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Chapter 5

chapter 5

क्यूट कपल

"हैलो" दनियाल की रौबदार आवाज़ सुनके उसका दिल जोरो से धड़का।"ह..हैलो " माहीन की ज़बान लड़खड़ाई।"हां,  बोलो" दानियाल ने कहा"मै हूं माहीन" माहीन ने कहा"मै तुम्हारी आवाज़ पहचान सकता हूं माहीन, कैसे याद किया..कोई काम है।" उसके लहज़े में नरमी थी।"तुमको क्यों लगता है की मुझे तुमसे कोई काम होगा।" माहीन ने अपने दांतों में उंगली दबाते हुए कहा।"अब रात में इस  वक्त तुम मुझे मिस तो नहीं कर रही होगी।" दानियाल में मुस्कुराते हुए कहा।"कहां हो तुम" माहीन ने उसकी बात को नजर अंदाज  करते हुए कहा।"रास्ते में हूं" दानियाल ने कहा।"मुझे मार्केट से कुछ चाहिए था।" माहीन ने बड़ी मुश्किल से कहा था।"बोलो" दानियाल ने गाड़ी रोक ली।"मै बोल नहीं सकती, टेक्स्ट करती हूं ले आना प्लीज़।" उसने झट से फोन काट दिया।माहीन इतनी शर्मीली नहीं थी लेकिन दनियाल से ये कह पाना उसे मुश्किल लग रहा था कि उसे सेनिट्री पैड्स चाहिए।दानियाल मार्केट से काफी आगे निकल चुका था।  उसने गाड़ी वापिस घुमाई और एक मॉल के आगे रोकी।"उफ्फ! सच अ हार्ड टास्क।" दानियाल ने माहीन के टेक्स्ट को देख कर कहा।   रात का एक बज चुका था। वो दनियाल इंतजार करते करते अपने गार्डन में आ गई थी। वो अब तक नहीं आया था।कभी वो गार्डन में लगी बेंच पर बैठती, तो कभी गेट से  बाहर को झांकती। "उफ्फ! वो पैड्स खरीद रहा है या बना रहा है।" वो बेंच पर आके बैठी और चांदनी रातों में टिमटिमाते तारों को निहारते निहारते उसकी आंख लग गई।दानियाल ने गाड़ी रोकी, रात की खामोशी का ख्याल करते हुए उसने गेट का क्लच धीरे से हटाया और गार्डन में आगया। जहां उसे बेंच पर सोती माहीन नज़र आ गई, वो उसकी तरफ आ गया।   दोनों थैले बेंच पर रख के, दानियाल ने उसे उठाने के लिए उसकी तरफ  देखा।चांदनी रात में माहीन के  निखरे चेहरे पर गर्दिश करते काले बाल, सर्द हवाओं से टकराते उसके कापते सुर्ख होठ। दनियाल को उसके करीब जाने पर मजबूर कर रहे थे।वो उसके सामने खड़ा उसकी तरफ झुकता गया , उसका चेहरा करीब से और भी खूबसूरत था। "तुम करीब से और भी खूबसूरत हो माहीन" वो उसकी बिखरी जुल्फें समेटा खुद उनमें उलझने लगा था।उसके चेहरे पर दनियाल की  उंगलियों की तपिश ने माहीन को नींद से बेदार कर दिया। उसने आंखे खोली तो दनियाल को सामने खड़ा पाया। वो उससे थोड़ी दूर खड़ा था। "कब आये "वो सीधी होके बैठी।"बस अभी अभी, " दनियाल ने कहा और दोनो थैले उठा कर उसकी तरफ बढ़ाया ।"O, ये क्या है" वो हैरत से बोली। माहीन को किसी छोटे बैग की उम्मीद थी।"ऐसा लग रहा की तुमने पूरे मंथ की ग्रॉसरी कर ली " उसको हसीं आ गई।"वहां बहुत सारे ब्रांड्स थे ,मुझे नहीं पता तुमको कोनसा चाहिए। इसलिए मैं सब ले आया।" दानियाल ने एक बैग उसकी तरफ बढ़ते हुए कहामाहीन ने बैग लेलिया और दूसरे बैग की तरफ इशारा  कर के पूछा"और ये?" "ये.. फ्राइड  चिकन और कोल्ड ड्रिंक ,मुझे लगा तुम जगी हो तो तुम्हे भूख लागी होगी। मेरे साथ शेयर करना चाहोगी?।" दनियाल ने बैग हवा में हल्का सा लहरा के पूछा। "ओके!! मै फ्रेश होके आती हूं" माहीन ने दनियाल को थम्स अप का साइन दिया और सेनिट्री पैड्स का बैग लेकर  अंदर चली गई।"तुम्हारी फेवरेट पीस कोन सी है??"  दनियाल ने फ्राइड चिकन का डब्बा खोलते हुए पूछा।"गेस करो" माहीन ने मुस्कराते हुए कहा।दोनो  शबनम की बूंदों से सजी मलमली घांस पर चौकड़ी लगाए बैठे बातों में मगन थे। दनियाल उसके बारे और जानने का ख्वाहिशमंद था।"अगर मैं सही गेस करू तो मुझे क्या मिलेगा" दनियाल ने मजाकिया लहजे में कहा।"पहले गेस तो करो,फिर देखते हैं" माहिन ने कहा।थोड़ी देर चिकन की तरफ देखने के बाद दनियाल ने विंग्स उठा कर उसकी तरफ बढ़ाया।"ओ.. वाओ तुमने सही गेस किया।  बट हाव....?" माहीन ने  एक्साइटमेंट और खुशी से चिकन लेते हुए कहा।"Wao very tasty, इंडियन फूड की बात ही अलग होती है" माहीन ने विंग्स का एक बाइट लेके कहा। "अच्छा बताओ तुमको क्या चाहिए" उसने  विंग्स की तरफ इशारा करके कहा।"मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ तुम्हे जानना है" दनियाल ने कोल्ड ड्रिंक का कैन खोल कर माहीन की तरफ बढ़ते हुए कहा ।माहीन एक लम्हे को ठहरी और दनियाल से कैन लेके बोली" ओके, पूछो? क्या जानना है।""आज सुबह किचन से बिना कुछ बोले क्यों चली गई थी"दनियाल के लहजे में संजीदगी थी।"O, तुमको इग्नोर किया क्या मैंने" माहीन ने दनियाल की तरफ देखा और कहा।" हां, किया तुमने इग्नोर लेकिन तुम sad भी थी" उसने कोलड्रिंक की एक घूट ली और कहा।"बस किसी की याद आ गई थी" माहीन ने कहा"ब्वॉयफ्रेंड " दनियाल ने कहा"नहीं  क्रश, दावर नाम है उसका " माहीन ने कहा"ओह.. तो तुम sad क्यों हुई" दनियाल ने कहा और  एक ही बार में लेग पीस का गोस्ट नोच का चबाने लगा जैसे वो माहीन के क्रश को क्रश कर रहा हो।"वो किसी और को डेट कर रहा है" माहीन ने उदासी से कहा।"वो क्यों, तुम ने बताया नहीं उसको" दनियाल ने पूछा"नहीं, मौका ही नहीं मिला" माहीन ने कहा।"बातों बातों में हम ने दो पोर्शन चिकन का खत्म कर दिया" माहीन  ने अपने आंसू रोकते हुए बात बदलने की कोशिश की। उसने सारा बिखरा कैन और डब्बा समेटा और एक पैक्ड कैन लेकर खड़ी हो गई। वो दनियाल के सामने रोना नहीं चाहती थी।"तुम अपना हाथ काट लोगी, लाओ मैं ओपन कर दूं" दनियाल ने उसके हाथ से कैन लेके ओपन किया और उसकी तरफ बढ़ाया।अब अपने जज़्बात पर माहीन का काबू न रहा था,वो रो पड़ी।उसे रोता देख, दनियाल का कलेजा फट रहा था। वो उसके बिल्कुल करीब जाकर खड़ा हो गया और धीरे से बोला " तुम्हे सिर्फ एक बार इजाज़त है रोने की " और उसका सर अपने सीने से लगा लिया। कार की तेज़ तेज़ हॉर्न पर माहीन की आंख खुली। कल रात  देर तक जागने और जी भर रोने की वजह से उसकी तबियत ठीक नहीं थी, इसके बावजूद उसे सुल्तान को खाना देने उठना पड़ा। वह उठी, सुल्तान के खाने का पैकेट उसके पास ले आई लेकिन वो अपने जगह पे नहीं था।"उफ्फ, अब ये कहां चला गया" वो बड़बड़ाई और इधर उधर देखती गार्डन में आ गई।"ओह, तो तुम यहां हो सुल्तान। मुझे लगा तुम अपनी गर्लफ्रेंड के पास हो" उसने सुल्तान को गोद में लिया और अंदर आ गई।"तुम ज़रा सब्र नहीं रख सकते आ रहा हूं" दनियाल ने कहा और गेट खोला,लेकिन गेट पर सिर्फ कार थी।"तुम्हे शर्म भी आती दूसरे के घर में झांकते हुए" दनियाल ने नासिर को कंधे से पकड़ कर कहा जो माहीन के गार्डन में नज़रें गड़ाए खड़ा था।       नासिर दनियाल का फूफी ज़ाद भाई था। वो दनियाल से सिर्फ दो घंटे छोटा था। लेकिन बात तो ऐसे करता था जैसे उससे दो साल छोटा हो। नासिर दिल का अच्छा और बहुत मज़ाकिया मिजाज़ का था। वो अपनी बड़ी बहन सना की शादी का कार्ड लेके आया था।" O, दनियाल भाई कैसे है आप" नासिर ने एहतराम से पूछा।"मैं तो ठीक हूं। तू बता , तू यहां क्या कर रहा है।"दनियाल ने पूछा।"अरे भाई बताइए न वो लड़की कोन थी।" नासिर ने पूछा।"तू अंदर चल फिर बताता हूं" दनियाल उसे अपने बाज़ू में जकड़े अंदर ले आया।अंदर आते ही उनकी मुलाकात दादी से हो गई और नासिर माहीन के बारे में पूछना भूल गया।"नानी जान" नासिर  दनियाल की दादी शाहाना बेगम से जा चिपका।"अरे मेरे बच्चे कैसे हो?" शाहाना बेगम ने उसे प्यार किया।नासिर ने शाहाना बेगम और फिज़ा से बातें की, चाय नाश्ता किया और दनियाल को ढूंढता उसके कमरे में आगया।जहां दनियाल अपने लैपटॉप में नज़रें जमाए बैठा था।"भाई, आप का काम में मन कैसे लग सकता है जबकि आपके पड़ोस में इतनी खूबसूरत लड़की रहती हो" नासिर की आवाज़ पर दानियाल ने उसे देखा और सोफे पर रखे कुशन नासिर को  दे मारा।"उफ्फ भाई, लगती है।" नासिर उठा और कमरे की खिड़की खोला।उसके कमरे की खिड़की से नीचे माहीन का कमरा साफ़ नज़र आता था अगर उसके कमरे की खिड़की खुली हो,और इस वक्त माहीन के कमरे की खिड़की खुली थी जो उसने सुल्तान को ढूंढने के लिए खोली थी।"ओह भाई, ये अभी तक सो रही" नासिर एक बार फिर माहिन को देख कर उछला।दनियाल लपक कर खिड़की के पास आया," ये अभी तक सो क्यों रही है" वह बड़बड़ाया।"क्या आप ने कुछ कहा," नासिर ने कहा "हां, यही की तुम यहां से निकलो और मुझे काम करने दो" दनियाल ने कहा।वो मन ही मन माहिन के लिए फिक्रमंद हो रहा था।"नासिर भाई ,चलें हम तैयार हो गए" फिज़ा कमरे में दाखिल हुई।"कहीं जारहे हो तुम सब" दनियाल ने फिज़ा से पूछा।"हां, मैं इन्हें अपने घर ले जारहा हूं"  नासिर ने उछलकर कहा।"और हां दनियाल भाई, दादी आपको किचन में बुला रही हैं" फिज़ा ने कहा और नासिर के साथ नीचे आ गई।जब तक दनियाल नीचे आया। फिज़ा और नासिर गाड़ी में थे और शाहाना बेगम बाहर निकला रही थी दनियाल को देख के रुकी और बोली, "बेटा दनियाल""हां, दादी" दनियाल उनके पास आ गया।"हम फूफो के घर जा रहे है शादी की तय्यारिओं में हाथ बटाने, बेचारी अकेले कैसे संभालेगी" दादी ने कहा।"आप फिक्र न करे दादी मैं छोटा बच्चा नहीं हूं अपना ख़्याल रख सकता हूं " दनियाल ने शाहाना बेगम को कंधे से पकड़ कर बाहर ले जाते हुए कहा।"अरे मेरी जान, मै जानती हूं।" दादी ने उसे प्यार किया और बोली "लिसा को टाइम पे खाना खिलाना, और हां माहीन को बता देना की हम शादी में गए हैं।" "और हां दनियाल, माहीन अभी तक नाश्ते के लिए नहीं आई। उसको नाश्ता करा देना।" शाहाना बेगम जाते जाते बोल गई । दनियाल ने माहीन को फोन किया,और उसकी आवाज़ सुन कर उसके घर को तरफ दौड़ा......(आगे अगले पार्ट में)By- Seema

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