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Chapter 11

chapter 11

क्यूट कपल

    अगली सुबह सर पर चोट खाए दानियाल की हालत में ज़रा  सुधार आया था लेकिन समीरा की सांसे थम चुकी थी।समीरा का उनके बीच न होना ही पूरे खानदान को गमगीन कर रखा था कि ऑटोप्सी की रिपोर्ट में उसकी प्रेगनेंसी की स्नाख्त ने उनके पैरों के नीचे से ज़मीन खींच ली।       इस हादसे के बाद नासिर और दानियाल का अच्छा खासा रिश्ता बिगड़ गया था । धीरे धीरे वक्त गुज़रता गया और ये हादसा सबके लिए पुराना होगया।अगर वक्त ठहरा था तो सिर्फ दानियाल के लिए। उस खौफनाक शाम ने उसे अपनी यादों में कैद कर रखा था। रातों के डरावने ख्वाब और हर वक्त समीरा के ऊपर से गिरने का मंजर उसे समीरा का  कातिल ठहराने लगे थे।वो कभी उस हादसे से उभर ही नहीं पाया था।      दानियाल के हालत से उसका पूरा परिवार परेशान था। इस खबर ने नासिर के गुस्से पर पानी डाल दिया था।वो दानियाल से मिलने आने लगा। उसका ख्याल रखता ।नासिर ने उसकी बहुत मदद की उस ट्रॉमा से बाहर आने में।       गुज़रते वक्त के साथ दानियाल ने खुद को संभाला था। लेकिन डर था कहीं माहीन के मुंह से समीरा का ज़िक्र उसे वहीं ने धकेल दे जहां से वो बमुश्किल वापिस आया था।   दानियाल ने दरवाज़ा खोला और सबकी जान में जान आई।"आप लोग शोर मचाना बंद करेंगे" दानियाल ने कहा।"भाई आप ठीक हैं" नासिर ने पूछा"हां, ठीक हूं" दानियाल ने कहा"दानियाल बेटा, तुम सच में ठीक हो न" दादी  उसके माथे का पसीना अपने दुप्पटे से साफ किया।"अब आप सब सोजाओ" दानियाल  ने कहा और दरवाज़ा दोबारा बंद कर दिया। इस दौरान उसने एक बार भी वहां खड़ी माहीन की तरफ  नहीं देखा था।दानियाल की बेरुखी उसका सीना चाक कर रही थी। नासिर से माहीन के उलझे और उदास दिल के आसार छुपे नही थे।"चलें मैं आप को घर छोड़ देता हूं" नासिर ने कहा और दोनों बाहर आ गए।"क्या मैंने अंजाने में दानियाल को चोट पहुंचाई है" माहीन ने  उसके आगे चलते नासिर से कहा।"नहीं, इसमें आप की खता नहीं बस हालात का कसूर है।" नासिर ने बड़ी संजीदगी से कहा था।इससे पहले दानियाल ने उसे इतना संजीदा (सीरियस) नहीं देखा था। वो अपनी बालकनी में खड़ा दोनों को देख रहा था। माहीन को नजरंदाज करने की कोई वजह नहीं थी, बस उसे समझ नहीं आया कि वो सबके सामने क्या बोले। वो समझता था कि अगर वो उसकी जगह होता तो शायद इससे ज़्यादा ही कुछ कर जाता।नासिर ने माहीन को उस हादसे से मुतल्लिक जो उसे जानना चाहिए था बताकर उसकी गलत फहमी दूर की।लेकिन दानियाल का उसे नजरंदाज करना माहीन को खाए जा रहा था।"भाई, आपको हमारी होने वाली भाभी को इग्नोर नहीं करना चाहिए" नासिर ने दानियाल से कहा।दानियाल ने उसे घूरा और सोफे से कुशन उठा कर उसे मारा।"मुझे पता है आप नाराज़ नहीं हैं"  नासिर ने कुशन कैच कर लिया।"तुम वापिस कब जा रहे हो" दानियाल ने चिढ़ कर कहा।"मैं नहीं जा रहा" नासिर ने उसे जलाया।"सुल्तान इधर आओ" माहीन सुल्तान को आवाज़ लगती हॉल तक आ गई। सुल्तान उसे इधर उधर दौड़ाता दानियाल के बाज़ू में आ बैठा। माहीन उसके पकड़ने उसके करीब न आ सकी।"लगता है सुल्तान भी आप दोनों का पैचअप करवाना चाहता है " नासिर ने सुल्तान को गोद में उठाते हुए कहा।उसकी आवाज़ दोनों ने सुनी थी।"अरे माहीन, ज़रा मेरी मदद करो" दोनों हाथ में डोंगे थामे दादी ने आवाज़ लगाई ।"जी दादी" वो उनकी तरफ दौड़ी"ज़रा टेबल लगाने में मेरी मदद करो" दादी ने उसे एक डोंगा थमाया।माहीन ने सब के साथ खाना खाया और बर्तन समेट कर किचन में आ गई। उसके पीछे दानियाल और नासिर बाकी के बर्तन ले आए।"ओह, आप बर्तन क्यों धूल रही है" नासिर ने उसे सिंक में बर्तन डालते देखा तो कहा।"ये हैं न, ये धुलेंगे" नासिर ने दानियाल की तरफ इशारा किया और किचन से बाहर आगया।वो दोनों एक दूसरे को देख रहे थे। वो उसकी तरफ आई और बोली" दानियाल..." की इतने में ही कमबख्त फोन की घंटी बज गई।दानियाल ने आंखों से रैक पर बजते उसके फोन की तरफ इशारा किया। माहीन फोन नहीं उठाना चाहती थी लेकिन दानियाल के इशारे पर वो फोन लेकर किचन से बाहर आ गई।"व्हाट" वो फोन पर बाते करते चौंकी।उसके मॉम का फोन था। उन्होंने दावर को बता दिया था कि माहीन इंडिया में है। "ओहो मॉम, why???? आप को नहीं बताना था न..."  माहीन ने कहा।"I am sorry" उसकी मॉम ने कहा।"उफ्फ मॉम, ok make sure वो इंडिया न आए" माहीन ने कहा और फोन रख दिया।    "ओहो बेचारी हमारी होने वाली भाभी कितनी उदास और तन्हा बैठी हैं" नासिर ने कहा जो दानियाल के कमरे की खिड़की पे खड़ा गार्डन में बैठी माहीन को देख रहा था। गार्डन में  सुल्तान और लिसा साथ खेल रहे थे।"Ooo, तो तुम दोनों के पैट्स भी कपल हैं" नासिर ने दानियाल को छेड़ा।"क्या मैं तुम्हें खिड़की से बाहर फेंक दूं उसे कंपनी देने के लिए" दानियाल ने कहा और खिड़की की तरफ बढ़ा।महिमा अपने गार्डन में वाकई उदास बैठी थी। दानियाल ने हिम्मत की और उसके बाजू में आ बैठा। "डिनर कर लिया" दानियाल ने पूछा।"भूख नहीं है" माहीन ने उसे गौर से देखा और बोली।"क्यों " दानियाल ने कहा।"तुम ऐसे एक्ट कर रहे हो जैसे कुछ हुआ ही न हो" माहीन ने कहा और उसकी आंखे भर आई थी।दानियाल ने उसे गले लगा लिया और बोला " I am sorry माहीन, प्लीज़ मुझे माफ़ करदो।वह रो पड़ी।"ओह, दानियाल भाई इतने रोमांटिक हैं" नासिर ने गार्डन के मंजर को देख कर बोला और अपने कमरे में सोने के लिए चला गया।माहीन और दानियाल के बीच की सारी  गलतफहमियां दूर हो चुकी थी। घंटों बात करने के बाद उसे नींद महसूस होने लगी।"मुझे नींद आ रही है" माहीन उसके कंधे पर अपना सर रख कर बोली।"तुम्हें बेड तक छोड़ दूं" दानियाल मुस्कुराते हुए बोला।"नहीं, इसकी जरूरत नहीं" वो शर्मा गई।माहीन उसके साथ गेट तक आई।"Are you sure मैं चला जाऊ" दानियाल ने उसे छेड़ा।"Good night " माहीन ने उसके गाल पर किस किया और बोली " अब जाओ"वो मुस्कुराया और अपनी दोनों हथेलियों में उसका चेहरा थाम, उसके होंटों की तरफ बढ़ा कि कच्ची सड़क पर डूग डूग चलते ऑटो की हलचन ने उसे रोक दिया।दोनों एक दूसरे को हैरत से देखने लगे की आखिर इतनी रात को कौन हो सकता है जिसका इनको इल्म न था...(आगे अगले पार्ट में)(लगता है आप लोग को हिंदी लिखना पसंद नहीं, तभी तो कॉमेंट नहीं करते। चलो अब जल्दी से कुछ लिखो जिससे हौसला अफज़ाई हो मेरी)

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