Chapter 34: chapter 34

Billionaire's Dark DesireWords: 29989

   अब आगे ......,   अल्पा इंडस्ट्री....      त्रिहांश का गुस्सा करने से राज्ञा रोते हुए आ कर अपने टेबल पर बैठी थी | तभी वहा समर ढेर सारे फाइल्स के साथ आया, राज्ञा उन फाइल्स को देखते हुए उसे कुछ कहती उससे पहले ही समर सारे फाइल्स को उसके टेबल पर रख कर राज्ञा से बोला,""_ ma'am बॉस ने कहा है की सुबह तक यह सारे फाइल्स के चेकिंग हो जाना चाहिए | "          समर इतना बोल कर वहा से चला गया | वही राज्ञा हैरानी से फाइल्स को देखने लगी थी | वह कम से कम सौ से भी ज्यादा फाइल्स थे ,दिखने में तो ऐसा लग रहा था की वह सारे वेस्ट फाइल्स है जिसे समर ढूंढ ढूंढ़ कर लाया हो...!! क्यों की उन पर ज्यादा ही धूल जमा हुआ था |     राज्ञा का चेहरा एक दम से रोनी जैसा हो गया... त्रिहांश जानबूझ कर उसे इतना काम दिया था ताकि वह सुबह तक करते बैठे .. वही त्रिहांश अपने केबिन में बनाए हुए ग्लास विंडो से राज्ञा को देख रहा था | उसके चेहरे का हाव भाव बेहद कोल्ड हो गए थे | राज्ञा ने उसे बेहद गुस्सा दिलाया था तो वह उसे आसानी से छोड़ने वाला नही था |             राज्ञा को यह सब देख इस वक्त बहुत रोना आ रहा था | लेकिन उसके आंसू की कदर किसे था ?  वह रोते हुए एक एक फाइल उठा कर काम करने लगी |                 दूसरी तरफ....         अग्निहोत्री मेंशन....,       अर्यांश का कार आ कर अग्निहोत्री मेंशन के सामने रुका | अर्यान्श एक नजर मेंशन के तरफ देखा,फिर मिरर में से उर्मी को देखा ,जो इशा के साथ कार का door open कर बाहर जा रही थी |  आर्यांश भी कार से बाहर आ कर उन दोनो को देखने लगा |तभी इशा आर्यांश को एक स्माइल पास करते हुए बोली,""_ थैंक यू जीजू...| "   आर्यांश भी बस हल्के से मुस्कुराया,फिर उर्मी को देखा,उर्मी भी उसे ही देख रही थी लेकिन उसके चेहरे पर खुशी जैसा कोई भाव नही था | इशा कभी उर्मी को देख रही थी तो कभी अर्यांश को,तभी उसे कुछ सूझा तो वह उर्मी से बोली,""_ didu ..मेरा पर्स...शायद कार में ही रह गया | "    बोलते हुए इशा ने कार के तरफ इशारा की,उर्मी एक नजर आर्यांश के कार को देखी,फिर उसे मुड़ कर इशा को कुछ कहती तभी इशा थोड़ा सुस्त होने का नाटक करते हुए बोली,""_ दी आप ले आना मैं जा रही हू | "   इशा बोल कर घर में जाने लगी ,वही उर्मी अपना सर ना में  हिलाते हुए वापस आर्यांश के कार के बैक सीट के तरफ गई |    वही आर्यांश ,इशा और उर्मी को ही देख रहा था | वह फिर उर्मी के पास जा कर इशा का पर्स ढूंढते हुए उर्मी का हेल्प करना चाहा,तभी इशा उसके पास आ कर अपना पर्स दिखा कर धीरे से बोली,""_ पर्स मेरे पास ही है जीजू ..| "  बोलते हुए इशा ने अपना एक आईविंक किया,फिर घर में भाग गई | वही आर्यांश ना समझी में उसे बस जाता हुआ देख रहा था, लेकिन उसे जल्द ही समझ आया की इशा ने ऐसा झूठ क्यों बोला ? वह devilish smile करते हुए उर्मी को देखा,जो उसके ही कार में बैठ कर इशा का पर्स ढूंढ रही थी |       आर्यांश भी उर्मी के पास जा कर बैठ गया | उसे ऐसे बैठता देख उर्मी ना समझी में उसे देखने लगी ,उसे समझ नही आया था की आर्यांश उसके पास क्यों बैठा है ? ,वह फिर उसे इग्नोर कर इशा का पर्स ढूंढने लगी की तभी उसे आर्यांश की गरम सांसे अपने गर्दन में मेहसूस हुई,वह मुड़ कर आर्यांश को देखती तो आर्यन्श उसके होंठो पर किस कर बोला,""_ पर्स इशा के bag मे ही है मेरी जान | "     आर्यांश का इस तरह होंठ पर किस करने से उर्मी की आंखे चौड़ी हो गई थी | लेकिन उसकी बात सुन उसकी आइब्रोज सिकुड़ गए | वह गुस्से से बोली,""_ मतलब इशा ने.......| "  उर्मी गुस्से से अभी अपनी बात पूरा कर ही रही थी की तभी अर्यांश ने उर्मी का चेहरा पकड़ कर अपने तरफ घुमा कर ,झूठ बोलते हुए बोल,""_  नही उर्मी...उसने मुझे तुम्हे बताने कहा कि उसका पर्स उसके बैग में ही मिल गया है |   उर्मी आर्यांश का चेहरा ही देख रही थी जो उसके बेहद करीब था | वह फिर उससे थोड़ा दूरी बना कर बैठते हुए बोली,""_ Thank you....| " " Hmmm किस लिए ..? " आर्यांश उर्मी के बेहद करीब किसकते हुए पूछा तो उर्मी की धड़कने एक दम से तेज हो गए | आर्यांश उसके बेहद करीब आ कर अपने गरम सांसों को कभी उसके चेहरे पर छोड़ता तो कभी उसके गर्दन में ...उर्मी बस सिहर रही थी |      वह बोली,""_ इशा को बचाया उसके लिए...| "      अर्यांश उर्मी के कमर पर हाथ रख कर उसे अपने आपसे चिपका कर उसके आंखो में देख बोला,""_ your thank is not accepted urmi.. क्यों की तुम्हे अच्छे से थैंक यू बोलने ही नही आता | "         उर्मी हैरानी से आर्यांश को देखने लगी थी | और आर्यांश का इस तरह करीब खींचने से उसके दोनो हाथ आर्यांश के सीने में आ गए थे |   वह फिर उससे अलग होने की कोशिश करते हुए बोली,""_ मुझे ऐसे ही थैंक यू बोलने आता है ,अगर तुम्हे नही लेना है तो मत लो,लेकिन अभी छोड़ो मुझे.. अअह्ह्ह् "      उर्मी चटपटाने लगी लेकिन आर्यांश ने उसे छोड़ा नहीं..वह उसके गाल पर बेहद प्यार से चूमते हुए बोला,""_ तुम्हारे दिए हुए हर एक चीज मुझे लेना है उर्मी लेकिन ऐसे नही....!! "    बोलते हुए आर्यन्श उर्मी की पूरे चेहरे को चूमने लगा | उर्मी सिहरते हुए उससे अलग होने की कोशिश कर रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद वह शांत हो कर आर्यांश को देखने लगी | वही अर्यांश उसे बेहद प्यार से किस कर रहा था | लेकिन उर्मी को शांत हुआ देख वह रुक कर उर्मी की आंखो में देखने लगा |         तभी उर्मी उससे पूछी,""_ कोन है आप ? मेरे पीछे क्यों पड़े है ? सच में प्यार ही है या कुछ....? "      उर्मी जानबूझ कर बात को अधूरा छोड़ कर आर्यांश को देखने लगी, उर्मी अच्छे से जानती की अग्निहोत्री के कितने दुश्मन है ..और कोन किस रूप में आ कर उन्हे नुकसान पहुंचाए बता नहीं सकते थे |    अर्यांश उर्मी की चेहरे को अपने हाथो में भर कर उसके आंखो में देख बोला,""_ पहली मुलाकात में ही मैंने तुम्हे दिल दे बैठा हू,....तुम्हारा इतना करीब आया हु क्यों की मुझे तुमसे प्यार है,बेइंतहा प्यार....इसके अलावा कोई बात नही है उर्मी..अगर तुम्हे शक है तो मैं बतादु,मेरा नाम आर्यांश राठौड़ है ....राठौड़ इंडस्ट्री का इकलौता सीईओ..तुम मेरे बारे में पता कर सकती हो | "    बोलते हुए अर्यांश उसके माथे पर किस करा,फिर कार से बाहर आ कर ड्राइविंग सीट पर जा बैठा...उर्मी उसे ही देख रही थी | वह फिर कार से बाहर आ कर घर में जाने लगी,लेकिन वह मुड़ कर जल्दी से आ कर पैसेंजर सीट पर बैठ गई....अर्यांश को इसका बिलकुल उम्मीद नही था | वह ना समझी में उर्मी को देखने लगा की तभी उर्मी उसके करीब जा कर उसके गाल पर किस कर बोली,""_ इशा को उन गुंडों से बचाया... उसके लिए शुक्रिया ...| "    उर्मी की किस करते ही अर्यांश के आंखे हैरानी से चौड़ी हो गई | उसे कुछ समझ पाता उससे पहले ही उर्मी कार से बाहर जा कर घर में चली गई | वही आर्यांश थोड़ी देर वहीं अपने जगह में जम गया था |      वह फिर अपने बालो में हाथ फेरते हुए एक नजर घर की तरफ देखा फिर वहा से चला गया |      अल्पा इंडस्ट्री.....   शाम के 5 बज गए थे | और ऑफिस के सारे एंप्लॉयस एक एक कर घर जा रहे थे | राज्ञा अभी भी काम कर रही थी | और अब तक उसने मुश्किल से ही दस फाइल्स को चेक किया था |     ऑफिस में राज्ञा का काम का पहला दिन था... भले ही उसका यहा आना दूसरा दिन था लेकिन उसे आजा ही काम दिया था वह भी बेहिसाब सा.....|   सूरज ढल कर अब आसमान काला हो गया था | और पूरे ऑफिस में सिर्फ राज्ञा थी | वह बार बार आस पास देखते हुए काम कर रही थी, क्यों की उसे अकेले डर लग रहा था | वह जल्दी जल्दी से फाइल का काम खतम करने की कोशिश करने लगी |      तभी उसे किसी की शूज की कटकट आवाज सुनी,वह अपना सर ऊपर कर आस पास देखी तो उसे त्रिहांश ऑफिस से बाहर जाता हुआ दिखा | अचानक से उसके आंखे नम हो गए | वह इंसान इतना निर्दई क्यों है ? उसे इतना सारा काम दे कर खुद घर कैसा जा रहा है ?    राज्ञा को बहुत रोना आ रहा था | लेकिन वह हिम्मत हारने वालों में से नही थी | वह जल्दी जल्दी काम करने लगी लेकिन  उसके सामने फाइल्स लगभग सौ थे | आसानी से खतम होना यह तो ना मुमकिन था |   राज्ञा को इस वक्त नींद भी आ रहा था, क्यों की अब रात के ग्यारह बजने लगा था | वह बार बार जमाई लेते हुए काम कर रही थी ,तभी अचानक से वहा के सारे लाइट्स ऑफ हो गए |     राज्ञा की सांसे अटक गए | डर से वह अपना फोन का लाइट ऑन करना चाहा लेकिन उसके पास फोन कहा था ? फोन था लेकिन टूटा हुआ था | त्रिहांश ने गुस्से में फोन तोड़ डाला था |     राज्ञा के जान गले में अटक गए थे | वह डरते हुए आस पास देखी सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा था |  राज्ञा उठ कर रूंधली सी आवाज में बोली,""_ त्रिहांश....त्रिहांश ....?त्रिहांश यह लाइट..... "   राज्ञा बोलते बोलते रुक गई क्यों की उसे अभी  याद आया की त्रिहांश तो अभी अभी बाहर गया हुआ है | राज्ञा रोते हुए फिर से आवाज लगाई,""_कोई है ? लाइट्स कैसे चली गई ? प्लीज लाइट्स ऑन करिए ....कोई है ? "      राज्ञा की आंखो से आंसू जर जर बह रहे थे | डर और घबराहट से उसके चेहरे का रंग पीला पड़ गया था | वह रोते हुए आगे बढ़ने को हुई की तभी उसका पैर चेयर को टकराई और वह दडाम से नीचे गिरने को हुई लेकिन तभी उसे किसी ने अपने बाहों में पकड़ लिया |       अचानक से किसी की बाहों में जुलने से राज्ञा डर गई | वह उस आदमी से दूर हटती उसे एहसास हुआ की उसका चुवन और बदन से आ रही फ्रेगरेंस उसका त्रिहांश का है | वह रोते हुए उसके शर्ट को कसके पकड़ कर बोली,""_ आ आप बहुत बुरे है त्रिहांश ...बहुत बुरे....!! "     उस अंधेरे मे राज्ञा को त्रिहांश का चेहरा नहीं दिख रहा था | लेकिन फिर भी राज्ञा ने उसे पहचाना लिया था | वह उससे लिपट कर रोने लगी थी | वही त्रिहांश उसे अपने बाहों में झकड़ते हुए पूछा,""_ तुम्हे ज्यादा लगी क्या ? "     राज्ञा आंसुओ से भरे हुए अपना चेहरा त्रिहांश के गर्दन में छुपाते हुए रोते हुए बोली,""_ पता नही,लेकिन पैर में कुछ गिला गिला सा लग रहा है | "         राज्ञा की बात सुन त्रिहांश उसे अपने गोद में उठा कर आराम से एक टेबल पर बैठाया,फिर अपने फोन के टॉर्च ऑन कर उसके पैर को देखा...चोट लगने से राज्ञा की पैर से खून बहने लगा था | यह देख त्रिहांश गुस्से से राज्ञा पर चिल्लाया,""_ ऐसे अंधेरे में चलने की क्या जरूरत थी तुम्हे ? देखो लग गई न ? "   राज्ञा रो रही थी | वह रूंधली सी आवाज में बोली,""_ मुझे डर लग रहा था त्रिहांश, मैं डर कर...| "          त्रिहांश उसे गुस्से से घूर रहा था | जिस वजह से वह लड़की आगे कुछ बोल ही नहीं पाई | वही त्रिहांश उससे नज़रे हटा कर आस पास देखते हुए अपने मन में बोला,""_ अचानक से लाइट्स क्यों चली गई ? पहले तो... "      त्रिहांश अभी बोल ही रहा था की उसे दो काली परछाई दिखी जो उन दोनो से थोड़ी दूरी पर थे | यह देख त्रिहांश का औरा बेहद खतरनाक हो गया | उसे पता था इस वक्त ऑफिस में उसका और वॉचमैन के अलावा कोई नहीं है,लेकिन यह दो लोग कोन है ? यह उसे बिलकुल समझ नही आया था |      त्रिहांश फिर अपने जेब से नैपकिन निकाल कर राज्ञा के पैर पर बांधा जहा से खून बह रहा था |         त्रिहांश.....? " राज्ञा त्रिहांश का नाम लेते हुए जल्दी से टेबल से उतर कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा कर चिप गई | वही त्रिहांश चुपचाप वैसे ही अपने घुटनों के बल बैठा रहा | तभी राज्ञा बोली,""_हमारे अलावा भी यहां कोई है त्रिहांश ,मैने अभी दो परछाई देखी....| "    त्रिहांश का औरा बेहद सख्त था | वह बिना कुछ कहे राज्ञा को गले लगा फिर उसे अपने गोद में उठा कर ऑफिस से बाहर चला गया | राज्ञा उसके गर्दन में अपना चेहरा छुपा कर खुद को शांत कर रही थी |    त्रिहांश उसे पैसेंजर सीट पर बैठा कर उसका सीट बेल्ट लगाया | राज्ञा नम आंखों से उसे ही देख रही थी | वही त्रिहांश बिना कुछ कहे जा कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया | राज्ञा बोली,""_ मैं काम कर रही थी ना ? लाइट्स ऑफ कर मुझे डराया क्यों ? आपने मुझे पनिशमेंट दिया था तो आपको या सब.....!! ".   " लाइट्स अपने आप चले गए है,मैने ऑफ नही कराया ,वैसे भी तुम्हें डराने, मैं ही काफी हु ,मुझे इसके लिए अंधेरा का सहारा लेने की जरूरत नही है " राज्ञा की बात को बीच में ही रोकते हुए त्रिहांश थोड़ा तंज भरी लहजे में बोला, जिसे सुन राज्ञा का मुंह बन गई |   त्रिहांश बोलते हुए कार स्टार्ट कर वहा से चला गया | त्रिहांश के जाते ही एक स्कार्पियो जो बिल्डिंग के दूरी पर खड़ी थी | स्कार्पियो कार के ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए आदमी अपना फोन ले कर किसी को कॉल लगाया उधर से किसी ने कॉल पिक किया ,वह आदमी बोला,""_ बस वह लड़की बाल बाल बच गई है बॉस...कल इसकी अखरी दिन होगा | "    बोलते हुए उसने कार स्टार्ट कर वहा से चला गया | वह थोड़ी स्कार्पियो थोड़ी देर गई ही थी की तभी उसके सामने दो ब्लैक कार रुक गए |   दूसरी तरफ....   त्रिहांश का कार इस वक्त अग्निहोत्री मेंशन के तरफ चल पड़ा था | वही राज्ञा अपने में ही सिमट कर बैठी थी | लेकिन वह अभी भी सिसक कर रो रही थी |      त्रिहांश का पूरा ध्यान उस पर ही था | वह धीरे से अपने एक हाथ को राज्ञा की थाई पर रखा तो राज्ञा मुड कर गुस्से से उसे घूरने लगी,त्रिहांश बेहद calm हो कर कार ड्राइव कर रहा था | उसके चेहरे पर कोई भाव नही था और वह एक टक सामने देखते हुए कार ड्राइव कर रहा था लेकिन उसका हाथ राज्ञा के थाई पर सरकते हुए उसके अंदर अजीब सा सनसनाहट पैदा कर रहा था |     राज्ञा का चेहरा गुस्से से भरा था | उतने देर तक रुलाने की बाद वह उसके करीब आने की कोशिश कर रहा था |लेकिन त्रिहांश की हरकत से राज्ञा की सांसे अटक गए थे | ना चाहते हुए उसके मुंह से आहे निकल रहे थे |       " त्रिहांश...आ आपने मुझे बहुत तंग किया है आज..इसीलिए आप मुझसे दूर रहिए | " राज्ञा त्रिहांश के हाथ को अपने थाई से हटाते हुए बोली ,वही त्रिहांश का एक आईब्रो रेंज हुआ था |    वह राज्ञा का बाजू पकड़ कर अपने तरफ खींचते हुए उसे अपने करीब लाया फिर गुस्से से उसके होंठो को काटते हुए बोला,""_ गलती तुमने किया है राज्ञा,मैने बस गलती की हिसाब से तुम्हे पनिश किया  | " राज्ञा त्रिहांश के पकड़ से आजाद होने छटपटाते हुए उसे घूर कर देख रही थी | वही त्रिहांश उसके पूरे चेहरे पर अपने होंठ चलाते हुए कार ड्राइव कर रहा था | रात बहुत हो चुका था जिस वजह से रोड में कोई नही था तो त्रिहांश आराम से कार भी चला रहा था और राज्ञा को अपने आप से हिलने का मौका भी नहीं दे रहा था |     थोड़ी ही देर में त्रिहांश का कार आ कर अग्निहोत्री मेंशन के सामने रुका | त्रिहांश  सीट पर अपना सर टिका कर राज्ञा को पूरी तरह अपने ऊपर खींच कर उसे अच्छे से अपने गोद में बैठाया,फिर उसके कंधे पर टुडी रखते हुए बोला,""_ hmmm क्या कह रही थी तुम ? "    राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देखने लगी |    To be continued.........