Chapter 50: chapter 50

Billionaire's Dark DesireWords: 29707

 अब आगे ......          त्रिहांश के जाते ही राज्ञा ने सोने की कोशिश की लेकिन बार बार उसके दिमाग में माया और माया के बारे में त्रिहांश के कहीं भी बातें ही घूमने लगे थे | त्रिगंश उसे सच बताते बताते रुक गया था लेकिन क्यों ? यह तो सिर्फ त्रिहांश ही जानता|        राज्ञा माया के बारे में जैसे-जैसे सोच रही थी, वैसे-वैसे  अजीब सी बेचैनी महसूस कर रही थी ,क्योंकि उसकी मां इस वक्त अस्पताल में एडमिट थी तो जाहिर सी बात थी कि राज्ञा को तकलीफ़ होगा ही....वह माया के लिए अजीब सी बेचैनी मेहसूस कर रही थी लेकिन क्यों ? इसका जवाब इस वक्त उसके पास नही था या यू कहे की उसे कोई बताने वाला नही था |      हाल में इस वक्त वेदिका और दिया के अलावा कोई नही था पूरा घर ही इस वक्त खाली खाली हो गया था | राज्ञा वेदिका और दिया के बगल में जा कर बैठते हुए उर्मी और इशा के बारे में पूछी,""_ मम्मा...चाची जी.....इशा और उर्मी कहा है ? "       " उर्मी इशान के साथ बाहर गई हुई है और इशा तो अपने रूम मे है | " वेदिका ने जवाब में कहा |     राज्ञा की नजर बार बार door के तरद जा रही थी | शायद उसे किसी का इंतज़ार था | या यू कहे की वह माया को ही देखना चाहती थी | जब से त्रिहांश के मुंह से उसने सुना था की माया उसकी मां है तब से राज्ञा का हालत सोच सोच कर खराब हो रहा था | उसे पता करना था की जो त्रिहांश कह रहा था वह सच है या झूठ ? राज्ञा के मन में बहुत कुछ चल रहा था और वह अब वाणी से मिलना के बारे में सोच रही थी |     हॉस्पिटल......          त्रिहांश अपने दोनो हाथो को जेब में डाल कर ,बिना किसी एक्सप्रेशन लिए ही एक टक माया को देख रहा था |      माया की नजर त्रिहांश पर ही थी लेकिन चेहरे पर बेहद नफरत और नाराज़गी से मिले जुले भाव नजर आ रहे थे | वही त्रिहांश का औरा भी सीरीपिस था | तभी माया बोली,""_ यहा आने की कोई खास वजह ? "     त्रिहांश के होंठ मुड़ गए | वह वही रखे हुए चेयर को अपने करीब खींच कर उस पर बैठते हुए बोला,""_ बस अपनी सासू मां की हाल चाल पूछना चाहता था | "   माया की जबड़ा कस गया | त्रिहांश के वजह से ही तो उसका यह हाल बना था | त्रिहांश के होंठ मुड़ गए थे | वह माया के करीब जाते हुए पूछा,""_ मेरे खिलाफ़ जाना आप पर कैसा भारी पड़ रहा है मिसेज राठौड़ ? "         माया गुस्से में ही उसे घूर रही थी | तभी त्रिहांश आगे बोला,""_ इसीलिए कह रहा हु सासू मां जो चल रहा है उसे चल.....!! "    " बिलकुल नही त्रिहांश अग्निहोत्री ,बिलकुल नहीं |" त्रिहांश की बात को बीच में ही रोकते हुए माया गुस्से से बोली,वही त्रिहांश का जबड़ा कस गया था | अपने काम में किसी भी तरह माया बस रुकावट बनने का कोशिश करती थी यह  त्रिहांश को कभी पसंद नही था |      वह बोला,""_ ठीक है मिसेज राठौड़,जिस तरह आज आप को यहा पहुंचाया है ,बिलकुल इसी तरह आपको ऊपर पहुंचाने में भी देर नहीं करूंगा | "        माया की हाथो की मुट्ठी बन गईं थी | उसने उसे कुछ नही कहा ,लेकिन उसके दिल में त्रिहांश एक एक लफ्ज़ घायल कर  गए थे |      वही त्रिहांश का औरा भी सख्त था | वह थोड़ी देर माया को गुस्से से देखा फिर वार्ड से बाहर चला गया |    शाम का वक्त......         माया का तबियत इतना भी खराब नही हुआ था जिस कारण हॉस्पिटल से उसे जल्द ही डिस्चार्ज मिल गया और माया भी जिद्द ही कर रही थी की वह हॉस्पिटल में नही रहना चाहती है। तो सुधर्व और अर्यांश ने उसे हवेली ले आए थे |      राज्ञा सीढियों के पास खड़े हो कर एक टक माया को देख रही थी | माया अर्यांश और सुधर्व के सहारे अपने रूम के तरफ चल रही थी | भले ही वह तीनो माया को रूम के तरफ ले जा रहे थे लेकिन उनका पूरा ध्यान राज्ञा पर ही था |       वे लोग उससे गुजर कर आगे जाने को हुए की तभी राग्य ने माया से कहा,""_ अब कैसी है आपकी तबीयत ? "    बस एक लाइन ना जाने माया को पल भर में ही कितना ठंडक पहुंचा दिया यह वह बयां तक नही कर सकती | वह मूड राज्ञा को देखी, राज्ञा उन्हे ही देख रही थी लेकिन उसकी आंखे या चेहरे पर उदासी के अलावा कोई भाव नहीं था |     माया ने कहा,""_ अब ठीक है बच्चा | "     माया जवाब सुन राज्ञा के आंखे अचानक से नम हो गए पता नही क्यों ? माया ने जिस लहजे में उसे जवाब दिया उससे उसके दिल में कुछ अजीब सा दर्द का लहर उठ चुका था | वह जल्दी से माया से नज़रे हटा कर अपना सर हिलाई |      सुधर्व और आर्यांश फिर माया को ले कर उसके रूम में चले गए | दूर से खड़े धीरांश यह सब कुछ देख रहा था लेकिन उनके चेहरे पर कठोरता के भाव के अलावा कुछ नही था |          वह फिर हवेली से बाहर चले गए | वही राज्ञा की बेचैनी बढ़ गई थी | उसे वानी को कॉल लगाते हुए अपने रूम में चली गई |     रात का वक्त......     राज्ञा एक टक काली आसमान को देखते हुए खड़ी थी | असमान में आज ना चांद था ना कोई स्टार्स,सिर्फ खालीपन बिलकुल राज्ञा की तरह था | उसके साथ क्या हो रहा है ? उसे समझ नही आ रहा था और उसे कोई बताने वाला भी नहीं था |      बहुत ही ठंडी हवा चल रहा था | जिससे राज्ञा हल्के से कांप भी रही थी | तभी उसे पीछे से किसी ने अपने गरम आगोश में भर लेता है तो राज्ञा की आंखे कसके बंद हो गए | वह त्रिहांश का नाम गुनगुनाते हुए पीछे के तरफ थोड़ा झुक कर उसके कंधे पर अपना सर टिकाली,""_ त्रिहांश.....!!! "      त्रिहांश उसे अपने बाहों में और जकड़ते हुए थोड़ा सख्ती से पूछा,""_ यहा क्यों खड़ी हो ? "     राज्ञा उसके हाथो में अपने हाथो को फसाते हुए बोली,""_ बस ऐसे ही .....!! "     बोलते हुए राज्ञा मुड़ कर त्रिहांश को देखी,त्रिहांश बिना भाव के उसे ही देख रहा था | राज्ञा उसके सीने में अपना सर टिकाते हुए पूछी,""_ हम यहा से कब जा रहे है त्रिहांश ? "     त्रिहांश झुक कर राज्ञा का मुरझा हुआ सा चेहरा देखा फिर उसके गाल पिंच करते हुए कहा,""_ आज ही तो आए है बीवी...| "     उनके आए हुए बस एक ही दिन हुआ था लेकिन राज्ञा को यहां का माहोल अजीब लग रहा था | उसे समझ नही आ रहा था की यहा राठोड़ और अग्निहोत्री परिवार साथ में ही मौजूद है लेकिन उन दोनो परिवार के बीच में कैसा रिश्ता है ? उसे समझ नही आ रहा था | पास तो है लेकिन साथ नही है क्यों ?           राज्ञा अपना सर ऊपर कर त्रिहांश को देखी,त्रिहांश उसके बालो में उंगलियां फिराते हुए दूर तक अपने नज़रे गड़ाए खड़ा था | राज्ञा ने कहा ,""_ हम यहां क्यों ...? "     राज्ञा अपना सवाल पूरा कर पाती उससे पहले ही त्रिहांश ने उसके होंठो को अपने मुंह में भर लिया | राज्ञा को इसकी बिलकुल उम्मीद नही थी और वह इस वक्त अपने आंखे बड़ी बड़ी कर उसे ही देखने लगी थी |      वही त्रिहांश का एक हाथ राज्ञा के कमर में था तो दूसरा राज्ञा के गाल पर,वह उसके कमर और गाल को सहलाते हुए अपने किस को डीप करते जा रहा था |     राज्ञा अपने आंखे बंद कर त्रिहांश के पीठ पर हाथ फेरते उसके किस को फील करने लगी | त्रिहांश उसे किस करते हुए ही राज्ञा को कमर से उठा कर रूम में ले गया | राज्ञा खुद को उसके बाहों में ढीला छोड़ चुकी थी | वही त्रिहांश उसे आराम से लेटा कर खुद उसके ऊपर आ कर राज्ञा के पूरे चेहरे पर किस करने लगा | राज्ञा आहे भरते हुए त्रिहांश के छोटे छोटे बियर्ड पर हाथ फेर रही थी |         इशान का रूम....      विराज के साथ मार पीठ करने से इशान के बदन में बहुत सी छोट आए हुए थे और वह इस वक्त सो गया था | तभी उसके रूम का door धीरे से खुला ,इशान ज्यादा गहरी नींद में नही था | दरवाजा खुलने की आवाज सुन कर उसने लाइट्स ऑन किया ,लेकिन सामने खड़ी लड़की को देख वह वापस लेटते हुए बोला,""_ तुम....तुम रात उल्लू बने क्यों फिर रही हो ? "     रूम में अहीरा ही आई थी | उसका चेहरा उदास था ,लेकिन इशान का सवाल सुन कर उसका मुंह भी बना था | वह धीरे से इशान के पास आ कर उसके घाव को देखते हुए मासूमियत से पूछी,""_ क्या तुम्हे ज्यादा दर्द हो रहा है ? "      इशान आही का चेहरा देखा,फिर उसके गाल खींचते हुए कहा,""_ थोड़ा बहुत...!! "     अहीरा धीरे से इशान के गाल को सहलाते हुए अपने हाथ नीचे ले गई | अहीरा का इशान को छूने का इंटेंशन गलत नही था लेकिन इशान का हालत खराब हो रहा था | वह थोड़ा अटकते हुए उससे पूछा,""_ आ आही क्या कर रही हो तुम ? "    अहीरा इशान के सीने पर हाथ फेरते हुए बोली,""_ आपको यहां दर्द हो रहा होगा न ? "   इशान जल्दी से उसका हाथ हटा कर उठ कर बैठते हुए बोला,""_ उतना भी नही हो रहा है ...तुम अभी जाओ |"     अहीरा एक टक इशान को ही देख रही थी | इशान के चेहरे पर बनती बिगड़ती एक्सप्रेशन को देख उसे समझ आ गया की इशान क्या सोच रहा है ?    अहीरा की चेहरे पर टेढ़ी स्माइल आ गई,वह उसे सताने  उसके बेहद करीब बैठ कर ईशान के होंठो के करीब अपने उंगलियां फिराते हुए पूछी,""_ आपको कुछ कुछ करने का मन कर रहा है इशान ? "       इशान की आंखे छोटी हो गई ,वह उसका हाथ हटाते हुए बोला,""_ तुम मुझे तंग मत करो आही...मेरा सिचुएशन तो देख लिए करो....| "    आही चीड़ गई...वह गुस्से से उसे ताना मारते हुए बोली,""_ आपको इतना फाइटिंग करने की क्या जरूरत थी ? बाहर गार्ड्स थे न उन्हे बुला लेते ? "    इशान का चेहरा सख्त हो गया और वह एक टक गुस्से से आही को देखने लगा तो आही ने जल्दी से अपने बातो को u टर्न लेते हुए बोली,""_ ऐसा मैं बिल्कुल नही कहना चाऊंगी इशान....आपको तो और मार पीट करते हुए तोड़ फोड़ करना चाहिए था ,ज्यादादर क्या होता ? आपके दो तीन हड्डियां टूटते और उस आदमी का ...!!! "    Just shut up....!!! " इशान गुस्से से गुर्राया | वही आही का मुंह बन गया | वह थोड़ी देर इशान के बगल में ही बैठी रही,फिर उठ कर जाते हुए बोली,""_ आप सो जाइए ,good night| "    वह जाने को उठी ही थी की इशान ने उसके उंगलियों में अपना उंगलियां फसाते हुए अपने बगल में बैठाया | आही उसे मासूमियत से देखने को हुई की तभी इशान उसके कंधे पर अपना सर रखते हुए पूछा,""_ क्यों आई थी यहा? वह भी इस वक्त...? "    आही उसके बालो में उंगलियां फिराते हुए बोली,""_ मुझे आपसे kissy लेना था | "    इशान के होंठ मुड़ गए | वह अपने चेहरा ऊपर आही को देखा | आही मासूमियत से उसे ही देख रही थी | लेकिन शरारत उसके आंखो में साफ साफ झलक रहा था | वही इशान उसके होंठो के करीब बढ़ने लगा | आही की धड़कने तेज हो गए | वह कसके इशान के शर्ट को पकड़ते हुए उसके होंठो पर अपना होंठ रख देती है तो इशान झट से उसके होंठो को अपने होंठो के गिरफ्त में ले कर चूमने लगा |    वही इशान अपने एक हाथ को आही के टी शर्ट के अंदर ले जा कर उसके कमर को सहलाने लगा | आही की धड़कने एक दम से तेज हो गए थे | वह अपने दोनो बाहें इशान के गले में लपेट कर उसके किस का रिस्पॉन्स देने लगी |      कुछ ही देर में उन दोनो का सांसे फूलने लगे तो वह दोनो एक दूसरे के होंठो को छोड़ कर तेज़ तेज़ सांस लेते हुए एक दूसरे को नशे से देखने लगे | इशान का हाथ अभी भी बेहद सेंशुअली राज्ञा की कमर को सहला रहा था तो वही आही की हाथ इशान के सीने में घूम रहा था | दोनो एक दुसरे के फिर से  करीब बढ़ गए |       त्रिहांश का रूम....     रूम में राज्ञा की मीठी मीठी आवाज गूंजने लगी थी | उसके दोनो हाथ  बेडशीट में कस गए थे तो वही त्रिहांश उसके ऊपर लेट कर उसे ही बेतहाशा चूम रहा था | राज्ञा की कपड़े इस वक्त नीचे फर्श पर बड़े ही बेडंग से गिरे हुए थे | वही राज्ञा के ऊपर लेटे हुए त्रिहांश शर्टलेस था |        वह पगालो की तरह राज्ञा का सीना सहलाते हुए उसके पूरे चेहरे पर किस कर रहा था | वह बहुत ही डिस्पेरेट हो कर उसे प्यार कर रहा था जिससे राज्ञा को थोड़ा दर्द मेहसूस हो रहा था |        वह आहे भरते हुए अपना चेहरा इधर उधर करने लगी वही त्रिहांश अपने कपड़े में नीचे फेंक कर राज्ञा के ऊपर आ गया | राग्या अपने निचले होंठो को बाइट करते हुए अपने नज़रे इधर उधर दौड़ा रही थी |        त्रिहांश उसके चेहरे के करीब अपने होंठो को ले जाते हुए उसके निचले होंठो को सहलाने लगा | राज्ञा की धडकने तेज हो गए थे | वह धीरे से त्रिहांश के चेहरे को अपने हाथो में भर कर किस करने को हुई की तभी त्रिहांश खुद ही उसके गालों को बारी बारी से चूमते हुए उसके निचले होंठो को अपने दांतो के बीच दबा लिया |      राज्ञा की आंखे कसके भींच गए | और उसके हाथ अब त्रिहांश के बालो में सरकने लगे | वही त्रिहांश उसके होंठो को छोड़ कर राज्ञा के जीव से खेलने लगा | त्रिहांश का एक हाथ राज्ञा के गाल को सहला रहा था लेकिन दूसरा हाथ लगादर राज्ञा का कभी सीना सहलाता तो कभी कमर को सहलाते हुए अजींब सा सनसनाहट पैदा कर रहा था|       राज्ञा की मुंह से अब सिसकियां निकल रही थी | वही त्रिहांश पगालो की तरह उसके चेहरे को चूमते हुए नीचे सरकने लगा |        राज्ञा पूरी तरह उसकी बाहों में मचलने लगी थी क्यों की त्रिहंश का चूवन ही ऐसा था | थोड़ी देर पहले वह लड़की बहुत ही बेचैन मेहसूस करते हुए अपने ही मन में उठ रही सवालों से तंग आ गई थी लेकिन त्रिहांश के बाहों मे जाते ही वह बेफिक्र हो गई थी ना कोई सवाल नही किसी भी तरह परिशानी ......वह दुनिया जहां का सुकून बस त्रिहांश के बाहों में मेहसूस करते हुए खुद को उसके हवाले कर चुकी थी | आखिर उसके जिंदगी का सुकून का हिस्सा सिर्फ त्रिहांश ही तो था | भले ही वह उसके साथ रुड हो कर दर्द पहुंचाता लेकिन उससे कही ज्यादा उसे सुकून भी तो देता....     राज्ञा पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी | वही त्रिहांश भी मदहोश हो कर राज्ञा के जिम्म के हर एक हिस्से को चूमता जा रहा था और अपने ही निशान छोड़ता जा रहा था |     राज्ञा मीठी मीठी एहसास को जीते हुए आहे भर रही थी |  की तभी उसकी मुंह से हल्का सा चिक निकल गया और इसी के साथ उसके आंखो के कोने से आंसू बह निकला | त्रिहांश उसमे खुद को समाने की पूरा जोर डाल रहा था | वही राज्ञा की मुंह से आहे अब चीके की तरह निकल रहे थे |       उन दोनो का शरीर एक दूसरे से लिपट चुका था और धीरे धीरे पसीने से भीग भी रहा था | राज्ञा के चेहरे पर दर्द भी नजर आ रहा था और सुकून का भाव भी.....वह अपने होंठो को बार बार काटते हुए त्रिहांश को फील कर रही थी | कितना सुकून था उस बेरहम इंसान के बाहों में खोना,कितना सुकून था अपने रूह में उसे शामिल करना,कितना सुकून था उसके लिए उसके ही बाहों में भीगना.....प्यार का खेल था या जिस्म का.... राज्ञा के दिल सिर्फ सुकून का एहसास को जी रहा था |    सुबह के पांच बजे की आस पास त्रिहांश रुक कर राज्ञा को देखा , राज्ञा अब तक थक गई थी और अंधखुली आंखो से उसे ही आहे भरते हुए देख रही थी |    To be continued........                      Â