Chapter 9 of 20

chapter 9

क्यूट कपल776 words~4 min read

मौसम सर्द और खामोश था। कल रात के खुमार के साथ बारिशें भी थम चुकी थी। वो घर वापिस आ रहे थे, कार में सर्द रातों  सन्नाटा था।माहीन के जवाब ने दनियाल को खामोश कर दिया था। आखिर उस हसीनों जमील रात में ऐसा क्या होगया था कि उन नायब मोहब्बत के पलों को उसने महेज खता का नाम दे दिया था।दानियाल परेशानी के आलम में अपने कमरे का चक्कर काटे जा रहा था। उसके दिमाग में हजारहा सवाल उमड़ रहे थे।उसने अपनी तमाम हरकतों पर नज़र डाली लेकिन उसे ऐसा कुछ भी न मिला जिसे नाराज़गी की वजह समझा जा सके।दानियाल और माहीन को मिले एक हफ्ते हो चुके थे।वो अब खाना खाने के लिए भी उसकी तरफ नहीं आती थी।दानियाल ने कई बार कोशिश की थी उससे बात करने की लेकिन माहीन ने बात करना गवारा न किया।फिज़ा और दादी भी लौट आई थीं। नासिर भी कुछ वक्त के लिए उनके साथ रहने आया था।  दानियाल की खामोशी उसके दिल का दर्द चिल्ला चिल्ला कर बयान कर रही थी। नासिर के तमाम सवाल को वो काम का दबाव बता कर टाल देता था।अब तो नासिर भी समझने लगा था कि दनियाल के खामोशी की वजह माहीन हैं।माहीन का घर न आना दादी और फिज़ा को परेशान करता था। वो ही उससे मिलने आ जाती थी।   माहीन का हाल ए दिल भी दानियाल जैसा ही था। जब भी वो उसे देखती उसका दिल चाहता उससे जा लिपटे। मगर दो मोहब्बत करने वालों के बीच माहीन की अना आ रही थी।आती भी क्यों न। दानियाल ने नींद की आगोश में अपने अतीत का कांटा माहीन को चुभा दिया था।बेशक वो दोनों के लिए ही एक खूबसूरत रात थी कोई खता नहीं।  लेकिन माहीन को डर था कहीं दानियाल उसकी जिंदगी का दूसरा दावर न बन जाए।   "कितना दर्दनाक होता है। अपनी मोहब्बत को किसी और का हाथ थामे हुए देखना" माहीन अपने ख्यालों में गुम सर्द रात में तन्हा गार्डन में बैठी थी।उसके नाज़ुक कन्धों पर दानियाल के हाथ के एहसास ने उसे उसके दर्दनाक ख्यालों से एक और दर्दनाक हकीकत में ला पटका था। वो चौक कर खड़ी हुई और उसे देख कर घर के अंदर जाने को लपकी।दानियाल ने आगे बढ़ कर उसका हाथ थामा और उसके सामने जा खड़ा हुआ" अब और नहीं माहीन, मुझे और न सताओ" वो तड़प का बोल रहा था।माहीन ने उसका हाथ अपने कंधे से झटका और चिल्लाई" तुमने कहा था तुम उसके जैसे नहीं हो, लेकिन सारे मर्द एक ही जैसे होते हैं।"  उसके लहज़े में तड़प और आंखों में दर्द के आंसू थे।दानियाल को कुछ भी समझ न आया की वो किस बारे में बात कर रही है। उसके तेज़ आवाज़ पर नासिर, फिज़ा और दादी भी बाहर आ गए थे।"उस रात तुम मेरे साथ थे तो समीरा बीच में कहां से आ गई और कोन है ये जिसे तुम नींद में भी पुकारते हो।" माहीन का लहज़ा तेज़, तल्ख और गुस्से से भरा था।माहीन के तीखे अल्फाज़ ने दानियाल के उसकी तरफ बढ़ते कदम को रोकदिये। वो कुछ लम्हें उसे बेबसी में देखता रहा और कुछ कहे बगैर वहां से जाने के लिए मुड़ा,  उसकी नज़रे सामने खड़ी दादी, फिज़ा और नासिर पर पड़ी, उन्हें एक नजर देखा और वहां से चला गया। उसके पीछे नासिर भी दौड़ा।माहीन ने भी उन्हें देखा और सर झुका लिया।दादी उसके करीब आई" मैं नहीं जानती तुम दोनों के बीच क्या हुआ है लेकिन तुमने समीरा का नाम लेकर मेरे बच्चे को बड़ी मुश्किल में डाल दिया है।" उन्होंने रूखे लहज़े में कहा और वहां से चली गई।माहीन उन्हें सवालिया नज़रों से जाता देखती रह गई।बेशक माहीन के सवाल जायेज़ थे। वो इस बात से बेखबर थी की उसने अपनी मोहब्बत को अंजाने में ही लेकिन बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।" दरवाज़ा खोलें भाई प्लीज़ दरवाज़ा खोलें" नासिर लगातार दरवाज़े को बजा रहा था।दादी और फिज़ा भी दौड़ी आई थीं। दानियाल की इस हरकत ने सब को बेतहाशा परेशान कर दिया था।सब दरवाज़ा खोलने की दरख्वास्त कर रहे थे।सर्द और खामोश रात के माहोल में उनकी आवाज़ माहीन को बेचैन कर रही थी। वो भी उनके पास चली आई।सब ने माहीन के चेहरे पर परेशानी की सिकन देखी और समझने की कोशिश की कि इसमें उसका कोई कसूर नहीं है।        उन्हें डर था कहीं ये वाक्या उसे दो साल पीछे न धकेल दे। कहीं  वो दोबारा उस हादसे को याद कर वो ट्राउमाइज (सदमे का शिकार) न हो जाए । जैसे दो साल पहले वो समीरा के साथ हुए हादसे से  हुआ था।(आगे अगले पार्ट में)By- Seema                      Â

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