Back
/ 20
Chapter 7

chapter 7

क्यूट कपल

          दनियाल ने पहले ही कह दिया था  की सरप्राइज़ है, वो जानने को बेकरार थी पर पूछ न सकी।"हम कम  से कम नाश्ता तो कर लेते " माहीन न चाहते हुए भी बोल बैठी।"ओह सॉरी" दनियाल ने गाड़ी रोकी और बाहर आ गया और बोला" just wait, मैं अभी आया।" और सुपर मार्केट में दाखिल हो गया।माहीन ने उसे आते देखा , उसके हाथ खाने पीने की चीज़ों के बड़े बड़े थैले थे।उसने कार खोल कर थैले माहीन की गोद में रख दिए" ये  लो"।"वाओ, दनियाल तुम कितने केयरिंग हो, क्या तुम सबकी इतनी ही केयर करते हो" माहीन ने थैले को टटोलते हुए कहा।"नहीं सिर्फ अपनो की" दनियाल ने उसे गौर से देखते हुए कहा।"तुमने इतनी चीजें लेली है की अगर हम जंगल ने फस गए तो पूरे दो दिन तक इसे खा सकते हैं" माहीन ने माहोल बदलने की कोशिश की।"तुम शर्माते हुए क्यूट लग रही हो" दनियाल ने उसकी कोशिश पे पानी फेर दिया।"अ.. न.. नहीं तो , मेरे फ्रेंड्स कहते हैं।  मैं बिल्कुल क्यूट नही हूं और न शर्माती हूं।" माहीन ने शर्माते हकलाते बड़ी मुश्किल से अपनी बात कही थी।"फिर तो अच्छा हैं, ये cuteness सिर्फ मेरे  लिए है" दनियाल ने मुस्कुराते हुए कहा।उनके रवैय्ये से उन दोनों को लगने लगा था की दोनों एक दूसरे में दिलचस्पी ले रहे हैं।माहीन ने अपनी मुस्कुराहट  छिपाने के लिए अपना रुख खिड़की की तरफ कर लिया।   दनियाल ने विंडो का ग्लास   नीचे कर दिया। वो बाहर के नज़ारे का मज़ा ले रही थी।वो सुनसान सड़क से गुजर रहे थे, शहर काफी पीछे  जा चुका था। माहीन के बेताबी की इंतहा न रही और पुछ बैठी"क्या हम कहीं दूर जा रहे हैं"।"हां, थोड़ी दूर। लेकिन हम आज ही घर लौट जाएंगे" दनियाल ने आराम से ड्राइव करते हुए जवाब दिया ।"शुक्र है हम इन्हें भी ले आए" माहीन सोते हुए लिसा और सुल्तान की तरफ इशारा किया।"हां तुम बिना सुल्तान के आती नहीं इसलिए लिसा को भी लाना पड़ा" दनियाल ने मुस्कुरा कर कहसुबह के 10 बजे थे। लेकिन धूप न होने की वजह से शाम जैसा महसूस हो रहा था। मौसम सुहाना था ठंडी हवाओं और उस जगह की खूबसूरती ने उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया था। माहिन के कहने पर दनियाल ने साइड में गाड़ी रोकी। वो जगह सुन सान, और रुकने के लिए बेहतरीन थी। पक्की सड़क के एक तरफ हरी घांस का दूर तक नज़र आता मैदान था। दूसरी तरफ पेड़ पौधों के दरमियान साएदार जगह थी। वहां बैठने के लिए बेंच भी थी जिसपे सूखे पत्ते बिखरे हुए थे। इस जगह को  देख के ऐसा लगता था ये किसी का पर्सनल पिकनिक स्पॉट हो। फिर क्या था, माहीन ने अपने स्कार्फ से बेंच साफ़ की और बैठ गई। दनियाल ने उसे थैला थमाया "तुम खाओ, मैं ये कॉल ले के आता हूं।" उसने फोन माहीन को दिखाते हुए कहा और  ज़रा दूर चला गया।दादी का कॉल था। उन्होंने घर की हाल जानने को फोन किया था। "दादी मैं घर नहीं हूं "दनियाल ने उन्हें बताया।वो स्पीकर ऑन किए बात कर रही थी। उधर उनकी बातें फिज़ा और नासिर सुन रहे थे।"क्या, तुम माहीन को अकेला छोड़ आए" दादी की आवाज़ हैरत से ज़रा तेज़ हो गई थी।"नहीं दादी रिलैक्स, मैं आप की माहीन को भी साथ लाया हूं " दानियाल ने राहत दिलाई।"क्या ,भाई माहीन को बाहर ले गए हैं" फिज़ा ने दादी से हल्की आवाज़ में पूछा।दादी ने इशारे से हां में सर हिलाया और मुस्कुराई।"ये माहीन कौन  है"  नासिर ने हैरानी से पूछा।"हमारे घर के सामने ....." अभी फिज़ा ने बात पूरी नहीं की कि नासिर बोल पड़ा" वो खूबसूरत लड़की जिसके पास बिल्ली है।""हां वही, लेकिन वो बिल्ली नहीं बिल्ला है। अगर तुम माहीन बाजी के सामने उसे बिल्ली बोला तो तुम्हारी खैर नहीं" फिज़ा ने कहा।" नानी जान, ज़रा फोन दे मुझे बात करनी है।" नासिर ने फ़ोन ले लिया और साइड में चला गया, वो हैरत से पागल हुए जा रहा था। "क्या सच में" फिज़ा ने  एक बार फिर दादी से हैरत का इज़हार किया दोनो को साथ में बाहर जाने पर।"हां, मुझे लगता है हमारा दानियाल उसे पसंद करने लगा है।" दादी ने अपने अक्ल के घोड़े दौड़ाए और दोनो खुशी से उछल पड़ीं।"एस्क्यूज मी मैडम, पानी मिले गा।" एक अजनबी आवाज़ पर खाने में मशरूफ माहीन ने सर उठाया। सामने एक बड़ी उम्र का आदमी खड़ा था। ढील- ढाल कपड़ों से वो सीधा साध लग रहा था। उसने दोबारा हाथ से इशारा करके पानी मांगा शायद उसे लगा वो हिंदी नहीं समझती। उसने पानी पिया और दनियाल की तरफ इशारा करके पूछा "वो आप के साथ हैं।"माहीन ने हां में सर हिलाया। ओह सॉरी मैडम , मै आप को पहचान न सका ,साहब ने बताया था की आप लोग आएंगे। ये लीजिए मैडम।  उसने एक चाभी का गुच्छा माहीन की तरफ बढ़ाया।जिसमें तीन चाभियां और एक बड़ा सा लाल रंग का दिल लगा था। माहीन को कुछ समझ न आया उसने दनियाल को देखा जो फोन पर बिजी था, उसने उसका सरप्राइज़ समझ कर चाभी लेली और वो आदमी पानी के लिए शुक्रिया कहा  और चला गया।हैरत में सराबोर नासिर ने अपने सवालों से दनियाल की नाक में दम कर रखा था।"भाई आपने बताया नहीं की ,आप उसे डेट कररहे हैं।खैर ये बताएं कब से कररहे हैं?आप ने मुझे  भी नहीं बताया। आखिर क्यू भाई।"दनियाल उसे चुप चाप सुन रहा था। उसे पता था नासिर को चुप कराने का कोई फायदा नहीं जबतक वो अपनी बात पूरी न कर ले वो चुप नहीं होगा।"अच्छा ये तो बता दे कहां जारहे हैं" अब नासिर संजीदा था।"अपने रेस्टोरेंट" दनियाल ने कहा।"इतने खराब मौसम में वहां जाने की क्या जरूरत है आप ज़रा सब्र नहीं कर सकते"  नासिर ने उसकी टांग खींची।"खराब मौसम" दनियाल ने आसमान की तरफ देख कर  कहा।वाकई मौसम बिगड़ रहा था। चारो तरफ से काले बादल उमड़ कर आरहे थे।"और हां,  उस इलाके में तूफानी बारिश का हाई अलर्ट है"नासिर ने कहा।"अच्छा चले ख्याल रखिएगा। मैं आप की डेट खराब नहीं करना चाहता।"  नासिर ने दोबारा कहां और फोन रख दिया। "तो क्या ये तुम्हारा सरप्राइज़ था।" माहीन ने चाभी हवा में लहराते  हुए दनियाल से पूछा।"उफ्फ, एक तो हाई अलर्ट और दूसरा ये चाभी" दनियाल ने  माहीन के पास बैठते हुए कहा" ये कहां से मिली तुमको" "ये , अभी तो एक आदमी दे कर गए। वो कह रहे थे उन्हे पता था हम आने वाले हैं " माहीन ने बड़े आराम से सुल्तान को सहलाते हुए कहा।"क्या, तुम बच्ची हो क्या। किसी अंजान से तुम कुछ कैसे ले सकती हो" हाई अलर्ट से  परेशान दनियाल माहीन पर चिल्ला गया।"तुम चिल्ला क्यों रहे हो मुझे लगा तुम्हारा सरप्राइज़ है। इसलिए मैंने ले लिया" माहीन ने भोला सा मुंह बना कर कहा।"ओह सरप्राइज़, हम वापिस घर जा रहे हैं" दानियाल ने उदास लहज़े में कहा"क्यों" माहीन ने पूछा"इस इलाके में हाई अलर्ट है तूफानी बारिश का।" दनियाल ने कहा।माहीन के कदम डर और घबराहट से जम गए। उसने  आसमान की तरफ देखा।जो रात की मानिंद काला हो चुका था। कुछ देर पहले जो मौसम उसे रोमेंटिक लग रहा था वो खौफनाक होने लगा था। ठंडी और तेज़ हवाओं ने अपने साथ गर्द और सूखे पत्ते उड़ना शुरू कर दिए। उसे अपने शर्ट में ठंड महसूस होने लगी थी। वो अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ रहे थे की अचानक से दिल दहला देने वाले कड़ाके और काले आसमान को सफेद करती रौशनी के साथ चमकती बिजली ने माहीन की चीख निकल दी। वो डर के मारे सुल्तान के फारों में अपना मुंह छुपा के ज़मीन पर बैठ गई।दानियाल ने पीछे मुड़ कर देखा और उसके पास आ बैठा "माहीन, क्या हुआ" उसने सुल्तान की पीठ से उसका चेहरा अलग किया और उसे सहारा दे कर उठाया।दोबारा एक दबरदस्त बिचली की  दहाड़ के साथ मूसलाधार बारिश शुरू होगई।       दानियाल को उसके चेहरे पर बिजली का खौफ साफ दिख रहा था, उसने माहीन का चेहरा अपने सीने में छुपा लिया और दोनो बारिश में भीगते रहे.......(आगे अगले पार्ट में)By- Seema

Share This Chapter