Back
/ 20
Chapter 4

chapter 4

क्यूट कपल

"माहीन बाजी.....माहीन बाजी..।" फिज़ा की आवाज़ पर माहीन पीछे को मुड़ी, फिज़ा अपने गेट से ही उसे आवाज़ लगा रही थी।"क्या हुआ" माहीन ने अपने गार्डन से ही जवाब दिया,वह सुल्तान के साथ टहलने आईं थीं।"नाश्ता कर लिया" फिज़ा ने दोबारा उंची आवाज़ में पूछा"नहीं अभी नहीं" माहीन ने जवाब दिया।आग वाले हादसे के बाद वो कुकिंग का सोच भी नहीं सकती थी।"दादी बुला रही है" फिज़ा ने हाथ से इशारा करते हुए कहा।"आज भाई नाश्ता बना रहे हैं" फिज़ा ने माहीन की गोद से सुल्तान को लेते हुए कहा।"अच्छा, क्या वो खाने लायक बना लेते हैं"। माहीन ने बनावटी हैरत से पूछा"आप को नहीं पता, वो qualified सेफ हैं।" फिज़ा ने माहीन को वाकई हैरान कर दिया था।"अह! सच में" माहीन अब वाकई हैरान थी।दानियाल, माहीन को नाश्ते के टेबल पर देख के ज़रा  हैरान हुआ। सब ने नाश्ता किया। नाश्ते के दौरान खाने की तारीफें थम ही नहीं रही थी। नाश्ते के बाद, फिज़ा कॉलेज के लिए निकाल गई । माहीन और दादी बातें कर रही थी, कि दादी का फोन आ गया और वो अपने कमरे की तरफ चली गई।माहीन सुल्तान  को ले कर किचेन में चली आई जहां दानियाल बर्तन धूल रहा था।"खाना बहुत टेस्टी था" माहीन की आवाज़ पर वो चौंका।"क्या मै कुछ हेल्प करू" माहीन ने कहा"नहीं, तुम्हारे मुलायम हाथ रूखे पड़ जाएंगे" दानियाल उसे गौर से देखते हुए बोला।उसके आंखों के सामने कल रात गार्डन  का मंज़र घूम गया और वो शर्म से नज़रें चुरा गई।"तुम इस मोटे को गोद मे उठाए थकती नहीं" दानियाल ने बातों का रुख बदला।"मै ने तुम्हारी बिल्ली की वजह से इसे गोद में उठाया है, क्या पता किधर से टपक जाए" माहीन ने सुल्तान को सहलाते हुए कहा।"ओह! जो होना था कल रात हो चुक है।" दानियाल ने मुस्कुराते हुए कहा।"अह अह..., क्या यहां होम डिलीवरी फूड सर्विस मिलेगी"माहीन ने बनावटी खासी के साथ बात बदलने की कोशिश की।"ये गांव है यहां हर घर में औरतें खाना बनाती हैं" अचानक से दादी की आवाज़ पर माहीन पीछे  को मुड़ी। वह शायद किचेन में पानी  लेने आई थी।"अह! दादी आप ...."माहीन ने कहा"इसे कुकिंग नहीं आती दादी" दानियाल ने उसकी टांग खीची।"ओह! " दादी ने हस्ते हुए कहा"दादी, आप भी दानियाल के साथ मिल कर मज़ाक उड़ा रही मेरा" माहीन ने मुंह बना कर कहा।"अरे नहीं नहीं बेटा, मै मज़ाक नहीं उड़ा रही" दादी ने प्यार  से कहा।"हमारे घर में फर्स्ट क्लास सेफ है। तुम इससे कुकिंग क्यों नहीं सीख लेती। शादी की उम्र हो गई है तुम्हारी ,हर मर्द के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर गुजरता है" दादी ने पानी का ग्लास खाली किया और माहीन को सलाह देते हुए किचेन से निकाल गई।माहीन उन्हें जाते हुए देखते रह गई। अचानक से उसे दावर का ख्याल आगाया, जो न्यूयॉर्क में उसके पड़ोस में रहता था। जिस पे उसे पांच सालों से कर्श था, लेकिन वो माहीन के सामने उसकी खाला जाद बहेंन निशा को डेट कर रहा था। माहीन के लिए ये बहुत तकलीफ़ देह था। यही खास वजह थी कि वो अपना एग्जाम खत्म करके इंडिया चली आई थी।"सुना तुमने दादी ने क्या बोला" दानियाल ने कहा"हां, हर मर्द के पेट का रास्ता उसके दिल से होकर गुजरता है।" माहीन ने कहा, वो अभी भी अपने ख्यालों में ही उलझी थी।दानियाल हस पड़ा।उसकी हसी पे माहीन अपने ख्यालों से बेदार हुई और खामोशी से छोटे छोटे कदम उठाते अपने घर का रुख कर लिया।वो उसका नया रूप देख रहा था, हमेशा बोलने वाली छोटी छोटी बातों पर बहेस करने वाली चंचल माहीन को उदास देख कर दानियाल का दिल बेचैन सा हो गया, शायद वो उसे पसंद करने लगा था।उसकी उदासी दूर करने के लिए वो कुछ कर न सका और उदास क़दमों से जाती माहीन को देखता रह गया।"कहीं जा रहे हो," दादी की आवाज़ पर दानियाल रुका।"हा, रेसटोरेंट जा रहा हूं कुछ प्रॉब्लम हो गई है। लेट हो जाएगा" दानियाल ने कहां और निकाल गया। वो खुद को बिज़ी रखना चाहता था। इसलिए वो अपने  रेस्टुरेंट  का जायेजा लेनेआ गया था।रात के खाने के बाद माहीन, फिज़ा और दादी के साथ उनके गार्डन में टहल रही थी।लिसा और सुल्तान भी वहीं थे।" दानियाल अभी तक नहीं आया" दादी ने गार्डन में लगे झूले पर बैठते हुए कहा।"भाई कहां गए है, दादी" फिज़ा ने पूछा।फिज़ा और माहीन , लिसा और सुल्तान के साथ  खेल रही थी ।"रेस्टोरेंट गया है कोई मसला होगया था" दादी ने बताया।माहीन दोनों को सवालिया नज़रों से देख रही थी।"भाई का रेस्टोरेंट है, वहां का काम वो खुद ही देखते हैं"।फिज़ा ने कहा"मै सोने जारही हूं। गेट अच्छे से बन्द करके आना" दादी ने जमाई लेते हुए कहा और अंदर चली गई।"ओके, दादी आप फिक्र न करे" फिज़ा ने लिसा को गोद  में लेते हुए कहा और झूले पर बैठ गई।"कहां पर है रेस्टोरेंट" माहीन ने दिलचस्पी लेते हुए पूछा और एक पैर पर जोर देकर झूले को हियाला।"यहां से काफी दूर है ,वहां का व्यू बहुत प्यारा है बाजी, आउटसाइड एरिया में है।" फिज़ा ने एक्साइटेड होकर बताया।"अच्छा, क्या तुमको पसंद है" माहीन ने पूछा"ऑफ कोर्स, बाजी मुझे बहुत पसंद है बल्कि भाई का ड्रीम प्रोजेक्ट है ये, उन्होंने इस पे चार सालों तक काम किया फिर जाके लॉन्च हुआ था रेस्टोरेंट।" फिज़ा बिना रुके बताए जारही थी।"अच्छा तुम लास्ट टाइम कब गई थी वहां" माहीन ने पूछा" मै सिर्फ एक बार गई हूं सर्दियों में । वहां ठंड काफी पड़ती है, यहां के मुकाबले, आउट एरिया है न इसलिए।" फिज़ा की बात  माहीन ने हां में सर हिलाया।"चलो अब सोजाओ रात काफी हो गई है।" माहीन ने कहा और दोनों सोने चली गई।माहीन ने रूम का दरवाज़ा बन्द किया और बेड की तरफ सोने के इरादे से चली आई। अचानक उसके पेट में दर्द हुआ,शायद ये पीरियड क्रैंप था। उसने दौड़ कर कबड खोला और अपनी लापरवाही पर खुद को कोसा।"आह! ये भी अभी होना था। अब मै क्या करू यहां तो शॉप भी नहीं है दूर दूर तक" वो परेशान होकर अपने आप से बातें कर रही थी। उसके सैनिटरी पैड्स खत्म हो गए थे वो उसे खरीदना भूल गई थी।उसने फिज़ा को फोन किया लेकिन उसके पास भी शोर्टेज था।"उफ्फ!!. क्या करू... क्या करू...", वो अपने आप से बातें करते अपने कमरे का चक्कर लगा रही कि उसे अचानक ख्याल आया दानियाल बाहर गया हुआ था।"क्या मै उसे फोन करू""नहीं ...नहीं" "ये ठीक नहीं रहेगा""कर लेती हूं इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है" वो अपना फोन सामने रख के अपने आप से बातें कर रही थी कि गलती से उसकी उंगली से टच होके दानियाल को कॉल लग गई।"हैलो" दानियाल की रौबदार और दिल को सुकून देने वाली आवाज़ सुन कर उसका दिल ज़ोर से धड़का।"ह हैलो" उसकी ज़बान लड़खड़ा गई।                        (आगे अगले भाग में)                                              By - seema

Share This Chapter