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Chapter 1

chapter 1

क्यूट कपल

     "उफ्फ!  ये गांव की सड़कें इतनी ऊंची - नीची क्यों होती है।" माहीन अफ़रोज़ गांव की सड़कों पे रिक्शे में हिचकोले खाती हुई बोली।  "क्या करें मैडम गांव की सड़कें ऐसी ही होती हैं।" रिक्शे वाले ने सादगी से कहा ।"आप का बिल्ला बहुत प्यारा है, मैडम"।"आह, शुक्रिया आप को कैसे पता चला की ये बिल्ला है नॉर्मली लोग इसे बिल्ली ही समझते हैं, मेरा सुल्तान इतना प्यारा जो है।" माहीन ने अपने बिल्ले को प्यार किया।"मैडम वैसे कहां से आरही हैं, आप।""न्यू यॉर्क से""क्या किस पार्क से" रिक्शे वाले ने नासमझी से पूछा।माहीन उसे हैरत से देखने लगी और हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली "कोई नहीं भैया आप ये बताओ और कितना टाइम लगेगा।""मैडम, आपने जो पता दिया है वो यहां से और 5 मिनिट की दूरी पर है।""अच्छा" माहिन ठंडी आह भर के गांव का नज़ारा देखने लगी।कच्ची सड़कें, दूर दूर तक फैले खेतों में लहराती हरियालियां, बड़े बड़े पेड़ों से भरे बगीचे और ताज़ी ठंडी हवाएं ये सब उसके लिए किसी ख्वाब से कम न था। बेशक वो न्यू यार्क से आ रही थी, लेकिन माहीन को यहां का नज़ारा लुफ्त अंदोज कर रहा था।माहीन अपने मां बाप की इकलौती औलाद थी,जो न्यूयॉर्क में रहते थे। वो न्यूयार्क से अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने मुल्क हिंदुस्तान वापिस आई थी ।वो किसी फाइव स्टार होटल में रुकने के बजाए, गांव के अपने पुराने घर में रहने अारही थी। जहां पहले उसके दादा दादी रहा करते थे।"लो मैडम पहुंच गए" रिक्शे वाला ने रिक्शा साइड में लगते हुए कहा।उसने रिक्शे से बाहर निकलते हुए एक नज़र अपने पुराने घर में दौड़ाई। बाहर आकर माहीन ने उसको पैसे दिए और उसका शुक्रिया अदा किया, और अपने घर में दाखिल हो गई।"ओह! मुझे लगा था घर बहुत गन्दा होगा,सुल्तान  लेकिन ये तो  बिल्कुल साफ है, ज़रूर डैड ने करवाया होगा।"वो सुल्तान से बाते करते हुए अपने सामान को एक तरफ रखी और बेड पे लेट गई।सुल्तान उसके बगल में बैठा रहा। माहीन थकी थी उसकी आंख लग गई।          लिसा ....लिसा रुको कहां जारही हो रुको। एक  भरी भरकम आवाज़ पर माहीन की आंख खुली ,उसने खिड़की से बाहर देखा शाम ढल चुकी थी, चारो तरफ अंधेरा था। मेन गेट और दीवार पर लगे लैंप की रौशनी अंधेरे गार्डन में मोमबत्ती की मानिंद टिमटिमा रही थी।माहीन की नज़र सामने के घर पर पड़ी, उस घर की बनावट माहीन के घर जैसे, जंजीर के साथ दो पल्ले वाली केवाड़  जैसी पुरनाई नहीं थी, उस घर में सिंगल डोर और ग्लास विंडो थी ।  उस घर  का गेट खुला था जो बहुत बड़ा था अन्दर बड़े से गार्डन में एक गाड़ी भी थी।माहीन की नज़र अपने गार्डन में बैठे सुल्तान पे पड़ी ,उसने आवाज़ लगाई लेकिन सुल्तान ने अनसुना करदिया जैसेही माहीन की नज़र उसके आप पास मंडराती एक बिल्ली पे पड़ी वो गिरती परती गार्डन में पहुंची और सुल्तान को अपने गोंद में उठा लिया।ये सारे मंज़र का दीदार करते हुए दानियाल ने माहीन का  ध्यान अपनी तरफ किया।"एस्क्यूज मी ..."  दानियाल  का अंदाज़ अनजाना और हिचकिचाहट भरा था।"जी.... आप कौन..?" माहीन ज़रा हैरत और शॉक में दानियाल की तरफ दो चार कदम आगे बढ़ी और ठहेर गई। जैस उसके लिए वक़्त रुक सा गया हो, माहीन दानियाल को बिना पलके झपकाए देखे जा रही थी। उस का दिलकश चेहरा  मर्दाना  खूबसूरती को बड़ी महारत से अपने अंदर समेटे था, घनी और छोटी तराशी हुई दाढ़ी और मुछे , उसके चेहरे पर चार चांद लगा रहे थे।"एस्क्यूज मी, क्या आप लिसा को बाहर भेज देगी प्लीज़"   उसकी  भारी और दिलकश आवाज़ पर माहीन चौकी।"अ... हां.." उसने सुल्तान को उतार के लिसा को  गोंद में उठाया और मेन गेट से बाहर आगई।वो धीमे धीमे क़दमों से चलती दानियाल के चेहरे को निहारती ,उस के करीब आ रही थी, दानियाल की धड़कने तेज़ होरही थी, वो भी उसे देख रहा था ।अब दोनों के बीच दो कदम का फासला था और माहीन  रुक गई। उसने लिसा को दानियाल की तरफ बढ़ाया, लिसा उचक के नीचे कुदी और दौड़ती हुई घर के अंदर भागी। लेकिन माहीन का दोनों हाथ दानियाल के हाथ में आ गया, लम्हे भर  लिए दोनों ने एक दूसरे को देखा। दानियाल ने झटके से उसका हाथ छोड़ना चाहा लेकिन माहीन ने ऐसा होने नहीं दिया। "एस्क्यूज मी मिस्टर" माहीन ने दानियाल का हाथ मजबूती से पकड़े हुए कहा।"जी.. "दानियाल घबराया।"आप अपनी बिल्ली की समझा दीजिए  मेरे सुल्तान के साथ फ्लर्ट न करे।" "क्या, वो फ्लर्ट कर रही थी" दानियाल की आंखे हैरत से फटी रह गई।"जी हां, वो क्या कहते हैं डोरे डाल रही थी, मेरे सुल्तान पे" माहीन सीरियस थी।दानियाल अपना हाथ  माहीन की गिरफ्त से आज़ाद करा के  गुस्से में तिलमिलाता वहां से चल पड़ा ।

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