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Chapter 19

chapter 19

क्यूट कपल

शाम का वक़्त् था। लेकिन घने जंगल में गहरा अंधेरा सा था। रास्ता भी ऐसा नहीं था की आगे गाड़ी जा सके इसलिए नासिर और पुलिस की टीम ने आगे पैदल चलने का सोचा। इतने सुनसान इलाके में किसी इंसान का होना ना मुमकिन सा लग रहा था। जानवरों की आवाज़े सबको बार बार चौका रही थी। अगर उन्हें ट्रैकिंग डिवाइस रास्ता न बताता तो वहां किसी का पहुंचना क्या, उस जगह का अंदाजा लगाना मुश्किलकुशा काम था। ऊंचे नींचे  रास्तों से वो ट्रैकिंग डिवाइस के सिग्नल को फॉलो करते जा रहे थे कि अचानक से सिग्नल कट गया।रॉबिन के बाप को इल्म हो गया था की दानियाल यहाँ ट्रैकिंग के ज़रिये पहुंचा है। वो ये जानने के लिए ट्रैकिंग डिवाइस कहाँ है दानियाल को लगातार  अज़ीयत दे रहा था।दानियाल का खामोश रह कर उनकी अज़ीयत सहने का कोई फायदा नहीं था। क्योंकि  माहीन ने अपना पेंडेंट उतार कर उसके सामने फेक दिया। वो मुश्किल में फसे खुदा से मदद की उम्मीद के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे।अनजान, सुनसान और अंधेरे इलाके में  वो क्या करते भला।अंधेरे  में  किसी ऐसी जगह का ढूंढना भी आसान नहीं था कि जहाँ कोई इंसानी हलचल हो। वो अंदाज़े से बढ़ ही रहे थे की उन्हें कुछ लोगों की आवाज़ सुनाई दी ।वो भी शायद उन्हीं की तरह अपनी गाड़ी दूर छोड़ कर  पैदल आ रहे थे। फर्क इतना था की उन्हें  रास्तों का बखूबी इल्म था।नासिर और पुलिस की टीम उनके पीछे होली।थोड़ी दूर उनके पीछे चल कर उन्हें यकीन होगया था कि सब की मंज़िल एक है।घुटनों के बल बैठे दानियाल के कान में बहार से आते कदमों की आहाट सुनाई दी। उसने मन ही मन खुदा का शुक्र अदा किया और  सूकून की सांस ली । उसे यकीन था की ये उसकी बैकअप टीम है। उसे हैरानी तब हुई जब तेज़ होती कदमों की आहट से वहां मौजूद गुंडों और रॉबिन के बाप को भी कोई हैरानी नहीं हुई।"लड़कियों तैयार होजाओ तुम्हारी फ्लाइट का टाइम हो गया है" रॉबिन के बाप के अल्फाज़ ने दानियाल के वजूद के नीचे से ज़मीन खींच ली। "लो हमारे मेहमान भी आ गये। अपनी अमानत लने" दो अधेड़ उम्र आदमी अंधेरे से बहार निकल आये। जिनकी तरफ रॉबिन के बाप इसारा कर के कहा और ज़ोर का कहकहा लगाया।वो माहीन और फ़िज़ा का सौदा कर चुका था।दानियाल के जिस्म की हरारत बढ़ने लगी। उसके कुछ न समझ आया की वो क्या करे। उन दोनों आदमीओ में से एक ने फ़िज़ा को आज़ाद किया और बाज़ुओं से खींचता हुआ दानियाल के सामने लाया और दूसरे ने माहीन को।"सो, ब्यूटीफुल गर्ल्स जल्दी से लास्ट गुड बाय करलो और चलो चलते हैँ।" उन में से एक ने दानियाल के सामने झूक कर कहा।दानियाल ने अपने निढाल पड़ते जिस्म की तमाम ताकत को  इक्कठा किया और उसके जबड़े पर जोर का घुसां जड़ दिया।एक ही घूँसे की सौगात में वो ज़मीन पर धडाम से गिरा की उठने की हिम्मत न रही।                  अंधेरे गुफा सी गोदान में अफरा तफरी मच गई। वो दोनों लड़कियों को अपने साथ लेजाने आये थे। उन्हें लगा था वो गुलदस्ते से फूल की तरह उन्हें ले जाएंगे और दानियाल उनके दो गुंडों की गिरफ्त में तड़पता रहेगा।उन लोगों ने दानियाल की और उसके खानदान की इज़्ज़त पर बुरी नज़र डाली थी। एक औरत की इज़्ज़त बचाने के लिए दुनिया के तमाम मर्द कुर्बान।बस यही जज़्बा था दानियाल में भी की उतने गुंडों से अकेले लड़ने को मैदान में कूद पड़ा।वो तो फ़िज़ा और माहीन की किस्मत अच्छी थी। ऐन वक़्त पर उन दो ठरकिओं का पीछा करते नासिर और पुलिस की टीम गोदान तक आ पहुँची थी। वरना खुदा जाने क्या होता।पुलिस ने उस जगह को चारों तरफ से घेर, वहां से फ़िज़ा, माहीन और दानियाल को बाहिफाज़त निकालने की कोशिश नाकाम होते होते रही।रॉबिन के बाप ने पुलिस के सख्त पहरे में भी दानियाल पर गोली चलाने की कोशिश की और इसी कोशिश में अपने बाज़ू में खड़े एक पुलिस वाले को घायल कर दिया। जिसने उसे रोकने की कोशिश की थी। जैसे तैसे वहां से निकल कर वो घर को पहुँचे।अभी आँखों के आंसू सूखे ही थे और आवाज़े थमी थी की एक बार और जारी हो गईं। माहीन और फ़िज़ा के हुलिए ने तो उनकी माओं और दादी का दिल चाक कर रहे थे। सब ने उन्हें गले लगा कर दिल को करार आजाने तक आंसू बहाये।बिस्तर पर लेटे दानियाल की मरहम पट्टी हिना ने की और वो हॉल में सोफ़े पर सो रहा था। उसे सोता देख उसके पेरेंट्स बेतहाशा परेशान थे। शीबा के आंसू थम ही नहीं रहे थे। उन्हें डर था कहीं दानियाल फिर सदमे में मुब्तेला न हो जाए। इस बात का डर तो दानियाल के पेरेंट्स के साथ साथ दादी, फुफो और नासिर को भी था। अहमद साहब भी एकलौते बेटे के गम में निढाल, अपनी  बेगम शीबा को बाजुओं में थामे तसल्ली दे रहे थे। फ़िज़ा और माहीन के गुमशुदा होने से लेकर मिल जाने तक सब लोग हॉल में ही मौजूद थे। किसी ने एक निवाला तक न खाया था। दावर  और उसकी मॉम, माहीन के मॉम- डैड, दानियाल के पेरेंट्स, दादी और फुफो। यहाँ तक की फ़िज़ा की फ़्रेंड टीना और हिना भी घर न जा सकी थीं । दानियाल और नासिर के हाल तो खुदा हि बेहतर जाने।उनके घर लौटने के बाद दावर और उसकी मॉम निदा, हिना ने  सबके लिए खाना पकाया।हिना ने ज़िम्मेदारी के साथ सबको ने खाना खिलाया। कुछ घंटो बाद उसकी गुज़ारिश पर सब सोने चले गये। दानियाल अभी भी ग़फ़लत सी नींद सो रहा था। उसके पास से नासिर और माहीन, हिना की लाख इल्तेजा पर भी हटने को तैयार नहीं थे।"माहीन प्लीज़, खाना खा लें" हिना ने हज़ार बार कहने के बाद फिर से कहा था। उसने सामने ही खाना लगा दिया था।जवाब में वो खामोश दानियाल को देखती रही। उसकी आँखों से आंसू जारी थे। नासिर का भी वही हॉल था।   हिना ने निवाला उसके मुह की तरफ बढ़ाया। उसकी मोहब्बत में नासिर को खाना ही पड़ा। "नासिर अब सो जाओ, मै माहीन  और भाई के पास हूँ।" हिना  प्लेट समेटते हुए किचेन में जाती हुई बोल गई।"हिना, फ़िज़ा के रूम में जाके आराम करलो" ज़रा हलका महसूस करने के बाद नासिर को ख्याल आया की कैसे पूरे वक़्त हिना जगती हुई सबको संभालने में लगी थी। वो उसके पीछे किचेन में आ गया।"कुछ खाया है" नासिर सिंक में बर्तन साफ करने के लिए इकट्ठा करती हिना का हाथ थाम कर बोला।नासिर के कहने पर हिना को याद आया की उसने कुछ भी नहीं खाया था। वो जवाब में उसे खामोश देखती रही। "तुम यहाँ बैठो" नासिर ने डाईनिंग टेबल पर उसे बैठाया। खाना लगाया और खुद बर्तन धोने लगा।हिना का नासिर को खाना खिलाना, नासिर का हिना के लिए खाना लगाना और बर्तन धोना। ये तमाम मंज़र नासिर की मॉम बड़ी दिलचस्पी से देख रही थी। उन्हें हैरानी तो तब हुई जब नासिर ने बर्तन धोना शुरु किया। उन्हें वो लम्हा याद आया की कैसे नासिर ने उनके बर्तन धोने की इल्तेजा पर हाथ खराब होजाने का बहाना देकर निकल गया था।"अच्छा बेटा, तुम्हें तो मै बाद में देखती हूँ।"  वो बनावटी गुस्से से खुद से कहती हुई वापिस कमरे में  चाली गई।दरअसल वो देखने आई थी की नासिर ने खाना खाया की नहीं। हिना का नासिर को खिलाना उन्हें पसंद आया था।           आधी रात गुज़र चुकी थी। घर में काफी सन्नाटा था। सब सुकून की नींद जो लेरहे थे। नासिर के कहने पर हिना भी फ़िज़ा के रूम में आराम करने चली गई थी। नासिर दानियाल के सामने सोफे पे बैठा उसे देख रहा था। माहीन भी उसके उठने के इंतेज़ार में भुकी प्यासी बैठी थी।"भाई, आप ठीक है।" दानियाल के आँख खोलते ही नासिर उसकी तरफ लपका।"दानियाल..... तुम ठीक हो" माहीन के लहज़े में किस कदर फ़िक्र और मोहब्बत थी।"हाँ,  ठीक हूँ " वो उठ कर बैठा।माहीन ने दिल दिल ही दिल में खुदा का शुक्र अदा किया। दानियाल ठीक था। माहीन को अपने सामने देख कर उसकी तबियत और बहाल हो गई थी। उसने भूख का इज़हार किया।"भाई, माहीन को अच्छे से खिलाइये। ये आप के उठने के इम्तेज़ार में रोज़ा रखे हुए थी।" नासिर ने कहा और दोनों  के लिए खाना लगाकर सोने चला गया।खाना खाने के बाद वो हॉल में बैठे बातें करते रहे और न जाने कब नींद की आगोश में चले गये।(आगे अगले पार्ट में)

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