, राज्ञा का  चेहरा इस वक्त एक दम से लाल हो गया था |      त्रिहांश उसे ऐसे देख उसके ऊपर से उठ कर बैठ गया | फिर राज्ञा का हाथ पकड़ कर अपने तरफ खींचते हुए उसे अपने गोद में अच्छे से एडजस्ट कर बैठा के उसके पीठ रब करने लगा |       राज्ञा की दोनो हाथ अब त्रिहांश के बाजू में कस गए थे | वो हाफते हुए त्रिहांश को देख बोली,""_ आ आप....बहुत बुरे है त्रिहांश ,ऐसा कोन किस करता है ? "   त्रिहांश की होंठ मुड़ गए | वो अपने नाखून चबाते हुए एक नजर राज्ञा को देखता है | राज्ञा उसके गोद में बैठ कर उससे ही शिकायत कर रही थी | लेकिन उसे त्रिहांश की इंटेंस नजरे बर्दाश्त नही हो रहे थे ,वह उससे अलग होने लगी तो त्रिहांश का पकड़ उसके कमर में कस गया |    राज्ञा मासूमियत से उसके तरफ देखने लगी तो त्रिहांश उसकी टुडी को हल्के से पकड़ कर उसके चेहरे को उठाया फिर उसके होंठो पर प्यार से चूम कर बोला,""_ आज तुम मुझसे नही बचोगी राज्ञा, मै आज तुम्हे पूरा का पूरा खाने वाला हु | "    राज्ञा अपनी आंखे बड़ी बड़ी कर त्रिहांस को देखने लगी वही त्रिहांश की नशीली आंखे राज्ञा की खुले सीने पर थी | राज्ञा कुछ समझ पाती उससे पहले ही त्रिहांश उसके खुले सीने में अपना होंठ चलाने लगा |     राज्ञा की सांसे एक दम से अटक गए ,उसके हाथ भी उसके बाल में कस गए थे | वो आहे भरते हुए बोली ,""_ त्रिहांश...ummm आह्ह्ह ...ummm | "    राज्ञा पीछे के तरफ झुकने लगी | वह लगादार उससे छुटने के लिए मचलते हुए आहे भरने लगी थी | की तभी त्रिहांश उसके होंठो को अपने मुंह में भर कर उसकी बात को बीच में ही रोक देता है |      त्रिहांश धीरे धीरे से उसके होंठो को चूसते हुए उसे किस कर रहा था | राज्ञा को उसकी हरकत से बहुत दर्द हो रहा था | दर्द से उसने अपने आंखे तक भींच लिया था |       वही त्रिहांश उसे देखते हुए किस कर रहा था | उसके चेहरे पर दिख रही दर्द को देख वह उसके होंठो को छोड़ कर उसके चेहरे पर किस करने लगा |    राज्ञा बस आहे भरते हुए उससे छुटने मचलने लगी थी क्यों की त्रिहांश बहुत ही wild था | वह एक दम उसके ऊपर किसी भूखे शेर के तरह टूट पड़ा था  | राज्ञा बस मुश्किल से ही हिल पा रही थी |   थोड़ी ही देर में त्रिहांश राज्ञा से अलग हो कर अपने कपड़े निकाल कर राज्ञा के उपर आ गया |        वही राज्ञा की आंखे हैरानी से बड़ी हो गई थी | वो कभी बेड के नीचे बेडंग से गिरे हुए त्रिहांश के कपड़े को देखने लगती तो अपने ऊपर लेटे हुए त्रिहांश को  l     वही त्रिहांश एक टक उसके आंखो में देखते हुए उसके होंठो के तरफ झुकने लगा था | वो फिर अपने आंखे बंद कर राज्ञा की होंठो को अपने मुंह में भर कर किस करने लगा l त्रिहांश का एक हाथ राज्ञा के हाथ में फसा था तो दूसरा उसके बॉडी में चलते हुए अपनी हरकत कर रहा था l    राज्ञा को बहुत अजीब लग रहा था,त्रिहांश उसे पहले भी बिना कपड़ों के देखा था,उसे हर जगह छुआ भी था,लेकिन कभी इस तरह का प्यार नही किया था l वो इस एहसास को फील करते हुए कसके अपने आंखे बंद कर लेती है l     वही त्रिहांश उसके होंठो को छोड़ कर उसके बंद पलकों पर किस करते हुए बोला ,""_ummmmm तुम्हारे यह होंठ...ufff बहुत टेस्टी है राज्ञा...अब तो हर रोज खाते हुए तुम्हे......| "   बोलते हुए त्रिहांश उसके बदन को बुरी तरह सहलाने लगा | त्रिहांश की बेशर्म भरी बाते और हरकत देख राज्ञा का मन कर रहा था की वो त्रिहांश का खून करदे l लेकिन अफसोस वो ऐसा कुछ नही कर सकती थी l    राज्ञा अपने बढ़ी हुई धड़कनों को नॉर्मल करने की ना काम कोशिश करते हुए त्रिहांश को देखने लगी |         त्रिहांश की नशे से चूरी हुई आंखें कबसे शर्म से लाल हुई राज्ञा की चेहरे पर ही टिकी थी |         त्रिहांश फिर रूम के सारे लाइट्स ऑफ कर राज्ञा को अपने आप से चिपका कर बेहद पागलों की तरह किस करने लगा | राज्ञा की दोनो हाथ अब त्रिहांश की पीठ पर आ गई थी |     राज्ञा को कुछ समझ नही आ रहा था l क्यों की त्रिहांश की हरकत से इस वक्त उसकी दिमाग एक दम से ब्लैंक हो गया था l लेकिन वह लगादार आहे  भर रही थी | त्रिहांश जितना वाइल्ड होता उतना ही राज्ञा की आहे तेज होते l     थोड़ी ही देर में रूम का माहोल एक दम गरम हो गया था l वही त्रिहांश उसके कमर को चूमते हुए नीचे सरकने लगा, राज्ञा की आहे और तेज हो गए थे |     तभी राज्ञा की मुंह से दर्द से भरा जोर दार चिक निकल गई ,""_ अह्ह्ह्ह्ह त्रिहांश ,नही...... प्लीज त्रिहांश,.. ....!!! "       त्रिहांश पूरी तरह खुद को राज्ञा में समाते हुए उसे पूरी शिद्दत से प्यार करने लगा | राज्ञा की आंखे भींच गए थे और उसके आंखो के कोने से आंसू बहने लगे थे | वही त्रिहांश अपने हरकत जारी रखते हुए ही ऊपर जा कर राज्ञा की होंठो को मुंह में भरा ताकि उसे और दर्द ना हो | राज्ञा की दोनो हाथ अब त्रिहांश के कंधे पर कस गए |    त्रिहांश आज सारे फरदे हटा चुका था उसके रूह में शामिल होते हुए उसके जिस्म को पूरी शिद्दत से अपना बना रहा था | अब तक उसने राज्ञा के जिस्म के हर एक हिस्से पर अपना निशान छोड़ दिया था | प्यार के निशान,जो मीठे दर्द के साथ उसने आपने नाम के साथ दिया था |      राज्ञा का हालत पूरी तरह खराब हो चुका था | वह उसे खुद से अलग होने इशारों में ही कहने लगी लेकिन त्रिहांश का मुड़ कुछ अलग ही था | जब तक वह खुद पूरी तरह satisfied नहीं होगा तब वह उसे एक इंच भी हिलने नही देने वाला था |     करीब बीस मिनट बीत गया लेकिन त्रिहांश ना उससे अलग हुआ और नाही राज्ञा की होंठो को छोड़ा ,वह उसे सांस देते हुए ही किस कर रहा था |      राज्ञा इस वक्त त्रिहांश के दिए हुए दर्द को सहते हुए त्रिहांश के नीचे दब चुकी थी l वही त्रिहांश अभी भी उसके बाहों में मदहोश हो कर उसे लव बाइट्स  देते जा रहा था l     जिस्म का यह खेल ऐसे ही रात भर आगे बढ़ता ही रहा और उन दोनो का जिस्म धीरे धीरे पसीने से भीगने लगा l दोनो का शरीर इस वक्त एक दूसरे से ऐसे लिपट चुका था जैसे कुछ फासले ही ना हो .... फासले थे | उस बेरहम इंसान आज सारे हदे पर कर दिया था लेकिन उसके दिल में राज्ञा के लिए कोई फीलिंग्स नही थी उसके दिल और दिमाग में यह बात जरूर था की वह उसकी है ,उसका जिस्म उसका है , राज्ञा पर सिर्फ उसका हक है |      राज्ञा के दिल में भी त्रिहांश के लिए कोई फीलिंग्स है या नही यह खुद वह भी नही जानती थी | लेकिन हा वह भी खुद को त्रिहांश की ही समझती थी | अजीब दास्तान था इनका,मिल कर भी अधूरे है,एक दूसरे के रूह रूह में शामिल हो गए लेकिन इस जज्बात को बस नाम नही देना नही जानते थे | यह सब त्रिहांश के लिए उसका डिजायर था तो वही राज्ञा के लिए यह उसकी मजबूरी....|     शादी का उनका यह पहली रात दोनो का मिलन का रात बन गया था l     त्रिहांश बिना अपने दिल की हाल को जाने बगैर ही, राज्ञा को आज पूरी तरह अपना बना चुका था |     सुबह के पांच बजे के आस पास त्रिहांश राज्ञा से अलग हो गया l वही राज्ञा पूरी तरह थक हार कर बेजान सी हो गई थी l       वही त्रिहांश उसे अपने बाहों में भर कर थोड़ी देर उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसका थका हुआ चेहरा देखने लगाl उसे देखते हुए त्रिहांश के चेहरे पर इस वक्त बेहद सुकून से भरा हुआ भाव नजर आ रहा था l   त्रिहांश थोड़ा झुक कर राज्ञा के पूरे चेहरे पर अपने होंठ घुमाते हुए उसके माथे पर किस कर उसे देखते हुए ही अपने आंखे बंद करा  l     वहीं राज्ञा अंधखुली आंखो से त्रिहांश को ही देख रही थी जो बेहद सुकून से सो रहा था |  राज्ञा के होंठ हल्के से मुड़ गए ,वह धीरे अपने हथेली को त्रिहांश के गालों पर रख कर बुदबुदा कर बोली,""_ I love you त्रिहांश,I love you ... पता नही क्यों मुझे इस पल आपको यह कहना का मन कर रहा है | मैं जानती हु यह प्यार मेरा एक तरफा है, लेकिन मैं खुश हु, मुझे आपसे कुछ नही चाहिए ,प्यार का भी मुझे उम्मीद नहीं है बस मैं इतना कहना चाहती हू की .....| "    बोलते हुए राज्ञा ने त्रिहांश के होंठो को बेहद प्यार से चूमा ,फिर उसके होंठो को अपने अंगूठे से सहलाते हुए बोली,""_ आप कहते है ना की मेरे जिस्म पर आपका हक है ? आप सही कहते है त्रिहांश,इस जिस्म के साथ साथ इसके अंदर धड़क रही इस दिल पर भी आपका ही हक है ,सिर्फ आपका .........| "    बोलते हुए राज्ञा रुक गई ,फिर हल्के से उठ कर पूरी तरह त्रिहांश के ऊपर लेट गई | फिर उसके सीने पर अपना सर रख दिया | त्रिहांश अभी सोया नही था ,उसने धीरे से अपने आंखे खोल कर राज्ञा को देखा.....वही राज्ञा अपनी बात जारी रखते हुए आगे बोली,""_ मैं जानती हु आप मुझसे प्यार नही करते, मैं जानती हु आपको मुझसे नही मेरे जिस्म से मतलब है, मै जानती आप मुझे कभी अपने पत्नी का दर्ज नहीं देंगे, मैं जानती हु की आप कभी भी इस रिश्ते को तोड़ कर मुझे छोड़  देंगे .... मै सब जानती हु लेकिन त्रिहांश ,अब मै आपकी हू सिर्फ आपकी.....| "     बोलते हुए राज्ञा ने कसके त्रिहांश के बाजू पकड़ ली | राज्ञा अपने दिल की हाल को बयां कर रही थी | यह सोच कर की त्रिहांश सो गया है | लेकिन त्रिहांश उसकी हर एक बात को सुन रहा था |        वही राज्ञा बोली,""_जब आप मुझे छोड़ोगे न,तब मैं  आपसे और सबसे दूर चली जाऊंगी लेकिन मेरी वादा है आपसे त्रिहांश,आपका यह जिस्म हमेशा मेहफूज रहेगा कभी इस पर किसी की गंदी नजर पड़ने नही दूंगी क्यों की यह आपका है और मेरी अखरी सांस तक यह आपका ही रहेगा | "   वह बहुत थकी हुई थी | और उसकी बाते दबी हुई आवाज में ही सी निकल रही थी | वह हल्के से उसके सीने पर बेहद प्यार से चूमते हुए अपने आंखे बंद कर लि | वही त्रिहांश की कान में उसके कही हुई एक एक लफ्ज गूंजने लगे थे | उसकी एक एक लफ्ज उसके दिल पर छू गए थे, पता नही क्यों उसके दिल में सुकून का लहर उठ चुका था |      त्रिहांश धीरे से राज्ञा को अपने नीचे लिटाया फिर उसे बिना भाव के देखने लगा | राज्ञा की चेहरे पर सिर्फ दर्द और थकान का भाव नजर आ रहा था |  रात की आसमान अब रोशनी से उजला हो गया था और धीरे धीरे सूरज की किरणे उनके रूम में दस्तक देने लगी थी | त्रिहांश की नजर अब भी राज्ञा की चेहरे पर टिकी थी | वह एक पल के लिए भी उससे नजरे हटाया था |     सुबह के 11 बजे की आसपास राज्ञा कसमसाने लगी | उसके माथे पर प्यार भरा छोटा सा शिकन था | क्यों की सूरज की किरणे उसके चेहरे पर मंडराते हुए उसकी नींद में कलल डाल रही थी |      वही त्रिहांश एक नजर खिड़की की तरफ देखा ,फिर जल्दी से पास में टेबल पर रखी हुई रिमोट ले कर एक बटन प्रेस किया तो रूम के सारे कर्टन्स अपने आप लग गए |    वही राज्ञा की चेहरे पर सुकून भरा स्माइल ,वह करवट बदल कर त्रिहांश के सीने में अपना चेहरा छिपा कर सो गई |       दुपहरे के 2 बजे की आस पास राज्ञा कसमसाते हुए  आंखे खोली ,क्यों की उसे बहुत जोरो की भूख लग रही थी |   आंखे खोलते ही राज्ञा की नजरे त्रिहांस की नजरो से जा मिली | जो सुबह के पांच बजे से ले कर अब तक उस पर ही गड़ाए बैठा था | राज्ञा इधर उधर हिलते हुए बोली,""_ त्रिहांश मुझे बहुत भूख ......ahhhhhhhhh | "    To be continued..............              Â