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Chapter 12

chapter 12

क्यूट कपल

    दोनों ने एक दूसरे को हैरत से देखा और सड़क पर आ गए। ऑटो की आवाज़ के साथ हैडलाइट की रौशनी बढ़ती गई और साथ साथ दोनों की उत्सुकता ये जानने की कि कौन हो सकता है। ऑटो आकर दोनों के सामने रुका। अंदर से एक बड़ा सूटकेस लिए एक लंबे कद का आदमी निकला। अंधेरे में उसका चेहरा पहचानना मुश्किल था। वो दोनों अपनी जगह जमे उसे देख रहे थे। वो उन की तरफ बढ़ रहा था, उनके बीच दूरी काम होने के साथ साथ उसके चेहरे पर पड़ा अंधेरे का नकाब भी हटता गया।सफ़ेद जूते, ब्लू डेनिम जींस, व्हाइट टी- शर्ट और गोरी रंगत का हसीन और रौबदार चेहरा। वो दिलकश पर्सनालिटी का मालिक था।उसे देख कर दानियाल और माहीन ने से एक साथ कहा " दावर" फिर दोनों हैरत से एक दूसरे को देखने लगे।वो उनके सामने रुका और माहीन को गले लगा कर बोला" तुम ने मुझे बताया क्यों नहीं की तुम इंडिया में हो"उसकी इस हरकत से वो घबराई और दानियाल की आंखे हैरत से बड़ी हो गईं।उसने दोनों को अलग किया और दावर को गले लगा के बोला" तुम्हें मेरे भी गले लगना चाहिए""ओह, मुझे लगा हम इतने क्लोज़ नहीं हैं" दावर ने कहा।"One second, क्या तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो" माहीन ने अपनी कन्फ्यूजन दूर करनी चाही।"हां, बचपन में हम एक ही स्कूल जाते थे फिर दानियाल इंडिया आ गया और हम बिछड़ गए" दावर ने कहा।"कुछ साल पहले हम मिले थे और फिर आज मिल रहे है" दानियाल ने कहा।"O, अच्छा" माहीन ने कहा।"Let's go" दावर ने माहीन से कहा और अपना सूटकेस लिए घर की तरफ मुड़ा।" वे.. वे..where are you going दावर" दानियाल ने उसका सूटकेस पकड़ते  हुए हड़बड़ा कर कहा।"हम अंदर जा रहे हैं" दावर ने कहा"What तुम दोनों हम कब से हो गए" दानियाल ने जल कर कहा।"दावर, तुम मेरे घर रुको " दानियाल ने उसका हाथ पकड़ा और अपने घर की तरफ मुड़ा। वो उसे माहीन के साथ नहीं रहने दे सकता था।"नहीं, मैं माहीन के घर ही ठीक हूं" दावर उससे अपना हाथ छुड़ा कर वापिस माहीन के घर की तरफ मुड़ा।"Wait ... Wait ...wait...., क्या कर रहे हो तुम दोनों" माहीन के तेज़ लहज़े ने दोनों को सीधा कर दिया।"तुम अंदर जाओ" उसने दावर को अंदर जाने को कहा और वो चला गया।"क्या कर रहे हो तुम" माहीन ने दानियाल से कहा।"तुम उसके साथ नहीं रह सकती" दानियाल ने कहा।"कोई बात नहीं, हम अमेरिका में साथ ही रहते थे" माहीन ने कहा "व्हाट " हैरत से दानियाल का लहज़ा ऊंचा हो गया।"शी...शी.. धीरे बोलो " माहीन ने कहा"बस इसी लिए मैं अपने मुल्क में रहना पसंद करता हूं, उधर की तहज़ीब मुझे ज़रा भी पसंद नहीं " दानियाल ने अमरीकी तौर तरीके को कोसा।"ठीक है अंदर जाओ कॉल करना अगर वो परेशान करे तो" दानियाल ने मुंह बना कर कहा।दोनों  ने एक दूसरे को गुड नाईट कहा और चले गए।"भाई ..भाई,  हमारी होने भाभी के साथ वो गोरा कौन है।" नासिर सीढियों से चिल्लाया और दौड़ता हुआ हॉल में आया।वहां दानियाल और दादी बैठे नाश्ता कर रहे थे।नासिर की बात सुन कर दादी ने उसे सवालिया नज़रों से देखा।"ओह नानी जान ,आप को तो पता है भाई सामने वाली माहीन को पसंद करते हैं " नासिर ने कहा टेबल पर बैठा।"मुंह बंद कर के खाओ " दानियाल ने नासिर के मुंह में ब्रेड का एक टुकड़ा ठूस दिया।"क्या कोई आया है माहीन की तरफ" दादी ने कहा।"हां वो दोस्त है उसका"  दानियाल ने ऐसे कहा जैसे  उसको कोई दिक्कत नहीं है।"ओह दोस्त है, मैं बात करू अफ़रोज़ से" दादी ने कहा।"किस बारे में नानी" नासिर ने अंजान बन कर पूछा।"दानियाल के रिश्ते के बारे में"दादी ने मुंह में निवाला डालते हुए कहा।दादी की बात सुन कर दानियाल के हलक से निवाला सरका और उस को खांसी आ गई।जैसे तैसे उसने नाश्ता खत्म किया और माहीन की तरफ दौड़ा चला आया।"तुम नाश्ता करने क्यों नहीं आई" दानियाल ने उससे पुछा वो उसे गार्डन में ही मिल गई थी।"मैंने नाश्ता कर लिया, दावर ने बनाया" माहीन ने सुल्तान को सहलाते हुए बेपरवाही से कहा।"ओह, दावर ने बनाया" वो जल कर बोला।"मेरे साथ बाहर जाना चाहोगी" दानियाल ने उससे पूछा"कहीं जा रहे हो" उसने पूछा।"हां, फिज़ा को पिक करना है। पहले हम घूमेंगे और फिर उसे पिक करेंगे" दानियाल ने खड़े खड़े डेट का प्लान बना लिया।"ओके, मैं रेडी हो कर आती हूं" माहीन ने कहा और तैयार  होने चली गई।दानियाल ड्राइव करता एक बार पीछे बैठी माहीन को मिरर में घूरता और एक बार अपने बाज़ू में बैठे दावर को।दावर ने आने की ज़िद कर, उसका अच्छा खासा डेट का प्लान चौपट कर दिया था। उसकी मौजूदगी दानियाल को कांटे के मानिंद चुभ रही थी।"इंडिया कैसे आना हुआ" दानियाल ने अपने गुस्से को काबू कर दावर से पूछा।"बस माहीन से मिलने आ गया" दावर के जवाब ने दानियाल को जला दिया।"निशा कैसी है, उसे भी साथ लाते" माहीन ने कहा।"हम ने ब्रेकअप कर लिया" दावर ने कहा"व्हाट" दोनों ने साथ में कहा और दानियाल ने गाड़ी रोक दी।"माहीन का तो समझ में आ रहा तुम ओवर रिएक्ट क्यों कर रहे हो" दावर ने दानियाल से कहा ।दानियाल खामोश रहा और ड्राइव करने लगा।" लेकिन क्यों" माहीन ने पूछा।"क्या इस बारे में बात करना जरूरी है" दावर ने उदासी से कहा।"At least, मुझे तो बताओ" माहीन ने कहा"Okay, वो मुझे चीट कर रही थी, इससे आगे कुछ मत पूछना" दावर ने कहा और विंडो से बाहर देखने लगा।"क्या हम उस पिंक ब्यूटी को लिफ्ट दे सकते है" खिड़की से बाहर देखते दावर ने कहा।पिंक सूट में खड़ी फिज़ा दूर से दानियाल की कार देख कर हवा में हाथ लहरा रही थी।"बहन है वो मेरी, हद में रहो" दानियाल ने उसे घूरते हुए कहा और गाड़ी रोक ली।"ओह, सॉरी" दावर संभला।रात के खाने पर दादी ने दावर को बुलाया था। टेबल कई तरह के खानों से सजा था, फिज़ा भी कई दिनों बाद कॉलेज ट्रिप से घर लौटी। दानियाल ने ज्यादातर उसके पसंद की चीज़ें बनाई थीं। "वाओ भाई , आप लाजवाब खाना बनाते हैं" नासिर ने शाही पनीर का एक निवाला लेने के बाद बोला।दावर और फिज़ा ने भी तारीफ़ की ।दादी भी मज़े से खा रहीं थीं।लेकिन माहीन ने जैसे ही निवाला मुंह में डाला उसे मतली आने लगी वो मुंह दबाए वाशरूम की तरफ दौड़ी ।"आप लोग खाएं मैं देखता हूं" दानियाल उसके पीछे दौड़ा।उनके पीछे जाने को फिज़ा उठी लेकिन दादी ने उसे बैठने को कहा और खुद चली आई।"तुम ठीक हो" दानियाल ने माहीन की पीठ सहलाते हुए पूछा।"हां " उसने अपना मुंह धुला और वाशबेसिन के बगल में रैक पर बैठ गई।"कुछ गलत खाया है" दानियाल ने पूछा।"नहीं तो, एक मिनिट " माहीन थोड़ी देर रुकी जैसे किसी चीज़ पर गौर कर रही हो और बोली" दानियाल, मेरे पीरियड्स..... लेट हो गए हैं।""क्या..." दानियाल को अचानक वो रात याद गई। उसने अपने दोनों हाथ रैक पर टिका कर सर झुका लिया।उन दोनों की गुफ्तगू ने वाशरूम के बाहर ही उन्हें रोक लिया.....(आगे अगले पार्ट में)

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