Chapter 4: chapter 4

Billionaire's Dark DesireWords: 31459

  अब आगे......,     त्रिहांश का कार आ कर अग्निहोत्री मेंशन के सामने रुक गई | त्रिहांश का चेहरा इस वक्त बेहद सख्त और कठोर हो गया था | वह एक नजर मेंशन को देखा फिर कार से बाहर आ कर अंदर चला गया |      वही door के पास ही वेदिका त्रिहान्श का wait कर रही थी | वह बार बार कभी फोन को चेक करती तो कभी बाहर देखती | तभी उसे त्रिहांश अंदर आते हुए दिखा | वह जल्दी से त्रिहांश के पास जा कर बोली,""_ त्रिहांश,कहा चले गए थे तुम ? चलो....?? "      अंदर आते ही त्रिहांश की नजर हाल में रखे हुए सोफे पर बैठे हुए एक मिडिल एज का आदमी पर टिकी थी | उस आदमी का नाम अजय अग्निहोत्री था जो त्रिहांश का बाप था | त्रिहांश फिर अजय के बगल में बैठी हुइ लड़की को देखा | उस लड़की का नाम अदा था जो अजय के बेस्टफ्रेंड नितिन की बेटी थी | नितिन भी वही बैठा था और उनके साथ एक बूढ़ा आदमी जिसका नाम विनोद अग्निहोत्री था,वह भी बैठा था | त्रिहांश उन सबको बिना भाव के बस देख रहा था |   वही त्रिहांश को इस तरह सबको देखता देख वेदिका उसके गाल थपथपाते हुए बोली,""_ अदा तुमसे ही मिलने आई है त्रिहांश....!!! "    त्रिहांश उसका हाथ अपने गाल से हटा कर बोला,""_ मुझे किसी से भी नहीं मिलना वेदू | "    त्रिहांश रूम के तरफ जाने को हुआ तो उसे अजय ने आवाज लगाया |    " त्रिहांश.....!!! "     त्रिहांश के हाथो की मुट्ठी बन गई | वह रुक तो गया लेकिन मुड़ कर अजय को नहीं देखा | वही अदा उठ कर त्रिहांश के पास आ कर उसके बाजू पर हाथ रखने को हुई की तभी त्रिहांश उससे अपने कदम दूर लेते हुए अपने दादाजी विनोद से बेहद सख्ती से बोला,""_ इस लड़की से कहो की मुझसे दूर रहे वरना मुझे राक्षस बनने में वक्त नहीं लगेगा | "       त्रिहांश की बात सुन अदा की चेहरे पर उदासी छा गई | वही अजय का चेहरा गुस्से से भर गया था | वह उठ कर उसे गुस्से से कुछ कहता उससे पहले ही विनोद अजय को रोकते हुए त्रिहांश से थोड़ा अटकते हुए बोला,""_ ठी.... ठीक है | "   त्रिहांश अपने रूम के तरफ चला गया | वही अजय दांत पीसते हुए उसे जाता हुआ देख रहा था | अदा का पापा का चेहरा भी गुस्से से भरा था वह फिर अपनी बेटी को देखा जो नम आंखों से त्रिहांश को जाता हुआ देख रही थी |    नितिन उसके पास जा कर बोला,""_ तुम रो मत बेटा मैं तुम्हारे लिए किसी और....? "     नितिन आगे कुछ भी कहता उससे पहले ही अदा उसे मना करते हुए बोली,""_ नही डैड,मेरा दिल सिर्फ त्रिहांश को चाहता है ,और मुझे वही चाहिए |      अदा इतना बोल कर अजय के पास गई | फिर वह रिक्वेस्ट करते हुए बोली,""_ अंकल,क्या मैं यहा कुछ दिन रुक सकती हु ? "  " Ofcourse बेटा,यह भी कोई पूछने वाली बात है ? "अजय अदा के सर पर हाथ फेरते हुए बोला तो अदा हल्के से स्माइल कर गेस्ट रूम में चली गई | वही वेदिका यह सब देख रही थी वह फिर त्रिहांश के पास चली गई | दूसरी तरफ...   मंदिर में ...   Ragya अभी भी राशि से लिपट कर रोए जा रही थी | राशि उसे शांत करने की पूरा कोशिश कर रही थी लेकिन Ragya चुप ही नही हो रही थी |    "  राज्ञा शांत हो जाओ ? देखो हम.....? " राशि उसे शांत कराते हुए अभी बोल ही रही थी कि तभी Ragya का फोन बजने लगा |   Ragya और राशि ने फोन के स्क्रीन पर दिख रही नाम को देखा |जो इस वक्त 'मिस्टर गौरव ' नाम शो हो रहा था |    Ragyaa अपने नम आंखों से फिर राशि को देखने लगी | राशि की भी चेहरा डर से पिला पड़ गया था | वह थोड़ा हिम्मत कर खुद ही फोन उठाने को हुइ तो raagya फोन को फेंकते हुए बोली,""_ नही नही राशु....| "     Raagya बोलते हुए राशि की गले लग गई | वही राशि एक टक फोन के स्क्रीन को घूर रही थी |जो बार बार बजने लगा था |       पूरा दिन राज्ञा ऐसे ही रीती रही | शाम के 7 बजे की आस पास राशि बोली,""_ Ragya चलो घर चलते है | "  राज्ञा उससे अलग हो कर रुंधलि सी आवाज में पूछी,""_ मिस्टर गौरव मुझे घर के अंदर जाने नही देंगे राशू | "   राशि नम आंखों से उसे देखती रही | फिर उसके चेहरे को अपने हाथो मे भर कर बोली,""_ ऐसे कैसे नही आने देंगे ?तुम उस घर की बेटी हो ,चलो चलते है | "   राज्ञा रोते हुए अपना सर ना में हिलाते हुए रोने लग गई | रात होने आया था और इस वक्त उनका मंदिर में होना उनके लिए ठीक नहीं था तो राशि राज्ञा को ले कर बाहर आ गई |      फिर अपना फोन ले कर टैक्सी बुक की | राज्ञा रोते हुए अपने जगह में ही खड़ी थी, राज्ञा फिर राशि से बोली,""_ सब ठीक हो जाएगा Ragya,पहले शांत हो जाओ | "   राशी की बात सुन Ragya ने कुछ नही कहा क्यों की राशि जो कह रही थी वह बस उसे दिलासा देने के लिए था असल में उसके साथ आगे क्या होनेवाला है ? उसका अंदाज राशि को भी पता था |     थोड़ी देर में वहा एक टैक्सी आई | राशि Ragya के साथ टैक्सी में बैठ गई | करीब पंद्रह मिनट बाद टैक्सी आ कर खुराना निवास के सामने रुक गई |   Ragya ने एक नजर घर की तरफ देखा फिर टैक्सी से बाहर आई | वही राशि भी टैक्सी से बाहर आ कर टैक्सीवाले को बिल दिया फिर राज्ञा के साथ घर के तरफ जाने लगी |       राज्ञा की कदम भारी भारी से आगे बढ़ रहे थे क्यों की उसे अच्छे से पता था की उसके घर में जाते ही क्या तमाशा बनने वाला है ?  राज्ञा और राशि अभी घर के दहलीज पार कर ही रहे थे की तभी एक बड़ा सा लगेज बाहर आ कर Ragya के कदमों में आ गिरा |    यह देख राज्ञा की चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान बिखर गया वह अपना सर ऊपर कर सामने देखी | सामने इस वक्त उसका बाप गौरव खुराना गुस्से से उसे घूरते हुए खड़ा था | उसके बगल में ही उसकी मां वाणी खड़ी थी वह बस रोए जा रही थी | और उन दोनो के पीछे मानव खड़ा था और वह भी गुस्से में ही राज्ञा को देख रहा था |   " अपना सामना उठाओ और यहां से दफा हो जाओ लड़की | " गौरव गुस्से से चिल्लाते हुए राज्ञा से बोला | राज्ञा नम आंखों से उन्हें कुछ कहने हुई की तभी वानी बोली,""_ गौरव इस वक्त वह जाए भी तो कहा जाए ? उसके पास हमारे अलावा कोई नहीं है ? प्लीज उसे अंदर आने दे "   वानी गिड़गिड़ाते हुए गौरव से बोली तो गौरव बड़े ही नफरत भरी नजरों से राज्ञा को देख बोला,""_इस लड़की को अच्छे से पता था की चिराग से शादी करना हमारे लिए कितना जरूरी है ,किसी भी हालत में शादी टूटने से यह रोक भी सकती थी लेकिन नही,इसे हमारे फिकर ही नही है वानी अगर थोड़ा सा भी फिकर होता तो यह लड़की बेशर्म की तरह किसी गुंडे को अपने आशिक नही बनाती,जाने दो इसे कही भी जाए मरे हमे इससे अब कोई नाता नहीं | "   गौरव चिल्लाते हुए इतना बोल कर राज्ञा की मुंह पर ही जोर से दरवाजा बंद कर देता है | गौरव इतना गुस्से में था की वह राज्ञा को बोलने का भी मौका नही दिया और नाही वानी की किसी भी बात को सुना |    वही अंदर वानी जोर जोर से door खोलने की कोशिश करने लगी तो गौरव उसे अपने तरफ घुमा कर गुस्से से बोला,""_ अगर तुम उस लड़की का साथ रहना चाहती हो तो इस गौरव खुराना से तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं रहेगा वानी,सोच लो | "   गौरव इतना बोल कर अपने रूम में जा कर दडाम से door बंद किया | वही वानी रोते हुए बस गौरव को जाते हुए देखने लगी | फिर वह मानव को देखी ,मानव बिना कुछ कहे अपने रूम में चला गया |    वही बाहर राज्ञा रोते हुए अपना बैग उठाई फिर वहा से जाने को मुड़ी| सामने राशि रोते हुए खड़ी थी | वह आ कर उसके गले लग कर बोली,""_ राज्ञा...!! "   राज्ञा बस ऐसे ही खड़ी रही | तभी राशि उससे अलग हो कर उसका हाथ पकड़ कर ले जाते हुए बोली,""_ तू चल मेरे साथ मेरे घर मेरे साथ.....!!! "   Ragya ने अपना हाथ पीछे लेते हुए बोली,""_ नही राशु, मैं तुम्हारे घर नही आ सकती ,तुम्हे पता है तुम्हारी दादिमा को मेरा आना बिलकुल पसंद नहीं आएगा और मैं तुम्हारे साथ आ कर तुम्हारे लिए  मुश्किले खड़ी नही कर सकती ,प्लीज मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो | "    राशि एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करती थी उसके पास कोई मां बाप नही थे, बस वह अपने दादी के साथ रहती थी लेकिन राशि की दादिमां उतनी अच्छी नहीं थी जो राज्ञा को अपने घर में रहने जगह दे सके |        राशि रोते हुए बोली,""_ फिर तुम कहा जाओगी राज्ञा? "  राज्ञा बोली,""_ कही भी जाऊंगी राशू,तुम अभी घर जाओ | " "  लेकिन Ragya...? " राशि उसका चिंता करते हुए उसका नाम ली तो राज्ञा बोली,""_ मेरी चिंता मत करना मैं अपने लिए कुछ न कुछ इंतजाम कर ही लूंगी तुम जाओ | "   राशि रोते हुए वही खड़ी रही | उसे अपने दोस्त को इस तरह छोड़ कर जाने का मन नहीं हो रहा था | वही राज्ञा बोली,""_ जाओ राशि, मैं कल सुबह तक तुम्हे कॉल कर दूंगी तुम जाओ | "    राशि कसके ragya की गले लगी फिर वहा से चली गई | वही राज्ञा एक नजर मुड़ कर खुराना निवास को देखी जो उसके लिए हमेशा के लिए बंद हुआ था |      राज्ञा फिर वहा से चली गई | रात का वक्त था वह बस अपना लगेज ले कर आगे बढ़ रही थी | वह कहा जा रही है ? उसका यह रात कैसे गुजरेगा ?उसे कुछ नही पता था वह बस खाली सड़को पर चलते हुए आगे बढ़ रही थी |      रात के दस बजे की आस पास राज्ञा चलते चलते रुक गई | क्यों की पिछले दो घंटे से वह चलते ही जा रही थी जिससे उसके पैर दर्द करने लगे थे | और उसे प्यास भी लग रही थी | राज्ञा आस पास देखी | सड़को पर इस वक्त कोई नही चल रहा था यहाँ तक की बस गिनती की ही व्हीकल्स जा रहे थे |      राज्ञा थक हार कर आस पास देखी तो उसे वही रोड के किनारे में रखे हुए एक बेंच दिखी तो वह जा कर वहा पर बैठ गई | उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वह इस वक्त कहा जाए किसके पास जाए ? और ऊपर से अब चलने के लिए उसके पास ताकत नहीं बचा था | वह बहुत ही कमजोर और एक दम बेबस मेहसूस कर रही थी |       राज्ञा एक गहरी सांस लेते हुए अपने आंखे बंद कर रुंधली सी आवाज में बोली,""_ मातारानी........|     राज्ञा ने बस भगवान का नाम लिया ही था की उसके सामने एक बड़ा सा ब्लैक कार आ कर जोर से ब्रेक लगाते हुए रुक गया | राज्ञा अपने आंखे खोल कर देखी | तो त्रिहांश अग्निहोत्री कार से बाहर आते हुआ दिखा |      वही त्रिहांश कार से बाहर आ कर एक टक राज्ञा का चेहरा देखने लगा | जो रोने के वजह से सूझ गया था और हद से ज्यादा लाल हो गया था |     त्रिहांश फिर राज्ञा को बदन को देखने लगा | राज्ञा अभी भी शादी की जोड़े में थी | वही त्रिहांश कार को टिक कर अपने जेब से एक सिगरेट निकाला फिर लाइटर से जला कर उसके कश लेते हुए राज्ञा को देखने लगा |    राज्ञा बिना भाव के उस इंसान को देख रही थी जिसकी वजह वह आज घर से बेधकल हुई थी | इस वक्त राज्ञा के पास कुछ नही था ,ना कोई छत नाही कोई अपना | सबके रहते हुए भी वह इस वक्त अनाथ की तरह सड़को पर बैठी थी |      वही त्रिहांश राज्ञा को देखते हुए सिगरेट का कश ले रहा था | राज्ञा का इस तरह सड़क पर आना,रोना इन सब से त्रिहांश को कोई फरक नही पड़ रहा था वह बस उसके बदन को देख रहा था जिससे उसे मतलब था |           राज्ञा एक टक उसकी नजरें अपने बदन पर मेहसूस कर रही थी जिससे वह अनकंपर्टेबल फील कर रही थी| वह थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रही लेकिन त्रिहांश की इंटेंस नजरे वह अपने बदन पर और बरदाश्त नहीं कर पाई तो वह अपने जगह से उठ कर अपना बैग ली ,फिर त्रिहांश को इग्नोर कर जाने लगी |     त्रिहांश सिगरेट का कश लेते हुए उसे ही देख रहा था वह जैसे ही उससे गुजर कर जाने को हुइ तो त्रिहांश ने कसके उसके हाथ पकड़ ली |     राज्ञा मुड़ कर उसे देख कुछ कहती उससे पहले ही त्रिहांश ने उसे कार से सटा कर सिगरेट नीचे फेंक कर , राज्ञा के दोनो हाथो में अपने हाथ उलझा कर उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपाया |      वही राज्ञा की आंखे कसके बंद हुए | उसे इस वक्त बहुत तकलीफ हो रहा था | वह चिल्लाते हुए रोना चाहती थी | वही त्रिहांश उसके गर्दन में हल्के हल्के से किस करते हुए उसके कान तक गया | फिर धीरे से राज्ञा की इयरलोब पर बाइट करा तो राज्ञा की मुंह से आह निकली |     "  अह्ह्ह्ह...!!! " वही त्रिहांश की होंठ मुड़ गए | वह धीरे से अपने होंठो से उसके पूरे चेहरे को चूमते हुए उसे फील करने लगा | राज्ञा इस वक्त उसके बाहों में बेजान सी खड़ी थी वह ना हिल रही थी और नाही उसे छोड़ने के लिए कह रही थी |     वही त्रिहांश धीरे से उसके कमर में अपना ठंडे हाथ रख कर  उसे अपने आप से चिपका देता है तो राज्ञा का एक हाथ उसके कंधे पर कस गया | वही त्रिहांश उसके कमर को सहलाते हुए राज्ञा के गर्दन को चूमते हुए धीरे से फुसफुसा कर बोला,""_ मैंने सुना की तुम्हारे बाप i mean मिस्टर गौरव खुराना ने तुम्हे घर से बेदखल कर दिया है.. राज्ञा....क्या हुआ तुम्हे ..? "    त्रिहांश अभी अपनी बात पूरा कर ही रहा था की राज्ञा उसके बाहों में जुल गई | वही त्रिहांश उसके गालों को थपथपाते हुए बोला ,""_ राज्ञा क्या हुआ तुम्हे ? उठो ... राज्ञा....shit.....!!! "   त्रिहांश बोलते हुए राज्ञा को अपने गोद में उठा कर कार में बैठ कर ड्राइवर से बोला ,""_ हॉस्पिटल चलो ..!!! "       ड्राइवर मीरर में डरते हुए त्रिहांश को देखने लगा जो इस वक्त राज्ञा को अपने गोद में बैठा कर उसके हाथ पैर रब कर रहा था | लेकिन अचानक से उसका चेहरा गुस्से से भर गया वह चिल्लाते हुए ड्राइवर से बोला,""_ car start करो damid...!!! "    " सो..सॉरी बॉस....वेदिका ma'am का ऑर्डर है हम हॉस्पिटल नही अग्निहोत्री मेंशन जा रहे है | " इतना बोलते हुए ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर दिया | वही त्रिहांश की दांत भींच गए थे | वह जल्दी से अपना फोन ले कर समर को कॉल किया | उधर से एक ही रिंग में कॉल pick हुआ तो त्रिहांश ने बोला,""_ जल्दी से डॉक्टर्स को अरेंज करो.| "     त्रिहांश इतना बोल कर राज्ञा के माथे पर हाथ रखा | राज्ञा को धीरे धीरे फेवर चढ़ रहा था | वह फिर अपना जैकेट निकाल कर राज्ञा को पहनाते हुए गुस्से से बोला,""_ इतना लापरवा कैसे हो सकती है यह ? अगर इसे कुछ हुआ तो मैं अपना desire कैसे पूरा करूंगा? होश में आने तो दो इसे फिर अच्छे से बताता हु | "     त्रिहांश गुस्से से बड़बड़ाते हुए राज्ञा को अपने गले से लगा एक टक राज्ञा का चेहरा देखने लगा | राज्ञा का चेहरा इस वक्त ज्यादा ही मुरझा गया था |    राज्ञा का चेहरा देखते ही त्रिहांश का चेहरा एक दम से नरम पड़ गया वह धीरे से अपने हथेली को उसके गाल पर रख कर अपने अंगूठे को राज्ञा की होंठो पर ले गया जो इस वक्त हल्के से कांप रहे थे |             वह थोड़ा झुका फिर उसके कांपती होंठो को चूमा | उसका चूमना इस वक्त बेहद प्यार भरा था अगर राज्ञा होश में होती तो वह एक पल के लिए ही सही त्रिहांश में जरूर खो जाती | वही त्रिहांश उसके गाल को सहलाते हुए उसके बंद पलकों पर होंठ रखा | वह जैसे जैसे राज्ञा को छू रहा था वैसे वैसे उसका तलब बढ़ता जा रहा था | वह राज्ञा को अपने बाहों में और सटाते हुए बिना रुके चूमने लगा |    तभी त्रिहांश को ड्राइवर की आवाज सुनाई दी |    " बॉस हम पहुंच गए | "   त्रिहांश अपना सर घुमा कर विला को देखा उसे तो पता ही नही चला था की वह कब घर पहुंचा | दरसल वह राज्ञा में इतना खो गया था की उसे रास्ते का खबर ही नहीं रहा | वह फिर अपने बाहों में बेजान सी पड़ी हुई राज्ञा को देखा | वह फिर एक गहरी सांस ले कर राज्ञा को ले कर कार से बाहर आया |       वही मेंशन में समर डॉक्टर्स के साथ त्रिहांश का आने का wait कर रहा था |वही इतने सारे डॉक्टर्स का स्टाफ देख कर सारे घरवाले टेंशन में आ गए थे | उन्हें लग रहा था की त्रिहांश को ही कुछ हुआ है क्यों की समर के पास कोई अपडेट नही था की त्रिहांश ने डॉक्टर्स को क्यों बुलाया है ?    वेदिका तो कब से दरवाजे के पास खड़ी हो कर त्रिहांश का wait कर रही थी उसके आंखे नम थे और वह घबराहट से कांप रही थी |    To be continued......  Â