Chapter 55: chapter 55

Billionaire's Dark DesireWords: 28303

अब आगे ........    त्रिहांश राज्ञा को ले कर बाहर आया , राज्ञा आस पास देखते हुए सारे घरवालों को ढूंढ रही थी लेकिन घर में कोई नही था | यह देख वह त्रिहांश से बोली,""_ लगता है सब चले गए है त्रिहांश...!! "   त्रिहांश ने उसे कुछ नही कहा क्यों की उसे इससे कोई लेनादेना नही था | वह बस राज्ञा को देख रहा था | राज्ञा से उसे प्यार कैसे हुआ यह उसे अभी तक समझ नही आ रहा था और वह इस वक्त उसी उधेड़बुन में था |      त्रिहांश राज्ञा को ले कर घर से बाहर आया | राज्ञा कार में बैठने को हुई लेकिन उसे कुछ याद आया तो वह रुक कर त्रिहांश से पूछी,""_ त्रिहांश आपने कहा था ना की आप कही दो दिन तक बाहर जा रहे है ? फिर आप गए क्यों नही ? "        त्रिहांश उसे घूरते हुए पैसेंजर सीट पर बैठाते हुए बोला,""_ तुम्हारी वजह से ही मै जा नही पाया | "   मेरी वजह से ..?  राज्ञा हैरानी से त्रिहांश को देखते हुए पूछी ,त्रिहांश हां में जवाब देते हुए झट से कार का डोर क्लोज कर ड्राइविंग सीट पर आ बैठा |     वही राज्ञा का मुंह बन गया था | वह मुंह बनाते हुए बोली,""_ आप आज कल मुझ पर ज्यादा ही झूठे इल्जाम लगाने लगे है त्रिहांश.... मैं तो कुछ करती ही नही हु फिर भी सब मेरी वजह से हो जाता है |    त्रिहांश अपने सीट बेल्ट पहनते हुए उसे ही देख रहा था | वह लड़की बड़ी ही क्यूट सा चेहरा बना कर उसे शिकायत लहजे में कह रही थी | त्रिहांश के होंठ मुड़ गए थे | वह कार स्टार्ट करते हुए उससे बोला,""_ बीवी जरा पास आना !! "        राज्ञा अपना सर घुमा कर उसे ही अजीब नजरो से देखने लगी | तभी त्रिहांश अपने हाथ से उसे अपने करीब आने का इशारा किया,यह देख राज्ञा उसके करीब खिसक गई | त्रिहांश ने कहा ,""_ और....!! "   राज्ञा एडजस्ट हो कर उसके और करीब झुक गई,त्रिहांश ने फिर से कहा,""_ और.....!! "   राज्ञा चीड़ गई | वह उसके चेहरे के बेहद करीब जा कर गुस्से से पूछी,""_ और कितना आऊं ?"     परफेक्ट....!! " त्रिहांश एक हाथ से ड्राइविंग करते हुए दूसरे हाथ से राज्ञा को कमर से पकड़ कर अपने आप से चिपकाते हुए बोला |     राज्ञा का चेहरा एक दम से त्रिहांश के बेहद करीब आ गया था | वह थोड़ा हकलाते हुए उससे पूछी,""_ क्या है त्रिहांश..? "  " Kiss.....!!! " त्रिहांश सामने देखते हुए उससे कहा |      राज्ञा की आंखे छोटी हो गई लेकिन अचानक से उसे कुछ सूझा तो वह उसके गले में दोनो बाहें डाल कर उससे पूछी,""_ kiss चाहिए ? "   त्रिहांश एक नजर उसे देखा फिर उससे नज़रे हटाते हुए बोला,""_ हां...!! " " नही मिलेगा.....| " राज्ञा ने मना करते हुए कहा जिसे सुन त्रिहांश की आंखे छोटी हो गई | वह घूर कर उसे देखने को हुआ की तभी राज्ञा उसके होंठो को सहलाते हुए बोली,""_ मैं आपको किस तभी करूंगी जब आप मुझे वह तीन words दुबारा कहेंगे | "   त्रिहांश का जबड़ा कस गया | वह अपने दांत पीसते हुए कहा ,""_ मैने तुम्हे कहा था ना मैंने ऐसे कुछ नही कहा था ? "  लेकिन मैने सुना था त्रिहांश...!! " राज्ञा ने पटाका से कहा | त्रिहांश का पकड़ उसके कमर में कस गया | यह देख त्रिहांश अपने दांत पीसते हुए बोला,""_ तुम्हारे कान बज रहे होंगे मैंने ऐसा कुछ नही कहा था | "   त्रिहांश का चेहरा चीड़ गया था | वही राज्ञा का मुंह बन गया था | वह त्रिहांश को घूरते हुए अपने मन में बोली,""_आपने वह तीन शब्द मुझसे कहा था त्रिहांश और जब तक आप मुझे दुबारा नहीं कहेंगे तब तक में भी आपको कोई किस्सी विस्सी नही दूंगी | "    त्रिहांश गुस्से से सामने देखते हुए कार ड्राइव कर रहा था थोड़ी ही देर में त्रिहांश का कार मंदिर के सामने आ रुका | राज्ञा अभी भी त्रिहांश के गोद में ही बैठी थी | त्रिहांश ने गुस्से से उसे एक नजर देखा फिर उसे पटकते हुए साइड मे बैठा कर कार से बाहर चला गया |    वही राज्ञा का मुंह बन गया था |  वह त्रिहांश को कोसते हुए कार से बाहर आई |   मंदिर का आस पास का माहोल बेहद सुकून भरा नज़र आ रहा था | राज्ञा आस पास देखते हुए त्रिहांश के पास गई,त्रिहांश कॉल पर समर से बात कर रहा था लेकिन उसका चेहरा बेहद सख्त था |    त्रिहांश....!! " त्रिहांश को आवाज लगाते हुए राज्ञा उसके पास गई | त्रिहांश ने कॉल होल्ड में रख कर राज्ञा से बोला ,""_ तुम जाओ ....!! "    राज्ञा ने एक नज़र मंदिर के और देखी,फिर आस पास ....मंदिर में आए हुए कुछ लड़कियां त्रिहांश को देख रहे थे जो राज्ञा को बिलकुल अच्छा नही लग रहा था | वह इनसिक्योर फील कर रही थी |    वह बोली,""_ आ आप भी आइएना | "     त्रिहांश उससे थोड़ा सख्ती से कहा,""_ मैने कहा ना तुम....!! "    त्रिहांश आगे कुछ कहता उससे पहले ही राज्ञा त्रिहांश के बेहद करीब आ कर उसके शर्ट के बटन बंद करने लगी | त्रिहांश ब्लैक शर्ट पहना था लेकिन उसने दो तीन बटंस खुला ही छोड़ा था | जिससे उसका लुक और भी अट्रैक्टिव लग रहा था |      " क्या कर रही हो तुम ? "  त्रिहांश ने उससे पूछा , राज्ञा का चेहरा फूला हुआ था | त्रिहांश ने कॉल कट करा फिर उसके टुडी को पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठाते हुए पूछा,""_ क्या हुआ ? "    " मेरे अलावा आपने किसी पर भी नजर डाला ना ..? आपका खून कर दूंगी देख लेना आप ? "  त्रिहांश की बातो का जवाब देते हुए राज्ञा ने बेहद गुस्से से कहा | त्रिहांश की बाहें तन गए | अचानक से इस लड़की में इतना हिम्मत कहा से आई ? वह उसे सीधे धमकी देने लग गई ?     त्रिहांश उसके बाजू पकड़ कर अपने तरफ खींचते हुए बोला ,""_ क्या कहा तुमने ? "    राज्ञा ने पिल्ला जैसा चेहरा बना कर उसे देखते हुए बोली,""_ आस पास की लड़कियां आपको ही देख रहे है मुझे आपको मंदिर लाना ही नहीं चाहिए था | "   त्रिहांश ने एक नज़र आस पास अपने नज़रे दौड़ाया फिर राज्ञा से बोला,""_ उन पर मैं नहीं यह लोग मुझ पर नज़र गड़ाए बैठे है ,जा कर उनका खून करो और वैसे भी यहा मुझे तुमने नही मैने तुम्हे लाया है |       त्रिहांश की बात सुन राज्ञा का मुंह बन गया | वह उसे कुछ कहती तभी उसे वेदिका की आवाज सुनाई दी |  "   राज्ञा...... राज्ञा...ऊपर आ जाओ ...!! "  वेदिका की आवाज़ सुन राज्ञा और त्रिहांश अपना सर घुमा कर ऊपर की ओर देखे .... राज्ञा ने जवाब में कहा ,""_ ऐ मम्मा...!! "    बोलते हुए त्रिहांश से बोली,""_ चलिए ना ? "   त्रिहांश एक गहरी सांस लेते हुए बोला,""_ तुम जाओ मैं आता हू...!! " " पक्का न....? " त्रिहांश की बात सुन राज्ञा मासुमियत से मगर जिद्दिपन से पूछी | त्रिहांश को हर बार उसकी जिद्द या वह उसकी बात मानने मना करती तो उसे बहुत गुस्सा आ जाता था लेकिन उसे इस वक्त बिलकुल गुस्सा नही आ रहा था बल्कि उसे उस पर प्यार आ रहा था | वह बोला,""_ पक्का...!! "    राज्ञा मुस्कुराते हुए उसके गाल पर किस कर सीढियों से चल कर ऊपर जाने लगी | त्रिहांश उसे ही देख रहा था तभी उसका फोन फिर से रिंग होने लगा | कॉल इस वक्त समर का था |      त्रिहांश का औरा सख्त हुआ | वह कॉल पिक कर बेहद सख्ती से बोला ,""_ मंदिर के चारो और सिक्योरिटी बढ़ा दो | "      त्रिहांश कॉल काट कर ऊपर जाने को हुआ की तभी वहा दो और ब्लैक कार आ कर रुक गए | त्रिहांश मुड़ कर देखा |   वह दोनो cars मलहोत्र का था | एक कार में से देविका,और उसका पति सुहास ,विराज,और उसका बड़ा भाई अभय जो इस वक्त व्हील चेयर पर था |       त्रिहांश एक नजर अभय को देखा,फिर राज्ञा के पास चला गया | वही देविका,सुहास,विराज और अभय चारों एक टक बड़े ही नफ़रत से देखने लगे थे | वह चारो फिर मंदिर के और चले गए |    मंदिर में .....,माया, अहीरा, सुधर्व,और आर्यांश एक तरफ खड़े थे तो दूसरे तरफ अजय,विनोद,आरव,दिया,उर्मी,वेदिका,इशा,इशान , राज्ञा एक तरफ बैठे थे | धीरांश दोनो परिवारों के बीच में बैठा था |    राज्ञा बार बार सीढ़ियों के पास देख रही थी क्यों की वह त्रिहांश का इंतजार कर रही थी लेकिन त्रिहांश अभी तक वहा आया ही नही था | तभी धीरांश उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोला ,""_ जाओ जा कर पूजा में बैठो ..!! "        राज्ञा ने एक बार फिर सीढ़ियों के पास देखा फिर जा कर पूजा में बैठ गई | उसके चेहरे पर मायूसी छा गई थी | क्यों की वह पूजा में त्रिहांश के साथ बैठना चाहती थी लेकिन वह इंसान अभी तक ऊपर ही नही आया था |    पंडित जो जो कह रहा था राज्ञा बेमन से करने लगी | वही सबकी नजर उसका उतरा हुआ चेहरा ही देख रहे थे | माया उसके पास आने को हुई की तभी वेदिका आ कर उससे पूछी,""_ क्या हुआ बच्चा..इस तरह बेमन से क्यों कर रही हो ? "   राज्ञा ने कहा,""_ त्रिहांश भी पूजा में मेरे साथ बैठते तो कितना अच्छा लगता लेकिन वह .....| "     राज्ञा की उदासी की वजह से सुन कर वेदिका बस उसे देखती रही,क्यों की उसे पता था त्रिहांश को भगवानों पर विश्वास नहीं था | और वह ऐसे पूजा पाट में शामिल कम ही होता था |   माया का चेहरा उतर गया था | त्रिहांश ने उसे पूरी तरह अपने में उलझा कर रख दिया था जिस वजह से उस लड़की की दिमाग में उसके अलावा कुछ नही था और वह उसके अलावा कुछ नही सूझता था | वैसे तो देख जाए तो त्रिहांश उसके साथ प्यार से काम करना कम था ,लेकिन फिर भी उस खडूस इंसान पर उसका दिल आ गया था |      वैसे कहते है ना प्यार अच्छे अच्छे को उलझा कर रख देता है तो हुआ भी यहां वैसा ही था | राज्ञा सिर्फ त्रिहांश में ही उलझी हुई थी | उसकी जिंदगी कोनसा मोड़ पर है ? उसके पास्ट में क्या हुआ था ? क्यों माया उसकी जिंदगी में आई ? कुछ भी सोचने की हालत में ही वह नहीं थी | जिस तरह त्रिहांश उसकी जिस्म की लत लगी थी बिलकुल उसी तरह उसे त्रिहांश का लत लग गया था |     माया मायूस हो कर राज्ञा को देख रही थी तभी सुधर्व ने कहा ,""_ अब उसकी खुशी में खुश होने के अलावा कुछ नही कर सकते माया....,बहुत देर हो चुका है | "   माया सुधर्व को देखने लगी | थोड़ी देर बाद त्रिहांश वहा आया,आते ही उसकी नजर माया पर गई,माया अपनी बेटी को आस भरी नज़रों से देख रही थी |          त्रिहांश फिर राज्ञा को देखने लगा,लेकिन राज्ञा का चेहरा उदास देख उसकी आइब्रोज सिकुड़ गए | वह जा कर राज्ञा के बगल में बैठते हुए सख्ती से पूछा ,""_ तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा है ? किसी ने कुछ कहा ? "   सब लोग त्रिहांश को ही देख रहे थे लेकिन त्रिहांश की बात सुन सबकी बाहें तन गए | वह कैसे ऐसा कह सकते है ? वैसे जब से अजय और विनोद को यह पता चला था की राज्ञा माया की बेटी है ,तब से वह दोनो राज्ञा से कुछ कह ही नही रहे थे | बाकी घरवालों को राज्ञा से कोई प्राब्लम नही था |      त्रिहांश को देखते ही राज्ञा की चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई थी | लेकिन वह हल्के गुस्से में उससे पूछी,""_ आपने आने में देर क्यों कर दी ? मै कब से आपका इंतजार कर रही थी ? "     त्रिहांश को राज्ञा का बिहेवियर समझ नही आ रहा था | वह अजीब नजरो से उसे देख बोला,""_ मैने कहा था ना की मैं आ जाऊंगा फिर तुम इंतजार कर रही थी ? वैसे भी मेरा यहां क्या काम हैं ? "   राज्ञा उसे जवाब में कुछ कहती की तभी पंडित राज्ञा से कहा,""_ पूजा समय इतना बात नही करते बेटी..!!"   त्रिहांश की बाहें तन गए | वह गुस्से से पंडित को घूरने लगा तो पंडित की सिट्टी पिट्टी ही घूम हो गई | वही राज्ञा त्रिहांश का बाजू पकड़ते हुए हल्के गुस्से में पूछी,""_ आप उन्हे गुस्से से क्यों घूर रहे त्रिहंश? "      " बाते पूजा के बाद भी हो सकती है ,पहले दोनो पूजा पर ध्यान दो | " धीरांस थोड़ा सख्ती से बोला ,वही त्रिहांश की आइब्रोज जुड़ गए ,वह सख्ती से बोला,""_ मुझे पूजा में कोई इंटरेस्ट नहीं है, मैं तो बस अपनी बीवी से पूछना चाह रहा था की वह उदास क्यों है ? That's it...! "   बोलते हुए त्रिहांश उठने को हुआ की तभी राज्ञा उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए बोली,""_ please त्रिहांश.... बैठिए न ? "   त्रिहांश का जबड़ा कस गया | वह उसे गुस्से से मना करना चाहा लेकिन राज्ञा का पिल्ला जैसा बना हुआ चेहरा देख वह चुप चाप बैठ गया | पता नही उसके साथ क्या हो रहा था ? वह बहुत ही जिद्दी इंसान था और कभी भी किसी की बात मानने का अदात नही था | लेकिन राज्ञा के लिए वह बदलते जा रहा था |    राज्ञा मुस्कुराते हुए उसके साथ में ही बैठ कर पूजा करने लगी | वही अब तक मलहोत्रा फैमिली भी आ गया था | उन चारो के चेहरे पर सिर्फ नफ़रत भरा भाव ही था |     वही व्हील चेयर पर बैठे हुए अभय की नजर राज्ञा पर ही टिकी थी | वह जितान आस भरी नजरों से राज्ञा को देख रहा था उतना ही नफ़रत से त्रिहांश को देख रहा था |        मलहोत्रा,अग्निहोत्री,और राठौड़ यह तीनो परिवारों के बीच सालो पहले अटूट रिश्ता था लेकिन सिर्फ त्रिहांश की वजह से वह तीनो एक दूसरे के दुश्मन बन गए थे | जिताना त्रिहांश इन सबके लिए जिम्मेदार था उतना ही राज्ञा थी लेकिन इस बात से राज्ञा अंजान थी |         देविका अभय के कंधे पर हाथ रखते हुए उसे आंखो से ही इशारा किया | अभय अपने कंधे से उसका हाथ हटा कर बस चुप हो गया | वही विराज का नजर उर्मी पर था | बले ही इशान उसे कही का नही छोड़ा था लेकिन उर्मी को हासिल करना अब उसका जिद्द बन गया था | उर्मी के लिए कोई प्यार नही था लेकिन हा कुछ ऐसा था जो उसे अपना मकसद पूरा करना था या यू कहे की अग्निहोत्री से अपना बदला पूरा करना था |  विराज की नजर उर्मी पर देख अर्यांश का चेहरा गुस्से से भर गया था | वह उर्मी के पास आ कर उसे अपने सामने कर खड़ा हो गया जिससे विराज को उर्मी नही आर्यांश का पीठ दिखने लगा |    अर्यांश को उर्मी के पास जा कर चिपकता देख सुधर्व ने अपना सर हिला दिया लेकिन माया की आंखे छोटी हो गई थी | वह ना समझी में आर्यांश और उर्मी को देखने लगी,की उतने में उसकी नजर अहीरा पर गई | आर्यंश को इस तरह उर्मी के पास जाता देख वह भी अब इशान के करीब जा खड़ी थी |   इशान ने उसे एक नजर देखा फिर इग्नोर कर दिया लेकिन अहीरा तो अहीरा थी | उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था ,उसके कसके इशान का हाथ पकड़ उसमे अपना हाथ फसा कर बोली,""_ अगली बार इग्नोर किया ना,तो तुम्हारा किडनी छीन कर बिखरीयों को बांट दूंगी | "   इशान का आईब्रो रेंज हुआ |      To be continued...…..