Chapter 56 of 59

chapter 56

Billionaire's Dark Desire1,194 words~6 min read

  अब आगे.....  मंदिर में .......        अहीरा की बात सुन कर ईशान की बाहें तन गए थे | वह अपना एक आईब्रो रेंज कर ,उसे ही घूर कर देखने लगा था | अहीरा बेफिक्री से उसके एक बाहें पकड़ कर पूजा को देख रही थी | उसे तो यह भी ख्याल नही था की उसकी मां उसे बुरी तरह घूर रही है |    माया बहुत ही गुस्से में आ गई थी | वह अग्निहोत्रियो के साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी | चाहे जो भी हो.....माया उनके पास जाने को हुई की तभी सुधर्व उसे रोकते हुए बोला,""_ माया बच्चे.......!! "   " नही सुधर्व.....!!! मैने एक बेटी को इस परिवार के लिए कुर्बान कर चुकी हु लेकिन अब और नहीं | " सुधर्व की बात को बीच में ही रोकते हुए माया ने गुस्से से कहा,फिर अहिता के पास जा कर उसे इशान से गुस्से से अलग कर एक खींच कर उसके गाल पर थप्पड़ झाड़ दिया |    अहीरा या फिर वहा जमा हुए किसी भी इंसान को इसका बिलकुल उम्मीद नही था | अहीरा का चेहरा एक तरफ झुक गया था | वह अपने गाल पर हाथ रख कर हैरानी से माया को देखने लगी |   माया गुस्से से उसे ही घूर रही थी | वही अर्यांश अहीरा को अपने तरफ खींच कर माया को कुछ कहता माया ने उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ झाड़ दिया |      आर्यंश हैरानी से माया को देखने लगा | माया बहुत गुस्से में आ गई थी |    राज्ञा और त्रिहांश उठ कर माया को देखने लगे,माया गुस्से से तमतमा रही थी | वह गुस्से से आर्यांश और अहीरा पर चिल्लाते हुए बोली,""_ तो तुम दोनो यहा अपने माशूका और आशिक के लिए आए थे right ? कितना आसानी से मुझे बेवकूफ बनाते है मेरे ही बच्चे.....!!! "  मम्मा......!!! " अहीरा रोते हुए माया को कुछ बोलने को हुई की तभी माया उस पर से चिल्लाते हुए बोली,""_ चुप...एक दम चुप.....| "   अहीरा सहम कर अर्यांश से लिपट गई | माया ने आज तक उस पर हाथ उठाना तो कभी तेज आवाज में चिल्लाया तक नही था लेकिन आज उसका हाथ दोनो पर उठ गया था और उसका गुस्सा दोनो पर भी फुट रहा था |     माया को इस तरह चिल्लाता देख सुधर्व उसके पास आ कर बोला,""_ शांत हो जाओ माया...हम इस वक्त मंदिर में है | "   " हा सुधर्व...हम इस वक्त मंदिर में है लेकिन इन लोगो को यह भी ख्याल नही है ,इन दोनो को हमने ऐसी संस्कार दिए है ? "। माया,अहीरा और आर्यांश दोनो को देख तंज भरी लहजे में सुधर्व से बोली|    सुधर्व अर्यांश और अहीरा को देखने लगा | उन दोनो का उतरा हुआ चेहरा देख उसने माया को ही शांत कराते हुए बोला,""_ हम घर जा कर बात करेंगे माया...शांत हो जाओ | "   देविका और उसका पूरा परिवार यह तमाशा देख रहा था | और इस वक्त उसके चेहरे बेहद टेढ़ी मुस्कान थी | वह विराज को कुछ इशारा करती है तो वह अपने पलके झपकाते हुए वहा से चला गया |     त्रिहांश को टिकी नज़रे सब पर थी लेकिन फिर भी वह एक दम बिना भाव के वहा खड़ा था | वही माया का भले ही गुस्सा अर्यांश और अहीरा पर निकल रहा था | लेकिन त्रिहांश अच्छे से जानता था माया का गुस्सा उसके लिए ही निकल रहा था |        माया बस आर्यांश और अहीरा पर चिल्ला रही थी, पता नहीं क्यों वही राज्ञा को इस वक्त आर्यांश और आयर के लिए बहुत बुरा लगने लगा था |भले ही राज्ञा ने उन्हें अभी तक अपना माना नहीं था | उसके मां-बाप ,भाई ,बहन उसका राठौर परिवार ही है | लेकिन खून का रिश्ता ही ऐसा होता है, ना चाहते हुए भी उसे उनके करीब ले जा कर खड़ा कर ही देता |     उन दोनों को ऐसा रोता देख राज्ञा से रहा नहीं जा रहा था, वह आगे बढ़कर आहिरा के करीब गई ,फिर उसके गाल पर हाथ रख कर धीमी आवाज में बोली,""_ ज्यादा दर्द हो रहा है ? "    अहीरा अपना रोनी सी शकल हां में हिलाते हुए उसके गले लग कर माया की शिकायत करते हुए बोली,""_ मम्मा ने आज तक मुझ पर हाथ उठाया नही था लेकिन पता नहीं आज उन्होंने क्या ही गलत खा लिया है ,मुझ पर गुस्सा करते हुए हाथ उठा रही है | "      अहीरा की शिकायत सुन राज्ञा माया की तरफ देखने लगी | वही त्रिहांश को इस फैमिली ड्रामा में कोई इंटरेस्ट नहीं था | वैसे तो उसे पहले से ही पता था की जब माया को अहीरा और अर्यांश के प्यार के बारे में पता होगा तो वह ऐसे ही ड्रामा करते हुए चिल्लाएगी |     त्रिहांश मंदिर नीचे चला गया | वही इशान भरा फील करते हुए अहीरा को देखने लगा था | उसे जरा भी बनक नही लगा था की माया आ कर अहीरा पर ऐसे थप्पड़ मारेगी वरना वह उस पर हाथ उठाने ही नही देता |       उर्मी डरते हुए अजय और विनोद को देखने लगी थी जो उसे ही बुरी तरह घूर रहे थे | उनके लिए भी यह अच्छी खबर नही थी | जितना माया उनके रिश्ते की खिलाफ थी उतना ही वह भी थे |        उर्मी धीरे से वेदिका के पीछे चुप गई | वही माया राज्ञा को एक नजर देख कर अर्यांश और अहीरा को वार्न भरी लुक देते हुए बोली,""_ कल सुबह ही तुम दोनो मुंबई जा रहे है और हा......जो प्यार का खेल तुम लोग आपस में खेल रहे हो ना यह बिलकुल सक्सेस नही होगा,अग्निहोत्रियो से राठौड़ का कोई रिश्ता नही है और नाही कभी रहेगा | "         अहीरा हैरानी से इशान को देखी, इशान पहले से ही यह सब जानता था | माया या फिर उसके घरवाले इस शादी के लिए मानेंगे नही लेकिन फिर भी वह अहीरा से दूरियां बनाई रखने में कामयाब नही रहा था |      अहीरा का इस तरह नम आंखों से देखता देख उसे बहुत तकलीफ़ मेहसूस हो रहा था | वह बिना कुछ कहे अपने सर नीचे झुका लिया | वही उर्मी नम आंखों से अर्यांश को देखने लगी थी | आर्यांश को वह अब दिलो जान से चाहने लगी थी | लेकिन माया को इस तरह उनके बीच का दीवार बनता देख उसे ऐसा लगने लगा की उसका प्यार अधूरा ही रह जाएगा |      अर्यांश भी उसे ही देख रहा था | वही माया ,अहीरा और अर्यांश का हाथ पकड़ कर नीचे ले जाने लगी | की तभी देविका अपने हाथ फैला कर उनका रास्ता रोकते हुए बोली,""_ इतना गुस्सा अच्छी बात नहीं है माया..,आओ यहां हमारे साथ बैठो,हमसे तो तुम्हारा कोई दुश्मनी नहीं है | "    देविका की बात सुन माया कुछ कहने को हुई की वहा एक दम से कुछ ब्लास्ट होने की आवाज गुंज उठा |To be continued......      Â

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